सचिवालय में डेप्यूटेशन और कार्य व्यवस्था के नाम पर अनियमितता ! व्यक्तिगत पसंद के आधार पर तैनाती बड़ा कारण, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः सचिवालय में अधीनस्थ विभागों से प्रतिनियुक्ति या कार्य व्यवस्था में लगे कर्मियों का मुद्दा फिर गरमा गया है. इसे लेकर बार-बार परिपत्र जारी करने के बाद भी कार्यपालना न होने से सचिवालय कर्मचारी संघ सख्त कदम उठाने जा रहा है. 

सचिवालय में बाहरी विभागों से प्रतिनियुक्ति या कार्यव्यवस्था में लगे सैकड़ों कर्मचारियों से अव्यवस्था का आलम हो गया है. 

क्या है समस्या ?
विभागों में 5 साल और फिर एक्सटेंशन के साथ जहां कर्मी और अधिकारी डेप्यूटेशन पर लगे हैं तो वहीं कार्य व्यवस्था के नाम पर दूसरे विभाग में लगने वाले स्टाफ की संख्या बहुत ज्यादा है. 

ऐसे कर्मचारियों की संख्या करीब 654 है.

ऐसे में जानकारों का मानना है कि डेप्यूटेशन पर लगे कर्मियों के साथ कार्य व्यवस्था के नाम पर लगे कर्मियों को भी उनके मूल विभाग में भेजना चाहिए. 

खास तौर पर सचिवालय में यह मर्ज इसलिए बड़ा है कि यहां मंत्रियों के निजी स्टाफ या अन्य अहम पद पर दूसरी सेवा के या बाहरी लोग व्यक्तिगत पसंद के आधार पर लगाए जाते रहे हैं.

पिछले साल पूर्व मुख्य सचिव ने अतिरिक्त मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों और सचिवों से सचिवालय में लगे बाहर के कर्मचारियों-अधिकारियों की सूचना मांगी थी और इसे लेकर सक्रियता भी दिखाई गई थी. 

उनसे यह भी जानकारी मांगी गई थी कि संबंधित अधिकारी या कर्मचारी कबसे उनके विभाग में प्रतिनियुक्ति पर हैं. 

उन्हें प्रतिनियुक्ति पर लगे अधिकारियों या स्टाफ की पूरी सूची भेजने के लिए कहा था लेकिन इसे लेकर दिए गए निर्देशों की कार्यपालना नहीं हुई.

वहीं सचिवालय में पहले से लगे करीब दो सौ अधिकारी प्रमोट हो गए हैं लेकिन व्यवस्था नहीं हो पाने के चलते उन्हें प्रमोटेड पद पर पोस्टिंग नहीं मिल रही है. 

नव चयनित लिपिकों की ज्वॉइनिंग बाद सचिवालय के विभागों में सेक्शन्स में बैठने की जगह नहीं है. 

इसका कारण यह है कि किसी भी सेक्शन्स के आकार को एकदम से बढ़ाया नहीं जा सकता.

साथ ही कंप्यूटर और सरकारी कामकाज के लिए जरूरी अन्य सुविधाएं भी सेक्शन्स में उतनी नहीं हैं जिससे राजकाज भी प्रभावित हो रहा है.

सचिवालय कर्मचारी संघ और अन्य संघ काफी सालों से सचिवालय में अलग-अलग विभागों में प्रतिनियुक्ति पर लगे अधिकारियों और स्टाफ को उनके मूल विभाग में भेजने की मांग कर रहे हैं.

इसका निहितार्थ यह भी है कि डेप्यूटेशन पर लगे पटवारी अपना पटवार सर्किल संभालें, शिक्षक शिक्षा का काम करें ताकि उनके क्षेत्र का कामकाज भी प्रभावित न हो और सचिवालय में भी व्यवस्था बनी  रहे.

ऐसे कर्मचारियों को लेकर शुद्धिकरण करने के लिए कहा गया था लेकिन अभी भी ये बाहरी कर्मचारियों का सचिवालय में काम करना जारी है. 

कब कब जारी हुए हैं आदेश ?
पूर्व में 2 मई 2013, 19 मार्च 2020,4 मई 2020,28 दिसंबर 2020, 3 फरवरी 2011,4 अप्रैल 2022, 8 अगस्त 2022 को परिपत्र और आदेशों के जरिए विभागों को ऐसे कर्मियों/ अधिकारियों को हटाकर मूल विभाग में भेजना सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए थे.

अब क्या है कर्मचारी संघ का सख्त रुख ?
सचिवालय कर्मचारी संघ अध्यक्ष कजोड़मल मीणा सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों को ऐसे कर्मियों की सूची दे चुके हैं.

अब संघ 19 जनवरी तक इन कर्मियों के खुद ही मूल विभाग में लौटने का अनुरोध कर रहा है.

अगर फिर भी ऐसे कर्मी सचिवालय आते हैं तो संघ से जुड़े कर्मी उनका पास चेक करेंगे और उन्हें रोकेंगे

इस रुख को लेकर हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि ऐसा सख्त कदम उठाना संघ के कार्यक्षेत्र में नहीं आता है लेकिन संघ कार्यकारिणी का मानना है कि बिना इसके यह मसला हल नहीं होगा.