जयपुर : नेपाल त्रासदी के बाद हम मरु प्रदेशवासी कितने तैयार हैं. नेपाल त्रासदी के बाद राजस्थान में प्राकृतिक आपदा जोखिम पर नई चिंता सामने आयी है. ग्लेशियर नहीं, मरुस्थलीकरण, रेत, जल और बदलता भूगोल बड़ी चुनौती है. जयपुर स्थित GSI पश्चिमी क्षेत्र से वैज्ञानिक निगरानी को आधार मिला है.
जैसलमेर के भूकंपीय जोखिम की सूक्ष्म क्षेत्रीय जांच से संवेदनशीलता सामने आयी है. थार के सीमावर्ती क्षेत्रों में मरुस्थलीकरण की वैज्ञानिक पड़ताल लगातार जारी है. राजस्थान में रेत के तूफानों के स्रोत और प्रसार का अध्ययन किया है. अत्यधिक बारिश के बीच रेगिस्तानी क्षेत्रों में अचानक बाढ़ का खतरा है.
अरावली का क्षरण जल, मिट्टी, जैवविविधता और जलवायु से जुड़ी चिंता है. हरियालो राजस्थान से भू-दृश्य सुधार और कार्बन भंडारण की उम्मीद है. घासभूमि, झाड़ियां और मिट्टी भी कार्बन भंडारण के अहम आधार है. पुराने किलो और स्मारकों की भूगर्भीय सुरक्षा पर फोकस बढ़ा है. GSI, मौसम विभाग, इसरो और प्रशासन के साझा तंत्र पर चेतावनी का जोर है.