जयपुरः 106 सब रजिस्ट्रार कार्यालयों को जून के अंत तक मॉडल कार्यालय बना दिया जायेगा. साथ ही 39 सब रजिस्ट्रार कार्यालयों में जियो टैगिंग की सुविधा है जिसका विस्तार किया जायेगा. पंजीयन मुद्रांक विभाग की ओर से कोएरा भवन में स्टेकहोल्डर्स के साथ संवाद और संगोष्ठी में इसके साथ एआई आधारित कामकाज सहित कई तकनीकों के इस्तेमाल से नागरिक केंद्रित सेवा को और बेहतर करने के नवाचार की जानकारी दी.
पंजीयन - मुद्रांक विभाग की ओर से मंगलवार को अरण्य भवन के निकट स्थित कोएरा (COERRA) भवन में स्टेकहोल्डर्स संगोष्ठी और संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में बिल्डर्स, डेवलपर्स, अधिवक्ताओं, वित्तीय संस्थानों और अन्य हितधारकों ने विभागीय प्रक्रियाओं से जुड़ी समस्याओं एवं सुझावों को साझा किया. विभाग के अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि प्राप्त सुझावों के आधार पर नीतिगत और प्रक्रियात्मक सुधार किए जाएंगे ताकि आमजन को बेहतर और सरल सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रमुख सचिव वित्त वैभव गालरिया ने कहा कि कई बार विभाग की मंशा और फील्ड स्तर पर अधिकारियों द्वारा की जाने वाली व्याख्या में अंतर आ जाता है, जिसके कारण अनावश्यक समस्याएं होती हैं. सरकार की सोच और उद्देश्यों को सही रूप में लागू करने के लिए ऐसे संवाद आवश्यक हैं. उन्होंने कहा कि यदि किसी विषय पर स्पष्टीकरण जारी करने या आदेश जारी करने की जरूरत होगी तो विभाग जरूरी कदम उठाएगा. भविष्य में सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों के अधिकारियों के साथ भी इसी प्रकार के संवाद आयोजित किए जाएंगे ताकि समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सके. उन्होंने कहा कि विभाग का उद्देश्य पंजीयन प्रक्रिया को अधिक सरल और नागरिक हितैषी बनाना है और आम नागरिक बेहतर सेवाओं को सबसे अधिक प्राथमिकता देते हैं. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि "एनीवेयर रजिस्ट्रेशन" की सुविधा को मॉर्टगेज दस्तावेजों में लागू करने संबंधी सुझाव पर भी कार्यवाही की जाएगी.
बिल्डर्स और अधिवक्ताओं ने रखीं समस्याएं
कार्यक्रम में बिल्डर गोपाल गुप्ता ने कहा कि रियल एस्टेट क्षेत्र सरकार को भारी राजस्व उपलब्ध कराता है और डेवलपर्स को कई व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
उन्होंने 2004 से पूर्व के प्रोजेक्ट्स के नियमन से जुड़े प्रावधानों में राहत देने की मांग की. अनिल गुप्ता ने कहा कि कई छोटे शहरों में ऑटो म्यूटेशन की प्रक्रिया दस-दस दिनों तक लंबित रहती है.
यदि किसी भूमि रिकॉर्ड में आंशिक खसरा दर्ज हो तो म्यूटेशन प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाती. उन्होंने सुझाव दिया कि कई विभागों की तरह पंजीयन विभाग भी एमनेस्टी योजना लागू करे ताकि लंबे समय से अपंजीकृत दस्तावेजों का पंजीकरण रियायती शुल्क पर किया जा सके. इससे लंबित मामलों का निस्तारण भी तेज होगा. वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र सिंह मेड़तिया ने मॉर्टगेज डीड -MODT) से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए ऑनलाइन डीड प्रक्रियाओं के लिए समय-सीमा निर्धारित करने का सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि गलत स्टाम्प शुल्क कटने पर रिफंड प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा कई मामलों में उपभोक्ता के खाते में प्रविष्टि नहीं होने तक लीज डीड लंबित रहती है, जिसका समाधान किया जाना चाहिए.
