जयपुर: जेडीए के खजाने में 6 हजार करोड़ रुपए लाने वाली नींदड़ योजना को धरातल पर उतारने की उम्मीद जगने लगी है. इसको लेकर राज्य सरकार और जेडीए दोनों ही गंभीर है. विभिन्न मांगों के चलते योजना का विरोध कर रही किसान संघर्ष समितियों के प्रतिनिधियों की आज जेडीए आयुक्त सिद्धार्थ महाजन व अन्य अधिकारियों के साथ सौहादपूर्ण माहौल में जेडीए में बैठक हुई. राजधानी के सीकर रोड पर ग्राम नींदड़ मे जेडीए ने 16 साल पहले यहां बड़ी आवासीय योजना प्रस्तावित की थी.
योजना को लेकर कई किसानों से जेडीए ने भूमि समर्पित कराई, लेकिन इनमें से कई किसानों को जेडीए ने मुआवजे के विकसित भूखंड नहीं दिए. विभिन्न मांगों को लेकर नींदड़ बचाओ किसान संघर्ष समिति और नींदड़ बचाओ युवा किसान संघर्ष समिति विरोध में हैं. यह नींदड़ आवासीय योजना 327 हैक्टेयर में प्रस्तावित है. करीब 286 हेक्टेयर भूमि अवाप्ति के लिए पहली अधिसूचना 4 जनवरी 2010 को जारी की गयी थी. शेष 41.45 हैक्टेयर भूमि जविप्रा की स्वंय की भूमि है. भूमि अवाप्ति का अवार्ड दिनांक 31 मई 2013 को जारी किया गया. वहीं 41.27 हैक्टेयर भूमि का नकद मुआवजा सिविल कोर्ट में जमा कराया जा चुका है. अवाप्ति के खिलाफ काश्तकारों की ओर से दायर याचिकाओं को हाईकोर्ट खारिज कर चुका है.
सुप्रीम कोर्ट ने भी 4 सितम्बर 2018 के अपने आदेश में अवाप्ति की प्रक्रिया को सही माना है. करीब 600 खातेदार जेडीए के पक्ष में अपनी 122 हैक्टेयर भूमि समर्पित कर चुके हैं. जमीन देने वाले करीब 450 खातेदारों को जेडीए आरक्षण पत्र जारी कर चुका है. इन खातेदारों को 20% आवासीय और पांच प्रतिशत व्यावसायिक भूमि देने का आरक्षण पत्र दे चुका है. लेकिन मौके पर विरोध के चलते जेडीए अब तक योजना का काम शुरू नहीं कर पाया है.
प्रदेश की भजनलाल सरकार योजना को धरातल पर उतारने के लिए गंभीर है. पिछले दिनों नगरीय विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक गुप्ता और जेडीए आयुक्त सिद्धार्थ महाजन के बीच योजना को लेकर चर्चा भी हुई थी. इसी चर्चा के बाद आज जेडीए आयुक्त सिद्धार्थ महाजन की अध्यक्षता में नींदड़ बचाओ किसान संघर्ष समिति और नींदड़ बचाओ युवा किसान संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई. आपको सबसे पहले बताते हैं कि बैठक में प्रमुख तौर पर क्या रहा.
