VIDEO: हाईकोर्ट के आदेश के बाद आवासन मंडल सक्रिय, 2200 करोड़ की जमीन पर चला बुलडोजर, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर:  राजस्थान की राजधानी के बीटू बायपास स्थित बेशकीमती जमीन के कब्जे लेने की कार्रवाई आवासन मंडल ने गुरुवार को शुरू कर दी. हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब जाकर आवासन मंडल सक्रिय हुआ और पहले दिन 36 बीघा में से करीब 15 बीघा भूमि का कब्जा ले लिया. बी टू बायपास स्थित श्रीराम कॉलोनी बी की भूमि के बहुचर्चित मामले में पिछले दिनों हाई कोर्ट ने आवासन मंडल के पक्ष में फैसला दिया था.

यह कुल भूमि है 42 बीघा 10 बिस्वा. इसमें से बीटू बायपास सड़क निर्माण के लिए भूमि चले जाने के बाद मौके पर बची है करीब 36 बीघा भूमि. हाईकोर्ट का फैसला अपने पक्ष में आने के बावजूद भी भूमि का कब्जा लेने की मंडल की ओर से कार्रवाई शुरू नहीं की गई. इस देरी पर फर्स्ट इंडिया न्यूज ने खबर प्रसारित की. खबर प्रसारित होने के बाद मंडल प्रशासन हरकत में आया और आज दोपहर करीब साढ़े तीन बजे मंडल के अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंच गई.

आवासन मंडल की टीम भूमि का कब्जा लेने के लिए दोपहर करीब साढ़े तीन बजे मौके पर पहुंची. टोंक रोड पर सांगानेर की तरफ से जमीन से निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई.यहां से लेकर बीटू बायपास की तरफ तक अधिकतर निर्माणों को हटाया गया. मंडल की ओर से ढाई दर्जन से अधिक निर्माणों को धराशायी किया गया. इनमें चारदिवारियों,मकानों,टीनशैड के कमरो व अस्थायी निर्माण शामिल हैं. करीब तीन घंटे से अधिक चली कार्रवाई में करीब 15 बीघा भूमि का मंडल ने कब्जा लिया. कब्जे में ली गई भूमि के विभिन्न स्थानों पर मंडल की ओर से अपनी संपत्ति के बोर्ड लगाए गए. लेकिन मंडल की ओर से आज आधी अधूरी तैयारी के साथ कार्रवाई की गई. मंडल के दस्ते के पास पर्याप्त पुलिस जाप्ता नहीं था. इसके चलते यहां भूमि पर कब्जे के लिए बसाए गए परिवारों ने कार्रवाई का जमकर विरोध किया.

इस विरोध के चलते कई बार मंडल की कार्रवाई बाधित भी हुई. कार्रवाई से आक्रोशित कुछ महिलाओं ने जेसीबी मशीन पर पत्थर फेंके. पत्थर फेंकने से जेसीबी मशीन का कांच टूट गया.मौके पर मौजूद मंडल अधिकारियों का कहना था कि उच्च स्तर पर निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी. जानकारों के अनुसार प्रभावित लोगों ने हाई कोर्ट की खंडपीठ में याचिका लगा दी है. इस प्रकरण में हाई कोर्ट में 17 अप्रेल को सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है. वर्ष 2019 में यहां प्रस्तावित कॉलोनी के नियमन के लिए जेडीए ने आवासन मंडल से एनओसी मांगी थी, लेकिन आवासन मंडल ने एनओसी देने से स्पष्ट इंकार कर दिया था. मंडल का तर्क था कि मौके पर 50 प्रतिशत निर्माण भी नहीं है, ऐसे में नियमन उचित नहीं है. इस मामले में सोसाइटी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर एसीबी को भी जांच सौंपी गई थी.