जयपुर: देवगुरु बृहस्पति 31 अक्तूबर 2026 को सिंह राशि में गोचर करेंगे. गुरु सिंह राशि में 25 जनवरी 2027 तक रहेंगे. इसके बाद दोबारा से उल्टी चाल से चलते हुए कर्क राशि में प्रवेश कर जाएंगे. पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि गुरु शनिवार 31 अक्तूबर 2026 को दोपहर 12:01 मिनट पर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे. वे 25 जनवरी 2027 तक इसी राशि में रहेंगे. इसके बाद वक्री अवस्था में वापस कर्क राशि में लौट जाएंगे. गुरु 13 दिसंबर 2026 को सिंह राशि में वक्री होंगे. इस राशि परिवर्तन के साथ ही गुरु मघा नक्षत्र में भी प्रवेश करेंगे और 25 जनवरी 2027 तक इसी नक्षत्र में रहेंगे. गुरु करीब 87 दिनों तक इस राशि में रहेंगे और इस दौरान कुछ राशि वालों पर अपनी कृपा बनाए रखेंगे. सिंह राशि को आत्मविश्वास, मान-सम्मान और नेतृत्व क्षमता से जोड़कर देखा जाता है. ऐसे में भाग्य और ज्ञान के कारक गुरु के सिंह राशि में आने से खास संयोग बनेगा. इसके अलावा, मंगल ग्रह भी 12 नवंबर 2026 को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे. ऐसे में दोनों ग्रहों का मिलन कुछ राशि वालों के लिए भाग्य के द्वार खोल सकता है. बड़ी सफलता मिलने से लेकर करियर, नौकरी, घर-परिवार और मान-सम्मान के मामलों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि गुरु का गोचर सिंह राशि में 31 अक्टूबर को हो रहा है. यहां गुरु अतिचारी गति से गमन करते हुए 13 दिसंबर को वक्री होकर वापस से 25 जनवरी 2027 को अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश कर जाएंगे. यानी 31 अक्टूबर 2026 से 25 जनवरी 2027 तक गुरु मित्र ग्रह सूर्य की राशि सिंह में संचार करेंगे. गुरु का यह गोचर अग्नि तत्व राशि में होगा जहां मंगल का भी गुरु से संयोग बनेगा. ऐसे में आने वाले 6 महीनों में वायु दुर्घटना की आशंका रहेगी. अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में कुछ बड़े अनुसंधान हो सकते हैं. साथ ही कई राशियों पर भी इसका व्यापक असर हो सकता है. गुरु के सिंह राशि में प्रवेश करते ही अलग-अलग प्रकार के सामाजिक राजनीतिक आर्थिक और प्राकृतिक परिवर्तन होंगे. वहीं बृहस्पति का केतु से युति संबंध बनेगा तथा अलग-अलग प्रकार के शोध एवं प्रशासनिक क्षेत्र में विकास तथा नवाचार की स्थिति दिखाई देगी.
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि वैदिक ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति को सुख, भाग्य, धर्म, धन और विस्तार आदि का कारक ग्रह माना जाता है. गुरु एक राशि में करीब 13 महीनों तक रहते हैं फिर इसके बाद दूसरी राशि में गोचर करते हैं. लेकिन इस साल गुरु अतिचारी हैं यानी गुरु तेज चाल से चल रहे हैं जिससे जल्दी राशि परिवर्तन कर रहे हैं. गुरु की स्थिति में बदलाव का असर देश-दुनिया के साथ-साथ सभी 12 राशियों के जातकों के ऊपर भी देखने को मिलता है.
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि मेदिनी ज्योतिष के ग्रंथ भविष्य फल भास्कर के अनुसार जब क्रूर ग्रह वक्री हों तथा शुभ ग्रह अतिचारी हों तब असामान्य वर्षा और दुर्भिक्ष से जन-धन की हानि होती है.
क्रूरा वक्रा यदा काले सोम्या: शीघ्रास्तु चागता:.. अनावृष्टि च दुर्भिक्षं नृपराष्ट्रभयन्करा :..
