जयपुर: राजस्थान पुलिस में जवाबदेही और प्रदर्शन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है. अब प्रदेश के सभी जिला पुलिस अधीक्षकों की नियमित रैंकिंग तैयार की जाएगी. यह रैंकिंग सीधे पुलिस मुख्यालय स्तर पर तैयार होगी और इसके लिए पहले की तुलना में अधिक सुदृढ़ एवं व्यापक मूल्यांकन प्रणाली विकसित की गई है.
नई व्यवस्था के तहत जिले में अपराध नियंत्रण, गंभीर अपराधों की जांच, लंबित मामलों के निस्तारण, कानून-व्यवस्था बनाए रखने, महिला एवं बाल अपराधों की रोकथाम, साइबर अपराधों के मामलों में कार्रवाई, वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी और आमजन की शिकायतों के निस्तारण जैसे अनेक बिंदुओं को आधार बनाया जाएगा. इसके अलावा थानों की कार्यप्रणाली और जिले में पुलिसिंग की गुणवत्ता का भी आकलन किया जाएगा. खास बात यह है कि इस बार रैंकिंग में नवीन आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन को भी प्रमुख स्थान दिया गया है. भारतीय न्याय संहिता भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में पुलिस की कार्यक्षमता, समयबद्ध जांच और कानूनी प्रक्रियाओं के पालन की भी समीक्षा होगी. इससे यह पता लगाया जाएगा कि जिले में नए कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है या नहीं.
पुलिस मुख्यालय का उद्देश्य केवल आंकड़ों के आधार पर रैंकिंग तैयार करना नहीं है, बल्कि जिलों में पुलिसिंग की वास्तविक गुणवत्ता का मूल्यांकन करना भी है. इसी कारण विभिन्न मानकों को शामिल करते हुए एक संतुलित मूल्यांकन मॉडल तैयार किया गया है. माना जा रहा है कि इससे जिलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी और बेहतर प्रदर्शन के लिए पुलिस अधिकारियों में सकारात्मक दबाव बनेगा.
पुलिस मुख्यालय द्वारा तैयार की जा रही नई रैंकिंग प्रणाली में जिला पुलिस अधीक्षकों के प्रदर्शन का आकलन कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर किया जाएगा. इनमें प्रमुख रूप से-
जिले में अपराध दर और अपराध नियंत्रण की स्थिति
-हत्या, लूट, डकैती, बलात्कार जैसे गंभीर मामलों का निस्तारण
-लंबित प्रकरणों के निपटान की गति
-वांछित और इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी
-महिला एवं बाल अपराधों में पुलिस की कार्रवाई
-साइबर अपराधों की जांच और निराकरण
-नवीन आपराधिक कानूनों (बीएनएस, बीएनएसएस) का प्रभावी क्रियान्वयन
-कानून-व्यवस्था बनाए रखने की क्षमता
-आमजन की शिकायतों का समयबद्ध समाधान
-थानों की कार्यप्रणाली और पुलिसिंग की गुणवत्ता
-रैंकिंग खराब तो पोस्टिंग पर पड़ेगा असर
नई व्यवस्था में जिला पुलिस अधीक्षकों की रैंकिंग महज औपचारिक प्रक्रिया नहीं होगी. पुलिस मुख्यालय इस प्रदर्शन रिपोर्ट का उपयोग भविष्य में पोस्टिंग और जिम्मेदारियों के निर्धारण में भी करेगा.
सूत्रों के अनुसार लगातार बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिलों और बड़ी जिम्मेदारियों का मौका मिल सकता है. वहीं लगातार कमजोर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों से जवाब तलब किया जाएगा. यदि किसी अधिकारी का प्रदर्शन लंबे समय तक अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं पाया गया तो उसे फील्ड पोस्टिंग से हटाकर गैर-फील्ड जिम्मेदारी देने पर भी विचार किया जा सकता है. ऐसे में यह रैंकिंग आने वाले समय में एसपी के करियर और पदस्थापन दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाली है.