जयपुर: राजस्थान रेरा ने एक प्रोजेक्ट के मामले में बहुत ही महत्वपूर्ण दिया है. राजस्थान रेरा ने यह स्पष्ट किया है कि भले ही किसी प्रोजेक्ट के प्रमोटर के खिलाफ चल रहा हो दिवालियापन का मुकदमा,लेकिन रियल एस्टेट रेग्युलेटरी को प्रोजेक्ट की फोरेंसिक ऑडिट कराने का अधिकार है. आखिर किस प्रोजेक्ट को लेकर और राजस्थान रेरा ने क्या आदेश दिया. राजस्थान रेरा ने भिवाड़ी के ग्राम सैदपुर अलवर बायपास रोड सेक्टर 14 स्थित बहुचर्चित एवलॉन रॉयल पार्क प्रोजेक्ट को लेकर यह महत्वपूर्ण आदेश दिया है. यह प्रोजेक्ट वर्ष 2013 में शुरू किया गया था और प्रमोटर ने आवंटियों से यह वादा किया था कि वह इस प्रोजेक्ट को वर्ष 2020 तक पूरा कर देगा. इसके बावजूद प्रोजेक्ट आज तक अधूरा है. एवलॉन रॉयल पार्क होम बायर्स एसोसिएशन ने राजस्थान रेरा में याचिका लगाकर प्रोजेक्ट की लागत,खर्च और प्रोजेक्ट के लिए एकत्र राशि आदि को लेकर फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की थी.
एवलॉन रॉयल पार्क प्रोजेक्ट विवाद:
-बायर्स एसोसिएशन की ओर से रेरा में आरोप लगाया गया कि प्रोजेक्ट के लिए एकत्र की गई राशि प्रोजेक्ट में नहीं लगाई गई
-एसोसिएशन की याचिका में कहा गया कि प्रमोटर की ओर से दिए गए अतिरिक्त शपथ पत्र के अनुसार
-वर्ष 2012 से 2016 के बीच आवंटियों से 281 करोड़ 48 लाख रुपए एकत्र किए गए
-यह राशि प्रमोटर के विक्रय अनुमान राशि की करीब 90 प्रतिशत थी
-स्ट्रक्चरल इंजीनियर के अनुमान के मुताबिक प्रोजेक्ट की कुल लागत 270 करोड़ रुपए है
-जबकि प्रमोटर की ओर से यह प्रोजेक्ट के विकास का खर्च 211 करोड़ रुपए और
-और प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण का खर्च 90 करोड़ रुपए बताया गया है
-इन सबके बावजूद प्रोजेक्ट अब तक अधूरा है
-उधर प्रमोटर व अन्य के अधिवक्ताओं ने सुनवाई के दौरान राजस्थान रेरा को बताया कि
-प्रमोटर फर्म जीआरजे डिस्ट्रीब्यूटर्स एंड डवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में दिवालियापन का मामला लंबित है
-ऐसे में इस फर्म के प्रोजेक्ट से जुड़े मामले की सुनवाई करने का अधिकार राजस्थान रेरा को नहीं हैं
राजस्थान रेरा की अध्यक्ष वीनू गुप्ता ने इस मामले में सुनवाई करते हुए यह माना कि भले ही प्रोजेक्ट के प्रमोटर के खिलाफ दिवालियापन का मामला लंबित हो,लेकिन राजस्थान रेरा अपने दायरे में रहते हुए इस हद तक दखल दे सकता है कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में लंबित मामला प्रभावित नहीं हो.
रेरा का बड़ा फैसला:
-अथॉरिटी ने माना कि परियोजना की लागत, प्राप्तियों, खर्चों और वास्तविक निर्माण प्रगति से जुड़े रिकॉर्ड में गंभीर विरोधाभास और विसंगतियां मौजूद है
-इसी के चलते पूरे मामले की स्वतंत्र जांच आवश्यक हैं
-रेरा अध्यक्ष वीनू गुप्ता ने अपने आदेश में कहा है कि
-यद्यपि परियोजना से संबंधित कंपनी के विरुद्ध दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) के तहत कार्यवाही नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में लंबित है
-इसके बावजूद रेरा को परियोजना से संबंधित वित्तीय अनियमितताओं की जांच करने का अधिकार प्राप्त हैं
-रेरा कानून की धारा 35 के तहत आवंटियों के हितों की सुरक्षा व कानून की पालना के लिए मामले की सीमित फोरेंसिक ऑडिट कराना जरूरी है
-रेरा अध्यक्ष वीनू गुप्ता ने दो महीने में सीमित फोरेंसिक ऑडिट कराने के आदेश दिए हैं
राजस्थान रेरा ने इस जटिल उलझे हुए मामले में दिए आदेश में यह भी कहा कि जो भी सीमित फोरेंसिक ऑडिट कराई जाएगी, वह ऑडिट दिवालियान के लंबित मुकदमे में भी सहायक होगी.