टेक्नोलॉजी आधारित होगा पंजीयन तंत्र
संगोष्ठी में पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के महानिरीक्षक (आईजी स्टांप) शरद मेहरा ने विभागीय सुधारों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया. उन्होंने बताया कि विभाग ऑनलाइन साइट रजिस्ट्रेशन की सुविधाओं का विस्तार कर रहा है तथा बाजार दरों के अनुरूप डीएलसी दरों का रैशनलाइजेशन करने के लिए व्यापक अभ्यास चल रहा है.
उन्होंने कहा कि विभाग कार्यालयों को मॉडल सब-रजिस्ट्रार (एसआर) कार्यालयों के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहा है. ऑनलाइन रिफंड व्यवस्था पर काम जारी है तथा ऑन-साइट वर्क रजिस्ट्रेशन के तहत संबंधित स्थल पर जाकर पंजीकरण की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है.
मेहरा ने बताया कि पैन, आधार, जन आधार और रिप्स (RIPS) पोर्टल का ऑनलाइन एकीकरण किया जा रहा है. नागरिकों और स्टाम्प विक्रेताओं के लिए मोबाइल एप आधारित सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं. वर्तमान में 39 सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में जियो-टैगिंग सुविधा लागू है, जिसे जल्द ही सभी कार्यालयों तक विस्तारित किया जाएगा.
डिजिलॉकर के माध्यम से पंजीयन दस्तावेज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी प्रगति पर है.
उन्होंने बताया कि ऑनलाइन मॉर्टगेज डीड पंजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे बैंकों और ऋण एजेंसियों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.
2 दिसंबर 2025 से ऑनलाइन रेंट एग्रीमेंट अनिवार्य किए गए हैं और लगभग 45 एसआर कार्यालयों में इसकी शुरुआत हो चुकी है. अजमेर में इसका पूर्ण क्रियान्वयन किया जा रहा है.
ई-पंजीयन 3.0 से बढ़ी पारदर्शिता
आईजी स्टांप ने बताया कि विभाग में ई-गवर्नेंस सुधार लगातार जारी हैं. ई-पंजीयन-1 में ऑनलाइन भुगतान सुविधा शुरू हुई थी, जिसे ई-पंजीयन-2 में और बेहतर बनाया गया. अब ई-पंजीयन-3 में जियो-टैगिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं जोड़ी गई हैं, जिससे निरीक्षण और सत्यापन की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी.
उन्होंने बताया कि अब ऑनलाइन सबमिशन, सेल्फ वैल्यूएशन और ऑनलाइन भुगतान की सुविधाएं उपलब्ध हैं. जियो-टैगिंग आधारित डीएलसी व्यवस्था से संपत्ति की सही स्थिति और मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता आएगी.
साथ ही पैन वेरिफिकेशन का नि:शुल्क एक्सेस भी जल्द उपलब्ध कराया जाएगा तथा भविष्य में ई-पट्टा जैसी सुविधाएं भी शुरू की जा सकती हैं.
सचिव वित्त राजस्व कुमारपाल गौतम ने कहा कि संपत्ति खरीदना केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के जीवन का महत्वपूर्ण निर्णय होता है. उन्होंने बताया कि गत वर्ष राज्य में लगभग 19 लाख दस्तावेजों का पंजीकरण हुआ, जिससे 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ. उन्होंने कहा कि भविष्य का पंजीयन तंत्र पूरी तरह टेक्नोलॉजी आधारित होगा.
ई-रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था से निवेशकों और नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित सेवाओं पर भी काम कर रहा है ताकि नागरिकों को और अधिक सुविधाजनक, पारदर्शी और त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें. वैभव गालरिया ने बताया कि बहुत जल्द ही विभाग अलग अलग क्षेत्रों की डीएलसी दर को बाजार दर के बराबर करेगा जिसे लेकर एक्सरसाइज जारी है.
कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने कहा कि स्टेकहोल्डर्स से प्राप्त सुझावों का अध्ययन कर उन्हें चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिससे पंजीयन - मुद्रांक विभाग की सेवाओं को और अधिक सरल, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाया जा सके.