6 हजार करोड़ कमाई वाली नींदड़ योजना को लेकर बड़ी खबर:
-योजना को लेकर किसान समितियों से हुई सकारात्मक वार्ता
-JDC सिद्धार्थ महाजन की अध्यक्षता में हुई सकारात्मक वार्ता
-योजना का नए सिरे से सर्वे कराने का बैठक में किया फैसला
-जेडीए की ओर से जल्द योजना का कराया जाएगा सर्वे
-समितियों की ऐसी मांगे,जिन पर सरकार स्तर पर होना है फैसला
-उनको लेकर जेडीए जल्द राज्य सरकार को भेजेगा कैबिनेट नोट
-मांगों पर जेडीए अपनी सिफारिश के साथ भेजेगा कैबिनेट नोट
-कैबिनेट नोट में सर्वे की रिपोर्ट को किया जाएगा शामिल
मूल खातेदार को एक रूपए टोकन मनी में पट्टा देने की है कवायद:
-रिंग रोड की तर्ज पर विकसित भूखंड का पट्टा देने की है कवायद
-जानकार सूत्रों के अनुसार
-जेडीए राज्य सरकार को इस बारे में भेजेगा अपनी सिफारिश
-इसके मुताबिक मूल खातेदार को ही मिलेगा एक रूपए में पट्टा
-मुआवजे में दिए जाने वाले विकसित भूखंड का पट्टा
-लेकिन अगर खातेदार ने किसी अन्य व्यक्ति को बेच दी है भूमि
-तो उस व्यक्ति से लीज राशि से सहित अन्य शुल्क लिए जाएंगे
-जेडीए का यह भी विचार है कि
-ऐसे मामले जिनमें खातेदार को दिया है एक रूपए में पट्टा
-अगर खातेदार पट्टा मिलने के बाद बेच देता है भूमि को
-और क्रेता जेडीए में आता है नाम हस्तांतरण के लिए तो
-उस क्रेता से लीज राशि व अन्य सभी शुल्क वसूले जाएंगे
-भूमि के खातेदारों की मांग है कि उन्हें दी जाए एक रूपए में पट्टा
-इसी मांग को लेकर जेडीए इस सिफारिश के साथ भेजेगा
-राज्य सरकार को इस सिफारिश के साथ भेजेगा कैबिनेट नोट
बैठक में उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी के कार्यालय के अधिकारी, नींदड़ बचाओ किसान संघर्ष समिति और नींदड़ बचाओ युवा किसान संघर्ष समिति के प्रतिनिधि शामिल थे.
नींदड़ बचाओ किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रभातीलाल शर्मा, उपाध्यक्ष कैलाशचंद शर्मा, बनवारी लाल शर्मा व अन्य सदस्य, नींदड़ बचाओ युवा किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष कैलाशचंद बोहरा, मालीराम बोहरा व गोपाल कुमावत व अन्य सदस्य शामिल थे.
जानकारों के अनुसार:
-योजना की 327 हेक्टेयर भूमि में से की जा सकती है क्रियान्वित
-करीब 282 हेक्टेयर भूमि पर ही योजना की जा सकती है क्रियान्वित
-इसमें से खातेदारों को मुआवजा देने और
-सड़क व पार्क आदि सुविधाओं में भूमि जाने के बाद बचेगी भूमि
-जेडीए के पास बचेगी करीब 100 हेक्टेयर भूमि
-इस भूमि के निस्तारण से जेडीए अधिकारियों को है उम्मीद
-जेडीए के खजाने में 6 हजार करोड़ रुपए आने की है उम्मीद
योजना को लेकर किसान समितियों की ओर से 15 सूत्रीय मांगें हैं. आज हुई बैठक में इन मांगों पर चर्चा हुई. जेडीए अधिकारियों की ओर से स्पष्ट तौर पर कहा गया कि जिन मांगों पर राज्य सरकार के स्तर पर स्वीकृति या फैसले की आवश्यकता है, उस संबंध में जेडीए की ओर से कैबिनेट नोट सिफारिश के साथ राज्य सरकार को भेजा जाएगा. ताकि मामले में कैबिनेट स्तर पर किया जाए विचार. आपको बताते हैं किस मांग को लेकर जेडीए का क्या पक्ष है.
