VIDEO: ऊर्जा विभाग बना डी रेगुलेशन का सबसे तेज सेक्टर, डी रेगुलशन में जयपुर नंबर-1, सलूम्बर सबसे पीछे, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: राजस्थान में डी रेगुलेशन  फेज-I के तहत कारोबारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने और निवेश स्वीकृतियों में तेजी लाने के प्रयासों का असर राजनिवेश पोर्टल के आंकड़ों में दिखाई दे रहा है. मुख्य सचिव कार्यालय के डी रेगुलेशन सेल की अगस्त 2026 की इम्पैक्ट असेसमेंट रिपोर्ट के अनुसार जयपुर राज निवेश आवेदन की स्वीकृति में सबसे आगे जबकि सलूमबार सबसे नीचे है. डी रेगुलेशन में देश में राजस्थान आगे है. मुख्य सचिव कार्यालय के डी रेगुलेशन सेल की अगस्त 2026 की रिपोर्ट इसकी तस्दीक करती है. अप्रैल से अगस्त के बीच प्रदेश में 49,447 आवेदन प्राप्त हुए और 25,745 आवेदन स्वीकृत किए गए. रिपोर्ट में सभी 23 प्राथमिकता क्षेत्रों में डी रेगुलशन  फेज-I लागू होने की बात कही गई है.

जयपुर टॉप पर , जोधपुर-अजमेर दूसरे-तीसरे पायदान पर: 
जिला स्तर पर राजनिवेश आवेदनों की स्वीकृति में जयपुर 4,788 के साथ नंबर-1 रहा. जोधपुर 1,897 स्वीकृतियों के साथ दूसरे और अजमेर 1,270 के साथ तीसरे स्थान पर रहा. डीडवाना-कुचामन 1,034 और कोटा 1,030 स्वीकृतियों के साथ क्रमशः चौथे और पांचवें स्थान पर रहे.

सबसे कम स्वीकृतियों वाले 5 जिले: 
स्वीकृत आवेदनों की संख्या के आधार पर सबसे निचले पायदान पर सलूम्बर 22 आवेदन के साथ रहा. इसके बाद फलोदी 68, बालोतरा 108, धौलपुर 141 और डूंगरपुर 144 स्वीकृत आवेदनों के साथ बॉटम-5 में रहे.

ऊर्जा विभाग का प्रदर्शन सबसे तेज: 
विभागीय सेवाओं की बात करें तो ऊर्जा विभाग डी रेगुलशन  की तस्वीर में सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र दिखाई देता है. HT/EHT/ट्रांसफॉर्मर/लाइन आदि के energisation की सेवा में औसत निस्तारण समय करीब 2 दिन रहा. DG, Solar, Wind और अन्य Renewable Energy Sources से जुड़ी energisation सेवा में भी औसत निस्तारण करीब 2-3 दिन रहा. JVVNL के नए स्थायी बिजली कनेक्शन का औसत समय करीब 4-5 दिन और AVVNL का करीब 4 दिन रहा.

मेडिकल-हेल्थ भी तेज, लाइसेंस 4-5 दिन में: 
चिकित्सा विभाग की दवा लाइसेंस सेवाओं का निस्तारण भी अपेक्षाकृत तेज रहा. खुदरा दवा लाइसेंस में औसत निस्तारण समय करीब 4 दिन, जबकि थोक दवा लाइसेंस में करीब 5 दिन रहा. इससे स्पष्ट है कि डिजिटल और समयबद्ध प्रक्रिया वाले क्षेत्रों में डी रेगुलेशन का असर तेजी से दिखाई दे रहा है.

पर्यटन अनुमोदन में अभी ज्यादा गुंजाइश: 
इसके विपरीत प्रमुख सेवाओं में पर्यटन परियोजना अनुमोदन का औसत निस्तारण समय सबसे लंबा दिखाई देता है. संबंधित महीनों में यह करीब 10 से 22 दिन रहा. पर्यटन और कुछ  सेवाएं अगली डी रेगुलेशन समीक्षा में सुधार के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र बन सकती हैं.

निवेश की बड़ी तस्वीर भी राजस्थान के पक्ष में: 
डी रेगुलेशन का व्यापक असर निवेश इंटेंट में भी दिख रहा है. अगस्त तक राजनिवेश पोर्टल पर ₹48,453 करोड़ के निवेश इंटेंट दर्ज हुए. इनमें ऊर्जा क्षेत्र ₹16,475 करोड़ के साथ सबसे आगे रहा. इंडस्ट्रियल पार्क में ₹6,777 करोड़, सीमेंट में ₹5,169 करोड़ और पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी में ₹4,708 करोड़ के निवेश इंटेंट मिले.

राजस्थान का डी रेगुलेशन मॉडल—तेज मंजूरी: 
राजस्थान ने डी रेगुलेशन फेज-I में व्हाइट कैटेगरी उद्योगों की संख्या 104 से बढ़ाकर 877, एमएसएमई स्वीकृति अवधि 120 दिन से घटाकर 21 दिन और भूमि रूपांतरण की समय-सीमा 90 दिन से घटाकर 45 दिन की है. साथ ही 45 अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त करने, deemed approval, self-certification और risk-based inspection जैसे कदम उठाए गए हैं. फेज-I के सभी 23 प्राथमिकता क्षेत्रों में सुधार लागू कर देश के अग्रणी सुधार प्रदर्शन करने वाले राज्यों में अपनी जगह बनाई है. इन सुधारों का असर निवेश प्रस्तावों और राजनिवेश पोर्टल पर बढ़ी कारोबारी सक्रियता के रूप में भी सामने आया है.

एमएसएमई के लिए मंजूरी का समय 120 दिन से घटकर 21 दिन: 
राजस्थान के डी रेगुलेशन मॉडल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में पर्यावरणीय अनुपालन और एमएसएमई अनुमोदन प्रक्रिया में सुधार शामिल है. रिपोर्ट के अनुसार व्हाइट कैटेगरी उद्योगों की संख्या 104 से बढ़ाकर 877 की गई, जबकि एमएसएमई की स्वीकृति समय-सीमा 120 दिन से घटाकर 21 दिन कर दी गई। भूमि रूपांतरण की समय-सीमा भी 90 दिन से घटाकर 45 दिन की गई है. राजस्थान में डी रेगुलेशन का सबसे बड़ा लाभ फिलहाल तेज सेवा वितरण और निवेश गतिविधि के रूप में सामने आ रहा है. यह विकसित राजस्थान@2047 के लक्ष्य की दिशा में राजस्थान ने प्रशासनिक और नियामकीय सुधारों के मोर्चे पर महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज की हैं.