जयपुर: देशभर में चल रहे खेत बचाओ अभियान के तहत कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने प्रदेश के किसानों और जनप्रतिनिधियों से आह्वान किया है कि अपने खेत के 25 प्रतिशत हिस्से में जैविक खेती करें ताकि जमीन को बंजर होने से बचाया जा सके. डा. मीणा ने आशंका भी जताई की रासायनिक खाद से कहीं आगामी सालों में जमीन बिल्कुल बंजर ना हो जाए. कृषि मंत्री ने क्या कुछ कहा.
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही दिल्ली में खरीफ-2026 के दौरान देशभर में खेत बचाओ अभियान चलाने का आह्वान किया और उसके बाद राजस्थान में बड़े स्तर पर अभियान चलाकर किसानों को जोड़ा जा रहा है. कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने आज पंत कृषि भवन से वीसी के माध्यम से प्रदेशभर के अधिकारियों से रासायनिक खाद का उपयोग कम करने, किसानों को मृदा परीक्षण आधारित, संतुलित और सही मात्रा में खाद और अन्य कृषि इनपुट के उपयोग के बारे में जागरूक करने, हरी खाद, जैविक और जैव-उत्पादों के उपयोग को बढ़ाने और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) के प्रदर्शन आयोजित करने के लक्ष्य को लेकर बातचीत की. उन्होंने कहा कि जैविक खेती ही किसान के खेत को बचा सकती है.
खेत बचाओ अभियान का उद्देश्य
--मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का संतुलित और समन्वित उपयोग व रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता को कम करना
---जागरुकता कार्यक्रमों, प्रशिक्षण एवं फसल प्रदर्शन के माध्यम से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना
--वैकल्पिक उर्वरकों व संतुलित पोषक प्रबंधन पद्धतियों के उपयोग के लिए जन-जागरूकता बढ़ाना
--यूरिया/डीएपी के विकल्प के रूप में एनपीके और एसएसपी के उर्वरकों को बढ़ावा देना
--जैव उर्वरक, नैना उर्वरक, जैविक खाद और सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग को प्रोत्साहित करना
--ढेचा, ग्वार के माध्यम से मिट्टी के गुणों में सुधार करते हुए पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाना
--पारंपरिक और आधुनिक कृषि पद्धतियों के समन्वय से मृदा स्वास्थ्य संवर्धन को बढ़ावा देना
--श्रीगंगानगर, अलवर, बारां, भरतपुर, बीकानेर, बूंदी, हनुमानगढ़, जोधपुर, कोटा और नागौर जिले में संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए जागरूकता बढ़ाना
--ग्रामीण समुदायों में खाद्य तेल की खपत को कम से कम 10 प्रतिशत कम करने की जागरूकता पैदा करना
--खेती कार्य से जुड़े जनप्रतिनिधि स्वेच्छा से अपने खेत में 25 प्रतिशत कृषि भूमि पर प्राकृतिक खेती अपनाएं
कृषि मंत्री डा. मीणा ने कहा कि किसान के खेत को अनावश्यक फर्टिलाइजर के उपयोग से बचाना है. जमीन के लिए घातक उर्वरकों के उपयोग को कम करने पर ध्यान देना होगा. एक समय ऐसा आएगा कि जमीन की उर्वरक क्षमता समाप्त हो जाएगी. इसीलिए अभियान के तहत सोयल हैल्थ की जांच पर ध्यान देना होगा. किसान को जानकारी देनी है कि वह उत्तम फर्टिलाइजर का इस्तेमाल करें. किसान को हरी खाद की उपयोगिता बतानी होगी. हम चाहते हैं कि हमारा राज्य खेत बचाओ अभियान में सबसे अग्रणी रहे.