गुरु की अतिचारी चाल
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि वैदिक ज्योतिष के अनुसार, अतिचारी चाल का मतलब है कि बहुत तेज चलना और त्वरित होना. यहां गुरु की अतिचारी चाल का अर्थ है कि गुरु जिस राशि में मौजूद हैं, वहां सामान्य चाल ना चलकर बहुत तेजी से गोचर कर रहे हों. आमतौर पर गुरु एक राशि से दूसरी राशि में 12 से 13 महीने तक मौजूद रहते हैं लेकिन अतिचारी होते हैं, तब वह जल्दी राशि परिवर्तन करते हैं और जीवन के सभी क्षेत्रों में जैसे करियर, पारिवारिक जीवन, लव लाइफ, तरक्की आदि समेत सभी महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं. ज्योतिष में गुरु ग्रह ज्ञान, करियर, शिक्षा, भाग्य, धर्म, संतान, धन, वैवाहिक जीवन आदि के कारक ग्रह हैं., जब गुरु अतिचारी चाल चलते हैं तब इनके जल्दी प्रभाव देखने को मिलते हैं.
बृहस्पति केतु की बनेगी युति
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि वर्तमान में केतु सिंह राशि में गोचर कर रहे हैं सिंह राशि के केतु के साथ बृहस्पति का युति संबंध बनेगा यह अलग प्रकार के वैज्ञानिक शोध एवं शैक्षणिक संशोधन की ओर संकेत कर रहा है यह भी एक अनुकूल स्थिति है इसका लाभ भविष्य में दिखाई देगा.
11 साल बाद सिंह राशि में होगा गुरु का प्रवेश
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि देवगुरु बृहस्पति 11 साल 3 महीने बाद अपनी उच्च राशि कर्क को छोड़कर 31 अक्टूबर को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे. ज्योतिष गणना के मुताबिक गुरु का यह दुर्लभ गोचर सत्ता, शिक्षा और अर्थव्यवस्था की दिशा बदल सकता है. इससे पहले गुरु 14 जुलाई 2015 से 11 अगस्त 2016 तक सिंह राशि में विचरण कर चुके हैं. बृहस्पति 12 साल में राशि का एक पूरा चक्र करते हैं. इस बार उन्होंने 2 जून को मिथुन से कर्क में प्रवेश किया था, जो उनकी उच्च राशि है. अब सिंह में प्रवेश के बाद वे वक्री चाल में रहेंगे और 2027 में फिर से कर्क राशि में लौट आएंगे.
असर
भविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास ने बताया कि रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. आय में इजाफा होगा. राजनीति में बड़े स्तर पर परिवर्तन देखने को मिलेगा. व्यापार में तेजी आएगी. देश में कई जगह ज्यादा बारिश होगी. प्राकृतिक घटनाएं होगी. भूकंप आने की संभावना है. तूफान, बाढ़, भूस्खलन, पहाड़ टूटने, सड़के और पुल भी टूटने की घटनाएं हो सकती हैं. बस और रेलवे यातायात से जुड़ी बड़ी दुर्घटना होने की भी आशंका है. बीमारियों का संक्रमण बढ़ सकता है. शासन-प्रशासन और राजनैतिक दलों में तेज संघर्ष होंगे. सामुद्रिक तूफान हवाई जहाज़ और जहाज-यान दुर्घटनाएं भी हो सकती हैं. खदानों में दुर्घटना और भूकंपन से जन-धन हानि होने की आशंका बन रही है. दुनियाभर के कई देशों में सत्ता पक्ष के खिलाफ जनाक्रोश तीव्र हो सकता है. लोगों का धैर्य टूटने लगेगा, और सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन, जन आंदोलन और राजनीतिक अस्थिरता देखने को मिल सकती है. शासन-प्रशासन और राजनैतिक दलों में तेज संघर्ष होंगे. हवाई जहाज़, ट्रेनों, और जहाजों में तकनीकी खराबी या मानवीय भूलों के कारण गंभीर घटनाएं होंगी. इसके अलावा, आगजनी, विस्फोट, गैस लीक, और फैक्ट्रियों में हादसे बढ़ सकते हैं. रक्षा उपकरणों और बिजली संयंत्रों में भी छोटी लापरवाहियां भारी तबाही का कारण बन सकती हैं. ड्रोन, रक्षा तकनीक, और अंतरिक्ष अनुसंधान में आश्चर्यजनक सफलताएं मिल सकती हैं. चंद्रमा, मंगल, और अन्य ग्रहों पर मानव मिशनों की गति तेज़ होने की संभावना है. वैज्ञानिक शोध, औषधि निर्माण, और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों में भी नयी खोजें होंगी. इसके अलावा ए आई और क्वांटम कम्प्यूटिंग में क्रांतिकारी विकास संभव है.
