बदलेंगे पुलिस थानों के दायरे ! पुलिस व्यवस्था में बड़े बदलाव की कवायद, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः राजस्थान में बढ़ती जनसंख्या, तेजी से हो रहे शहरीकरण, औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार और बदलते अपराध के स्वरूप को देखते हुए पुलिस थानों की मौजूदा सीमाओं और प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव की कवायद शुरू हो गई है. पुलिस मुख्यालय ने प्रदेश के पुलिस थानों के सीमांकन, प्रशासनिक पुनर्गठन तथा नई पुलिस चौकियों और पदों के सृजन की आवश्यकता का अध्ययन करने के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है. समिति धरातल की वास्तविक परिस्थितियों का अध्ययन कर पुलिस व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जनकेंद्रित बनाने के लिए अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी.

पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार समिति के अध्यक्ष अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, कार्मिक/पुनर्गठन एवं नियम, राजस्थान बीजू जॉर्ज जोसेफ होंगे. वहीं महानिरीक्षक पुलिस एसओजीओ, राजस्थान अजय पाल लांबा, उप महानिरीक्षक पुलिस (कार्मिक) एवं प्रमुख स्टाफ ऑफिसर, कार्यालय महानिदेशक पुलिस कुंवर राष्ट्रदीप तथा उप महानिरीक्षक पुलिस सह अतिरिक्त निदेशक, आरपीए शंकर दत्त शर्मा को सदस्य बनाया गया है. उप महानिरीक्षक पुलिस, अपराध, राजस्थान राशि डोगरा समिति की सदस्य सचिव होंगी.समिति को रिपोर्ट तैयार करते समय कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को अध्ययन में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं. इनमें थानों में अपराध पंजीकरण दर, अपराधों की प्रकृति, साइबर, संगठित एवं महिला अपराध तथा अपराधों की रोकथाम एवं त्वरित और गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान जैसे पहलू प्रमुख होंगे. इसके साथ ही क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति, धार्मिक स्थलों और संवेदनशील-अति संवेदनशील स्थानों की पहचान तथा ऐसे कारकों का भी आकलन किया जाएगा, जो कानून-व्यवस्था को प्रभावित करते हैं.पुलिस की बीट व्यवस्था को मजबूत करने पर भी समिति विशेष रूप से विचार करेगी. इसके अलावा संबंधित क्षेत्र में संचालित उद्योग, खनन, अस्पताल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों का भी अध्ययन किया जाएगा.      

थाना क्षेत्रों के पुनर्गठन में केवल अपराध के आंकड़ों को ही आधार नहीं बनाया जाएगा. जनसंख्या, वार्ड और ग्राम की स्थिति, प्रशासनिक एवं राजस्व सीमाएं, धार्मिक एवं जातिगत विविधता तथा क्षेत्र की भौगोलिक विशेषताओं का भी विश्लेषण होगा. समिति यह भी देखेगी कि थाने से उसके क्षेत्र के सबसे दूरस्थ स्थान तक पहुंचने में कितना समय लगता है और पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया में कोई व्यावहारिक बाधा तो नहीं है.इसके अलावा क्षेत्र की यातायात व्यवस्था, राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों सहित प्रमुख मार्गों की स्थिति तथा पर्यटन स्थलों पर आने वाली भीड़ का भी आकलन किया जाएगा.समिति को केवल वर्तमान व्यवस्था की समीक्षा तक सीमित नहीं रखा गया है. रिपोर्ट तैयार करते समय भविष्य में पुलिस व्यवस्था की आवश्यकताओं और संभावित बदलावों को भी ध्यान में रखने के निर्देश दिए गए हैं. आवश्यकता होने पर पुलिस उपयुक्त, जिला पुलिस अधीक्षक के माध्यम से पुलिस आयुक्त या रेंज महानिरीक्षक से भी सुझाव प्राप्त किए जा सकेंगे.समिति के अध्यक्ष की सहमति के बाद अन्य संबंधित बिंदुओं को भी रिपोर्ट में शामिल किया जा सकेगा. इस कवायद का उद्देश्य प्रदेश में पुलिस थानों की सीमाओं और प्रशासनिक ढांचे को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप अधिक तर्कसंगत, प्रभावी और जनहितकारी बनाना है. समिति की रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में कई थाना क्षेत्रों के सीमांकन, पुनर्गठन और नई पुलिस इकाइयों के गठन को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं.