जयपुर: सिंधी कैम्प बस स्टैंड पर लंबे समय से अनधिकृत वाहनों का दबाव बना हुआ है, जिससे न सिर्फ रोडवेज़ को राजस्व हानि हो रही है बल्कि यातायात व्यवस्थाओं और सुरक्षा के लिए भी खतरा उत्पन्न हो रहा है. रोडवेज प्रबंधन ने अनाधिकृत वाहनों का दबाव हटाने के लिए आरटीओ से मदद मांगी है.
सिंधी कैंप बस स्टैंड के प्रबंधक ने जयपुर आरटीओ प्रथम को पत्र लिख कर बस स्टैंड से अनाधिकृत वाहनों को हटाने के लिए मदद मांगी है ,पत्र में उल्लेख किया गया है कि सिंधी कैम्प परिसर को नो पार्किंग ज़ोन घोषित किया गया है, फिर भी यहां बिना परमिट, बिना फिटनेस, बिना टैक्स के चल रहे वाहनों की लंबी कतारें रोजाना देखी जा सकती हैं. इन वाहनों के अनियंत्रित प्रवेश से जहाँ रोडवेज़ को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है, वहीं कैंप क्षेत्र में लगातार बढ़ते दबाव के चलते दुर्घटनाओं की आशंका भी गहरा रही है.
पत्र में कहा गया है कि यह समस्या कोई नई नहीं बल्कि एक लंबे समय से चली आ रही है, जिसके समाधान के प्रयास अभी तक प्रभावी नहीं हो पाए हैं.डिपो प्रभारी द्वारा भेजे गए पत्र में मांग की गई है कि सिंधी कैम्प क्षेत्र में आरटीओ प्रथम के दो विशेष उड़नदस्तों को तत्काल तैनात किया जाए, जो अनियमित वाहनों पर कड़ी कार्रवाई कर सकें. विशेष रूप से बिना वैध परमिट, फिटनेस और रोड टैक्स के चल रहे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता बताई गई है. इसके साथ ही बस बॉडी कोड के विपरीत संचालित हो रही बसों को भी जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है.
सड़क परिवहन अधिनियम के अनुसार सार्वजनिक वाहनों को निर्धारित मानकों और स्वीकृत मार्गों पर ही संचालित किया जाना चाहिए. बावजूद इसके सिंधी कैम्प क्षेत्र में अनाधिकृत वाहन प्रतिदिन यात्रियों को उठाते और छोड़ते हैं, जिससे न केवल रोडवेज़ की वैध बसों के संचालन में बाधा आती है, बल्कि शहर के यातायात तंत्र पर भी अतिरिक्त भार पड़ता है. पत्र में यह भी उल्लेखित किया गया है कि रोडवेज़ से संबंधित वाहनों को स्टैंड पर प्रवेश हेतु प्रतीक्षा करनी पड़ती है जबकि अनधिकृत वाहन सीधे यात्रियों को उठा लेते हैं, जिससे निगम को राजस्व की भारी हानि होती है.मौजूदा हालात को देखते हुए डीटीओ संजीव दलाल को कार्रवाई हेतु निर्देशित किया गया है, ताकि इस स्थिति पर तत्काल रोक लगाई जा सके.
परिवहन विभाग सूत्रों के अनुसार आगामी दिनों में सिंधी कैम्प क्षेत्र में विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया जा सकता है.विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो बढ़ते वाहन दबाव के कारण यहाँ दुर्घटनाएँ होना तय है. वहीं रोडवेज़ के अधिकारी भी मानते हैं कि सिंधी कैम्प की क्षमता से कहीं अधिक वाहन यहाँ प्रवेश कर रहे हैं. अगर समय रहते नियमन नहीं किया गया तो यातायात और सुरक्षा दोनों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है.