उपाय
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि देवगुरु बृहस्पति को प्रसन्न करने के लिए प्रतिदिन ॐ भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का एक माला जाप करें. साथ ही भगवान विष्णु को संभव हो तो पीले रंग के फल का भोग लगाकर प्रसाद के रूप में बांटें. देवगुरु को प्रसन्न करने के लिए बृहस्पतिवार के दिन दाल, हल्दी, पीले वस्त्र, बेसन के लड्डू आदि किसी योग्य ब्राह्मण को दान करें और केले के वृक्ष पर जल चढ़ाएं. राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करें. प्रतिदिन भगवान श्री विष्णु की आराधना के बाद हल्दी और चंदन का तिलक करें. हं हनुमते नमः, ऊॅ नमः शिवाय, हं पवननंदनाय स्वाहा का जाप करें. प्रतिदिन सुबह और शाम हनुमान जी के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाएं. लाल मसूर की दाल शाम 7:00 बजे के बाद हनुमान मंदिर में चढ़ाएं. हनुमान जी को पान का भोग और दो बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं. ईश्वर की आराधना संपूर्ण दोषों को नष्ट एवं दूर करती है. महामृत्युंजय मंत्र और दुर्गा सप्तशती पाठ करना चाहिए. माता दुर्गा, भगवान शिव और हनुमानजी की आराधना करनी चाहिए.
आईए भविष्यवक्ता और कुंडली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास से जानते है गुरु के सिंह राशि में गोचर का सभी 12 राशियों पर कैसा असर दिखेगा
मेष राशि
यह गोचर अच्छा रहेगा. इस दौरान आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी. साहस और पराक्रम रंग लाएगा.
वृषभ राशि
आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है. आकस्मिक धन लाभ हो सकता है या किसी अटके हुए धन की वापसी हो सकती है.
मिथुन राशि
पराक्रम और सफलता मिल सकती है. इस समय आपके अटके हुए कार्य गति पकड़ सकते हैं और पराक्रम कार्यों में सफलता दिलाएगा.
कर्क राशि
सामाजिक मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि के संकेत हैं. इस समय सामाजिक रूप से आपका कद बढ़ सकता है. कार्यक्षेत्र में आपकी छवि प्रभावशाली रहेगी.
सिंह राशि
गुरु का गोचर लाभकारी रहेगा क्योंकि गुरु आपकी राशि में ही आ रहे हैं. इस समय आपके व्यक्तित्व में निखार आएगा और आप रोजी-रोजगार में तरक्की हासिल कर सकते हैं.
कन्या राशि
यह समय धनदायक साबित हो सकता है. इस समय आय के नए स्रोत बनेंगे और पुराने साधनों से भी रुपए पैसों की प्राप्ति होगी. आय में वृद्धि के संकेत हैं.
तुला राशि
आर्थिक लाभ के अवसर मिलेंगे. नौकरी में आगे बढ़ने या उन्नति के लिए अच्छे अवसर सामने आएंगे, जिनका आप भरपूर लाभ उठाएंगे. व्यावसायिक सफलता हासिल होगी.
वृश्चिक राशि
भावनात्मक उथल-पुथल से राहत मिलेगी. इस समय आप मानसिक शांति का अनुभव कर सकते हैं. धन की स्थिति में सुधार होता दिख रहा है.
धनु राशि
भाग्य का साथ मिलेगा. भाग्य वश आपके लंबित कार्य पूर्ण हो सकते हैं. सामाजिक मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी. जीवन में सकारात्मकता बनी रहेगी. खुशियों का आगमन होगा.
मकर राशि
करियर में तरक्की हासिल हो सकती है. इस समय संतान का साथ मिलेगा. आपकी मेहनत रंग लाएगी. मन मुताबिक परिणाम मिलने से मन प्रसन्न रहेगा.
कुंभ राशि
इस समय सफलता पाने के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है. आय से अधिक व्यय होने के कारण मानसिक तौर पर परेशान रह सकते हैं. लंबी दूरी की यात्राओं से बचें.
मीन राशि
आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. इस समय खर्च की अधिकता कर्ज की स्थिति ला सकती है. कार्यों में सफलता पाना थोड़ा संघर्ष पूर्ण रह सकता है. इस समय जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें.