आखिर नासा ने मानी अपनी गलती, तकनीकी खराबी के कारण 286 दिन अंतरिक्ष में फंसे रह गए थे यात्री

आखिर नासा ने मानी अपनी गलती, तकनीकी खराबी के कारण 286 दिन अंतरिक्ष में फंसे रह गए थे यात्री

नई​ दिल्ली: आखिर नासा ने अपनी गलती मानी. तकनीकी खराबी के कारण 286 दिन अंतरिक्ष में यात्री फंसे रह गए थे. सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर बोइंग स्टारलाइनर में फंसे रहे. जबकि उनका यह मिशन 8 दिन का था. अब नासा ने अपनी रिपोर्ट में माना है कि यह केवल 'खराब किस्मत' नहीं थी. बल्कि खराब इंजीनियरिंग और कमजोर निगरानी का परिणाम था. 

रिपोर्ट में 2024 के इस मिशन को 'टाइप-ए' श्रेणी की आपदा घोषित किया गया. वही श्रेणी जिसमें कल्पना चावला की मौत वाले 'कोलंबिया' और 'चैलेंजर' जैसे घातक शटल हादसे शामिल है. चैलेंजर में 7 क्रू मेंबर्स की मौत हो गई थी. जब स्पेस शटल अपनी उड़ान के 73 सेकंड में टूट गया था, जबकि कोलंबिया धरती के एटमॉस्फियर में वापस आते ही टूट गया. जिससे उसमें सवार सभी सात एस्ट्रोनॉट्स मारे गए. 

लेकिन यह रिपोर्ट अब ऐसे समय आई जब नासा अपने आर्टेमिस II चंद्र मिशन की तैयारी कर रहा है. अब विडंबना यह है कि इस मिशन के रॉकेट (एसएलएस) का मेन कॉन्टैक्टर भी बोइंग ही है. नासा अभी भी बोइंग के साथ काम करेगा, लेकिन बिना सुधार के स्टारलाइनर पर फिर कोई इंसान नहीं उड़ान भरेगा. जांच दल ने नासा और बोइंग को 61 औपचारिक सिफारिशें दी है.