VIDEO: परिवहन विभाग की नई कार्यशैली का असर, राजस्थान में ATS का तेजी से विस्तार, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: राजस्थान में परिवहन विभाग की कार्यशैली में आए बदलाव का असर अब जमीनी स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है. पिछले वर्ष दिसंबर तक पूरे प्रदेश में केवल एक ऑटोमैटिक टेस्टिंग स्टेशन (ATS) संचालित था वहीं सिर्फ 6 महीने में यह संख्या 30 के पार पहुंच गई है. परिवहन विभाग में पिछले साल तक दर्जनों निजी निवेशकों द्वारा स्थापित किए जाने वाले ATS के आवेदन विभिन्न स्तरों पर महीनों से लंबित पड़े थे. फाइलों के अटकने के कारण न केवल निवेश प्रभावित हो रहा था, बल्कि वाहन फिटनेस व्यवस्था भी पुराने ढर्रे पर चल रही थी. अब महज छह महीने में तस्वीर पूरी तरह बदल गई है.

विभाग की तेज फाइल डिस्पोजल प्रणाली के चलते प्रदेश में ATS की संख्या 30 के पार पहुंच चुकी है और इसी महीने यह आंकड़ा 50 से अधिक होने की संभावना है,  केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने भी राजस्थान में ATS परियोजनाओं की धीमी प्रगति और लंबित फाइलों को लेकर नाराजगी जताई थी. मंत्रालय लगातार राज्यों में आधुनिक, तकनीक आधारित वाहन फिटनेस व्यवस्था लागू करने पर जोर दे रहा है, लेकिन राजस्थान में प्रशासनिक सुस्ती के कारण परियोजना अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रही थी.
स्थिति में बदलाव उस समय आया जब परिवहन आयुक्त का दायित्व संभालने के बाद पुरुषोत्तम शर्मा ने लंबित फाइलों के त्वरित निस्तारण को प्राथमिकता दी. विभागीय स्तर पर फाइलों की नियमित समीक्षा शुरू की गई, विभिन्न शाखाओं के बीच समन्वय बढ़ाया गया और आवश्यक अनुमतियों की प्रक्रिया को तेज किया गया. इसका परिणाम यह रहा कि वर्षों से अटकी कई परियोजनाओं को एक-एक कर मंजूरी मिलने लगी और नए ATS संचालन के लिए रास्ता साफ हो गया.

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में प्रदेश के अधिकांश जिलों में ATS शुरू हो चुके हैं या अंतिम चरण में हैं. इससे वाहन मालिकों को फिटनेस जांच के लिए लंबी दूरी तय करने या कई दिनों तक इंतजार करने की मजबूरी से राहत मिलेगी. पहले सीमित संख्या में केंद्र होने के कारण वाहन मालिकों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ती थी, जबकि अब यह सुविधा उनके जिले या आसपास के क्षेत्र में उपलब्ध होने लगी है.ऑटोमैटिक टेस्टिंग स्टेशन आधुनिक मशीनों और सेंसर आधारित तकनीक से वाहनों की फिटनेस जांच करते हैं. इससे जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सटीक और मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त होती है. सड़क सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण और तकनीकी रूप से सुरक्षित वाहनों के संचालन में भी ATS की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है.

परिवहन विभाग का लक्ष्य है कि प्रदेश के सभी प्रमुख जिलों और आवश्यकतानुसार अन्य क्षेत्रों में भी ATS की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए. अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान गति बनी रही तो इसी महीने राजस्थान में संचालित ATS की संख्या 50 के पार पहुंच जाएगी. इसे विभाग की तेज निर्णय प्रक्रिया और फास्ट फाइल डिस्पोजल नीति की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. महज छह महीने में एक से 30 से अधिक ATS तक का सफर इस बात का संकेत है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया अपनाई जाए तो वर्षों से लंबित परियोजनाओं को भी तेजी से धरातल पर उतारा जा सकता है. परिवहन विभाग की यह पहल न केवल निवेश को गति देने वाली साबित हुई है, बल्कि आम वाहन मालिकों के लिए भी बड़ी राहत लेकर आई है.