VIDEO: सवालों के घेरे में परिवहन विभाग की कार्यशैली, 2 साल बाद भी फाइलों में कैद सरकारी ATS, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: राजस्थान सरकार की बजट घोषणाओं को धरातल पर उतारने के दावों के बीच परिवहन विभाग की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है. वर्ष 2024 के बजट में जयपुर में सरकारी ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) स्थापित करने की घोषणा को दो साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन आज तक यह परियोजना कागजों से बाहर नहीं निकल सकी है.

सूत्रों के अनुसार इस अवधि में परिवहन विभाग के अधिकारियों द्वारा कई दौर की बैठकें आयोजित की गईं. स्थान चयन, संचालन मॉडल, तकनीकी व्यवस्थाओं और अन्य प्रक्रियाओं पर लगातार चर्चा होती रही, लेकिन इन बैठकों का परिणाम अब तक शून्य ही नजर आ रहा है. विभाग के पास न तो ATS शुरू होने की कोई निश्चित समय-सीमा है और न ही इसके संचालन को लेकर कोई स्पष्ट रोडमैप.

विडंबना यह है कि जिस समय सरकारी ATS की फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल तक घूम रही हैं, उसी दौरान निजी क्षेत्र ने तेज़ी से कदम बढ़ाए हैं. प्रदेश में कई निजी ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन शुरू हो चुके हैं और कई अन्य अंतिम चरण में हैं. निजी कंपनियां आधुनिक तकनीक के साथ वाहन फिटनेस जांच की सुविधाएं उपलब्ध कराने लगी हैं, जबकि सरकारी परियोजना अब भी मंजूरी और प्रक्रियाओं के जाल में उलझी हुई है.

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी ATS शुरू होने से वाहन फिटनेस जांच में पारदर्शिता बढ़ेगी और विभाग को स्वयं एक मॉडल सुविधा संचालित करने का अवसर मिलेगा. साथ ही निजी और सरकारी व्यवस्थाओं के बीच प्रतिस्पर्धा से सेवाओं की गुणवत्ता भी बेहतर हो सकती है. लेकिन परियोजना में लगातार हो रही देरी से सरकार की मंशा और विभाग की कार्यक्षमता दोनों पर सवाल उठ रहे हैं.

परिवहन विभाग के अधिकारियों से जब इस संबंध में जानकारी ली जाती है तो स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाता. ATS कब शुरू होगा, इसकी स्थापना कहां होगी, संचालन किस मॉडल पर होगा और आम जनता को इसकी सुविधा कब तक मिलेगी-इन सवालों का कोई ठोस उत्तर फिलहाल विभाग के पास नहीं है.

राज्य सरकार द्वारा बजट घोषणाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश लगातार दिए जाते रहे हैं, लेकिन जयपुर का सरकारी ATS इसका अपवाद बन गया है. दो साल पहले की गई घोषणा आज भी अधूरी है और विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली के कारण यह महत्वाकांक्षी परियोजना केवल बैठकों और चर्चाओं तक सीमित दिखाई दे रही है.

अब देखने वाली बात यह होगी कि परिवहन विभाग इस परियोजना को कब तक धरातल पर उतार पाता है या फिर सरकारी ATS की यह घोषणा आने वाले वर्षों में भी केवल फाइलों और बैठकों तक ही सिमट कर रह जाएगी.