जयपुर: इस बार प्रदेश में कमजोर रहे मानसून ने आम लोगों और किसानों की चिंता बढ़ा दी है. राजधानी जयपुर में अभी तो गुलाबी ठंडक होने वाली है, लेकिन चिंता आने वाली गर्मियों को लेकर अभी से गहरा रही है. यानि गर्मी आने से पहले ही पानी की व्यवस्था को लेकर बड़ी चुनौती सामने है. कहीं कम प्रेशर की परेशानी, तो कहीं कई दिनों के अंतराल पर पानी की सप्लाई. खुद जलदाय विभाग के आंकड़े बता रहे हैं कि जयपुर में पानी की मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है. ऐसे में अब नजर समर कंटीजेंसी प्लान 2027 पर है.
करीब 55 करोड़ 45 लाख रुपये की प्रस्तावित योजना में नए ट्यूबवेल से लेकर पुरानी पाइपलाइन बदलने तक के इंतजाम शामिल हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल—क्या कागजों पर बना यह प्लान जयपुर की प्यास बुझा पाएगा, या गर्मी में पानी के लिए जनता की परेशानी और बढ़ेगी? राजस्थान में इस बार कमजोर मानसून से बीसलपुर बांध क्या खाली रहा, वहां से 100 किलोमीटर दूर स्थित राजधानी जयपुर को परेशानी में डाल दिया है. खुद जलदाय विभाग के भयावह आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि स्थितियां ठीक नहीं है.जनसंख्या ज्यादा है, इलाका बड़ा है.तो प्यास भी बड़ी है.लेकिन हालात यह है कि प्यास बुझाने के लिए जितना पानी चाहिए, उतना पानी है ही नहीं.यानि जयपुर में मांग ज्यादा, सप्लाई कम,आंकड़े खुद गवाही दे रहे हैं.
जयपुर में पानी की डिमांड व सप्लाई के आंकड़ों ने बढा दी चिंता:
-शहर के साउथ सर्किल में रोजाना 367.50 एमएलडी पानी की मांग है
-इसके मुकाबल 315.62 एमएलडी आपूर्ति हो रही है
यानि साउथ सर्किल में 51.88 एमएलडी पानी की कमी है
-नॉर्थ सर्किल में 354.45 एमएलडी मांग के मुकाबले 261.85 एमएलडी पानी उपलब्ध है
-आंकड़े बताते हैं कि नॉर्थ सर्किल में 92.60 एमएलडी पानी की कमी है
-जिला सर्किल के शहरी क्षेत्रों में भी 47.20 एमएलडी मांग के मुकाबले महज 22.57 एमएलडी सप्लाई दर्ज है
-कुल मिलाकर जयपुर के शहरी क्षेत्रों में 769.15 एमएलडी मांग के मुकाबले 600.04 एमएलडी आपूर्ति है
-यानी पूरे जयपुर में करीब 169.11 एमएलडी पानी मांग के मुकाबले कम है
पानी की परेशानी सिर्फ उपलब्धता तक सीमित नहीं है. विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, जयपुर के कुछ शहरी इलाकों में सप्लाई का अंतराल करीब 24 घंटे है, जबकि जिला सर्किल के कई शहरी इलाकों में 24 से 120 घंटे तक के अंतराल पर पानी पहुंच रहा है. कम प्रेशर, टेल-एंड यानी नेटवर्क के आखिरी छोर पर बसे इलाकों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंचना, पुरानी और दूषित पाइपलाइनें, खराब ट्यूबवेल और पंप-मोटर की समस्याएं सप्लाई को प्रभावित कर रही हैं. ऐसे में चुनौती केवल पानी का उत्पादन बढ़ाने की नहीं, बल्कि मौजूदा पानी को समान रूप से घरों तक पहुंचाने की भी है. इन चुनौतियों से निपटने के लिए PHED ने समर कंटीजेंसी प्लान 2027 में 55 करोड़ 45 लाख रुपए के काम प्रस्तावित किए हैं.
पानी के महकमे में 55.45 करोड़ का कंटीजेंसी प्लान तैयार:
-योजना के तहत 210 नए ट्यूबवेल बनाने और 126 ट्यूबवेल या खुले कुओं को गहरा करने का प्रस्ताव
-इसके साथ 88.52 किलोमीटर एचडीपीई और 7.72 किलोमीटर डीआई पाइपलाइन बदलने की योजना
-651 पंप-मोटर तथा 533 इलेक्ट्रिकल पैनल बदलने की योजना भी शामिल है
-पुरानी जीआई पाइपलाइन, सबमर्सिबल केबल और स्लूइस वाल्व बदलने की जरूरत
-जरूरत बढ़ने पर टैंकरों से पानी उपलब्ध कराने का भी प्रावधान प्रस्तावित है
-पानी की चुनौती सिर्फ जयपुर शहर तक सीमित नहीं है
-जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 28.99 लाख आबादी के लिए 176.04 एमएलडी पानी की मांग दर्ज है
-आपूर्ति 118.07 एमएलडी है, यानी 57.97 एमएलडी की कमी
-ग्रामीण क्षेत्रों में भी नए ट्यूबवेल, पुराने जल स्रोतों को गहरा करने की जरूरत
-पाइप लाइन तथा पंपिंग व्यवस्था सुधारने की जरूरत है
योजना का बजट और प्रस्तावित काम अपनी जगह हैं, लेकिन असली परीक्षा इनके क्रियान्वयन की है.विभाग की रिपोर्ट में कुछ कार्यों के अंतिम बिल लंबित होने, कुछ योजनाओं की कमीशनिंग बाकी रहने और आवश्यक बिजली कनेक्शन लंबित होने का जिक्र है. जिला सर्किल में नौ थ्री-फेज बिजली कनेक्शन लंबित बताए गए हैं. वहीं कुछ परियोजनाओं के लिए जमीन आवंटन और वन विभाग की अनुमति जैसे मामले भी लंबित हैं. ऐसे में जरूरी है कि प्रस्तावित कामों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए, दूषित पाइपलाइनों की समस्या दूर हो और कम प्रेशर वाले इलाकों पर विशेष ध्यान दिया जाए. जयपुर में पानी की मांग और सप्लाई के बीच का अंतर एक बड़ी चुनौती है. समर कंटीजेंसी प्लान 2027 के जरिए विभाग ने नए जल स्रोत विकसित करने और मौजूदा नेटवर्क को दुरुस्त करने का खाका तैयार किया है. अब सवाल बजट और प्रस्तावों से आगे बढ़कर अमल का है. क्या गर्मी की दस्तक से पहले काम पूरे होंगे? क्या टेल-एंड इलाकों को पर्याप्त प्रेशर से पानी मिलेगा? और क्या टैंकर व्यवस्था जरूरतमंद इलाकों तक समय पर पहुंचेगी? इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि जयपुर को अगले साल गर्मी में कितनी राहत मिलती है.