VIDEO: ब्रुसेल्स में IIAS सम्मेलन में राजस्थान मॉडल की गूंज, सुशासन और प्रशासनिक सुधारों को वैश्विक मंच पर मिली पहचान, देखिए ये ​खास रिपोर्ट

जयपुर: ब्रुसेल्स में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने अंतरराष्ट्रीय प्रशासनिक विज्ञान संस्थान के अध्यक्ष के रूप में एक साल पूरा करते हुए देश के सुशासन, डिजिटल प्रशासन और प्रशासनिक सुधारों को लेकर हुए बदलाव और नवाचारों को वैश्विक पहचान दी है. सम्मेलन में प्रशासनिक विज्ञान के भविष्य, डिजिटल गवर्नेंस और नागरिक केन्द्रित शासन पर व्यापक चर्चा के साथ नए जमाने में प्रशासन और गुड गवर्नेंस के नए पैमाने की परिभाषा गढ़ने की कोशिश की. बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में आयोजित 10-12 जून 2026 के अंतरराष्ट्रीय प्रशासनिक विज्ञान संस्थान -IIAS का सम्मेलन भारत की "मैक्सिमम गवर्नेंस,मिनिमम गवर्नमेंट' की सोच को बनियादी स्तर पर लागू करके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक बदलाव ती तोषिष का गवाह बना.

यह बात कही संबोधन में:
अपने संबोधन में श्रीनिवास ने IIAS के 2025-2028 के विजन को प्रस्तुत करते हुए संस्था को डिजिटल रूप से सक्षम, शोध और प्रकाशन आधारित और संसाधन-संपन्न बनाने की दिशा में जारी पहलों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि प्रशासनिक सुधारों के कसौटी के मानक बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझेदारी को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. 

सम्मेलन में "ट्रांसफॉर्मिंग गवर्नेंस : 
नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स" विषय के तहत भारत के सुशासन मॉडल पर जोर देते हुए इसमें शिकायत निवारण, सेवा वितरण, ई-गवर्नेंस, मेरीटोक्रेसी, सचिवालय सुधार और प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने के प्रयासों को प्रमुखता से रखा गया. CPGRAMS जैसी डिजिटल शिकायत निवारण प्रणाली को स्मार्ट गवर्नमेंट की आधारशिला बताया गया.

विकसित भारत और विकसित राजस्थान का विजन: 
प्रस्तुति में प्रधानमंत्री के विकसित भारत-2047 विजन को सुशासन और नागरिक-केंद्रित प्रशासन का आधार बताया गया. गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति को केंद्र में रखकर समावेशी विकास की रणनीति पर प्रकाश डाला गया.साथ ही मुख्यमंत्री के विकसित राजस्थान-2047 विजन का जिक्र करते हुए बताया गया कि राज्य को 2028-29 तक 350 अरब डॉलर और 2047 तक 4.3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा गया है.कृषि नवाचार, औद्योगिक निवेश, हरित ऊर्जा, पर्यटन और डिजिटल गवर्नेंस को विकास के प्रमुख स्तंभ बताया गया.

राजस्थान के नवाचारों को मिला वैश्विक मंच: 
सम्मेलन में राजस्थान सरकार की कई प्रमुख पहलों को केस स्टडी के रूप में प्रस्तुत किया गया. इनमें राज सम्पर्क, राज-उन्नति, ज्ञान भारतम्, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए सुधार, महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम, औद्योगिक एवं खनन विकास तथा स्मार्ट पुलिसिंग मॉडल शामिल रहे. राज सम्पर्क प्लेटफॉर्म के जरिये 239 विभागों और संस्थाओं को एकीकृत कर 40 लाख से अधिक शिकायतों का निस्तारण किया गया है. शिकायतों के निस्तारण की औसत अवधि 14 दिन तथा निस्तारण दर लगभग 95 प्रतिशत बताई गई. ज्ञान भारतम् पहल के तहत राजस्थान में 17 लाख से अधिक पांडुलिपियों का सर्वे किया गया है, जिससे राज्य देश में पहले स्थान पर है.डिजिटल संरक्षण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ज्ञान भंडार विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है.

शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण पर फोकस: 
राजस्थान में शिक्षा क्षेत्र में 14 हजार आईसीटी लैब, 13 हजार स्मार्ट क्लासरूम तथा 4 हजार से अधिक विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रमों की जानकारी दी गई. स्वास्थ्य क्षेत्र में 9,474 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, 49 मेडिकल कॉलेजों, 160 एफआरयू तथा 101 ट्रॉमा सेंटरों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का उल्लेख किया गया. डिजिटल हेल्थ, टेलीमेडिसिन और एआई आधारित निदान को भी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया गया. महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में राजीविका के तहत लखपति दीदी, सोलर दीदी और स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की योजनाओं को प्रस्तुत किया गया.

स्मार्ट पुलिसिंग और औद्योगिक विकास मॉडल: 
राजस्थान की स्मार्ट पुलिसिंग पहल के तहत एआई आधारित अपराध विश्लेषण, साइबर पुलिस स्टेशन, ड्रोन निगरानी और 24×7 कमांड सेंटर की जानकारी दी गई. वहीं खनन और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में निवेश प्रोत्साहन, अनुपालन में कमी, डिजिटल स्वीकृति प्रणाली तथा ऊर्जा खनिजों के दोहन को राज्य की आर्थिक प्रगति का आधार बताया गया.

वैश्विक सहयोग को मिलेगा नया आयाम: 
सम्मेलन में IIAS की विभिन्न क्षेत्रीय इकाइयों, शोध कार्यक्रमों, वेबसाइट आधुनिकीकरण, संचार रणनीति और आगामी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की रूपरेखा पर भी चर्चा हुई. प्रशासनिक विज्ञान के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग, नवाचार और ज्ञान साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया. सम्मेलन में राजस्थान के प्रशासनिक सुधारों और सुशासन मॉडल की प्रस्तुति ने राज्य को वैश्विक प्रशासनिक विमर्श में एक अग्रणी उदाहरण के रूप में स्थापित किया है.