VIDEO: निकाय-पंचायत चुनाव और पॉलिटिक्स, जाट वोट बैंक साधने में जुटी भाजपा, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: ओबीसी आयोग की रिपोर्ट में सबसे अहम हैं जाट वोट बैंक करीब 20प्रतिशत से ऊपर आजादी के बाद ये वोट कई सालों तक कांग्रेस का परम्परागत वोट बैंक रहा. लेकिन पिछले कुछ सालों में बीजेपी ने जाट या यूं कहे किसान राजनीति को साधने का काम किया. स्थानीय निकाय चुनावों में ये वोट बेहद अहम. मंत्रिपरिषद, सियासी नियुक्ति और संगठन में प्रमुखता से जाट नेताओं को जगह दी गई है. भजन लाल सरकार में सर्वाधिक मंत्री जाट वर्ग से हैं. 

भैंरो सिंह शेखावत ऐसे पहले गैर कांग्रेसी नेता थे जिन्होंने इस बात को समझा कि परिस्थितियां बदली जानी चाहिये. साधना होगा ओबीसी या यूं कहे जाट पॉलिटिक्स को. लिहाजा उन्होंने कांग्रेस और जनता दल से जुड़े रहे दिग्गज किसान नेताओं को अपने साथ जोड़ा इनमें गंगाराम चौधरी, सुमित्रा सिंह सरीखे प्रमुख नेता रहे . जनता दल से ज्ञान सिंह चौधरी और जीतराम चौधरी जैसे नेताओं आगे बढ़ाया. युवा सतीश पूनिया को भी इसी दौर में चुनाव लड़वाया गया. शेखावत के प्रयोग का राजस्थान की बीजेपी को लाभ मिला. उन्होंने ही भानु प्रकाश मिर्धा को लाकर चुनाव लड़ाया..वसुंधरा राजे ने भी किसान राजनीति में बीजेपी की जड़े जमाने का काम किया और कांग्रेस के वजूद वाले किसान बेल्ट में सेंध लगाई. सांवर लाल जाट,सुभाष महरिया, डॉ दिगंबर सिंह, रामनारायण डूडी,धर्मपाल चौधरी,विजय पुनिया, सरीखे नेताओं को आगे लाकर किसान राजनीति की और कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया.इतना ही नहीं मिर्धा परिवार की दूसरी औ तीसरी पीढ़ी को लेकर आए.वसुंधरा राजे के कारण ही डॉ हरि सिंह भी कुछ समय के लिए बीजेपी में आए थे. वसुंधरा राजे जब मुख्यमंत्री थे तब भरतपुर राजघराने के पूर्व महाराजा विश्वेन्द्र सिंह उनके राजनीतिक सलाहकार थे. नारायण राम बेड़ा ने परसराम मदेरणा को चुनाव हारकर सनसनी फैला दी थी. इन राजनीतिक प्रयासों का चुनावों में बीजेपी को लाभ भी मिला भैरों सिंह शेखावत सरकार बनाने में कामयाब रहे और वसुंधरा राजे प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई थी. किसान राजनीति को साधने के लिए सीएम भजन लाल शर्मा ने सरकार बनते ही सियासी संदेश दिया था. चाहे मंत्रिपरिषद हो या सियासी नियुक्ति. संगठन में दिया गया सन्देश.

--- बीजेपी की जाट पॉलिटिक्स ---

--- भजनलाल सरकार में जाट चेहरे ---

--- सुमित गोदारा ---
खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री
बीजेपी के कॉन्वेंट शिक्षित युवा चेहरे
कठिन सीट कही जाने वाली लूणकरणसर विधानसभा से विधायक

--- कन्हैया लाल चौधरी ---
PHED जैसा महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो 
मालपुरा से बीजेपी के विधायक

--- झाबर सिंह खर्रा ---
UDH मंत्री
स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री का दर्जा
शेखावाटी के खांटी जाट नेता की छवि 
झाबर सिंह खर्रा के पिता भी विधायक रहे
शेखावाटी के श्रीमाधोपुर से विधायक

--- विजय सिंह --- 
भजन लाल सरकार में राज्य मंत्री
राजस्व विभाग, उपनिवेशन विभाग, सैनिक कल्याण विभाग महकमों के मंत्री
नावां से बीजेपी के विधायक

--- सियासी नियुक्ति प्राप्त जाट चेहरे ---

--- सी आर चौधरी 
अध्यक्ष राज्य किसान आयोग
नागौर से सांसद और केंद्रीय मंत्री रह चुके CR चौधरी 

--- बीजेपी संगठन में जाट चेहरे ---

--- ज्योति मिर्धा ---
बीजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष 
स्वर्गीय नाथू राम मिर्धा की पोती 
नागौर से रह चुकी सांसद 
जाट समाज का प्रभावी फेस

--- सरिता गैना ---
बीजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष 
अजमेर की जिला प्रमुख रह चुकी

--- कैलाश चौधरी ---
प्रदेश अध्यक्ष बीजेपी किसान मोर्चा
कैलाश चौधरी पहले रह चुके केंद्रीय मंत्री 
बाड़मेर से सांसद रह चुके
मालानी के चर्चित जाट नेता

--- शंकर गोरा ---
बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष 
ABVP से निकलकर बीजेपी की मुख्यधारा में
बीजेपी के उभरते युवा जाट चेहरे

बीजेपी राजस्थान ने जाट समाज के चेहरों को जिला अध्यक्ष समेत कई महत्पूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारियां दे रखी है. लगातार साधने की प्रक्रिया भी जारी है. कांग्रेस के बड़े जाट चेहरों में शुमार पूर्व केंद्रीय मंत्री लाल चंद कटारिया, पूर्व विधायक रिछपाल मिर्धा, विजयपाल मिर्धा ,पूर्व राज्यपाल डॉ कमला के बेटे और पूर्व विधायक आलोक बेनीवाल को बीजेपी में लाया गया. बीजेपी का मकसद रहा किसान कौम के बीच संदेश.

-- किसान कौम के बीच संदेश और चुनौतियां --
लोकसभा चुनावों में बीजेपी को नहीं मिला जाट वर्ग का साथ
पीसीसी चीफ डोटासरा फैक्टर शेखावाटी में सिर चढ़ कर बोला
राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष का सामाजिक संदेश भी हैं
राहुल कस्वां फैक्टर से भी नुकसान पहुंचा
चूरू,सीकर और झुंझुनूं सीटों पर नहीं मिल पाई फतेह
कांग्रेस की कोशिश है परंपरागत जाट वोट बैंक को साधे रखना

राजस्थान में जागीरदारी सामंती प्रथा के विरोध की राजनीति के केंद्र में कांग्रेस और जाट क्षत्रप रहे. चौधरी बलदेव राम मिर्धा ने अलख जगाई..कद्दावर किसान चेहरों ने कांग्रेस का रुख किया नाथू राम मिर्धा,परसराम मदेरणा, रामनिवास मिर्धा , चौधरी कुंभा राम आर्य, सरदार हरलाल सिंह , शीशराम ओला, नारायण सिंह सरीखे बड़े नेताओं ने कांग्रेस में जाट राजनीति को स्थापित किया और नए जाट नेताओं को आगे बढ़ाया. बीजेपी में नई जाट लीडरशिप डेवलप की जा रही हैं. भजन लाल शर्मा लगातार किसान कौम के बीच संदेश देने का काम कर रहे.