किसान समितियों प्रतिनिधियों की मांग है कि मकानों को हटाने के लिए दिया जाए समय:
-कम से कम दिया जाए छह महीने का समय
-इस मांग पर जेडीए की ओर से जताई गई सहमति
-इसी तरह यह भी मांग थी कि जब तक नहीं मिल जाए सभी को पट्टे
-जब तक सभी प्रभावित खातेदारों को नहीं मिल जाए भूखंडों के पट्टे
-तब तक योजना की भूमि की जेडीए की ओर से नहीं की जाए नीलामी
-इस पर भी जेडीए अधिकारियों की ओर से जताई गई सहमति
बैठक में समितियों की 15 सूत्रीय मांगों पर की गई चर्चा:
-समिति के प्रतिनिधियों की मांग है कि मुआवजा दिया जाए प्रचलित दर से
-जेडीए का पक्ष है कि 25% विकसित भूमि का दिया जाएगा मुआवजा
-मकान व अन्य नकद मुआवजा दिया जाएगा तत्कालीन प्रचलित दर पर
-मौजूदा दर पर मुआवजे के लिए सरकार की स्वीकृति है जरूरी
-समिति की मांग है कि विकसित भूमि देने का दिया जाए विकल्प
-न्यायालय में जमा मुआवजा राशि जेडीए में कराई जाए जमा
-इस मांग पर जेडीए क पक्ष है कि
-विवाद की स्थिति में मुआवजे का निर्धारण न्यायालय करेगा
-न्यायालय में जमा राशि वापस जेडीए में जमा करने और
-विकल्प देने के लिए सरकार की स्वीकृति है आवश्यक
समिति के प्रतिनिधियों की मांग है कि मुआवजे में 25% आवासीय भूमि:
-और 10% व्यावसायिक भूमि 200 फीट रोड पर दी जाए
-जेडीए का पक्ष है कि भूमि अवाप्ति अधिनियम में नहीं है कोई प्रावधान
-35 प्रतिशत विकसित भूमि दिए जाने का नहीं हैं कोई प्रावधान
-पूर्व में पारित अवार्ड के अनुसार दी जा सकती है कुल 25%भूमि
-जिस मूल खातेदार की जमीन आ रही है 200 फीट रोड
-उनको ही 200 फीट रोड पर दिया जाएगा व्यावसायिक भूखंड
-शेष खातेदारों को निकटतम चौड़ी सड़क पर दिए जाएंगे ये भूखंड
समिति के प्रतिनिधियों की मांग है कि:
-किसानों को पेड़-पौधों,नलकूपों,भूमिगत सीमेंटेड पाइप,पानी की होद
-और निर्मित मकानों का वर्तमान दर से दिया जाए मुआवजा
-इस मांग पर जेडीए का कहना है कि
-तत्कालीन दर के अनुसार ही दिया जाएगा ये मुआवजा
-वर्तमान दर के लिए राज्य सरकार से स्वीकृति है जरूरी
समिति के प्रतिनिधियों की मांग है कि:
-जिन किसानों की आबादी भूमि है अवाप्ति में
-उन किसानों को बतौर मुआवजा दिया जाए आधी भूमि
-राज्य सरकार के स्तर पर मामले में किया जाएगा फैसला
-प्रतिनिधियों की यह भी मांग है कि जहां तक संभव हो नहीं तोड़े जाएं
-किसानों के मकानात,जहां तक संभव हो नहीं तोड़े जाएं
-इस मांग पर जेडीए का कहना है कम से कम तोड़े जाएंगे मकान
-इसके लिए योजना मानचित्र को किया जाएगा संशोधित
समिति के प्रतिनिधियों की मांग है कि:
-मौके पर ही कैंप लगाकर दिए जाएं
-किसानों को मुआवजे के भूखंडों के आवंटन पत्र व पट्टे दिए जाएंगे
-जेडीए का इस मांग को लेकर कहना है कि
-कैम्प लगाकर ही यह कार्यवाही की जाएगी
-कैंप के स्थान पर जेडीए स्तर पर किया जाएगा विचार
-यह भी मांग है कि कॉलोनियों का किया जाए नियमन
-योजना की भूमि पर बसी कॉलोनियों का किया जाए नियमन
-जेडीए का इस मांग पर कहना है कि
-इस मामले में राज्य सरकार की स्वीकृति है आवश्यक