जयपुरः प्रदेश भर में 70 लाख से ज्यादा फाइल डिजिटाइज हो गए हैं और देश भर में 26500 सेवाएं डिजिटल हैं. जयपुर में पहली बार 1 और 2 जुलाई को होने वाले 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन को लेकर प्रेस ब्रीफिंग में मुख्य सचिव वी.श्रीनिवास ने यह जानकारी दी. इस बार सम्मेलन की थीम “विकसित भारत 2047: एआई एनेबल्ड, डेटा ड्रिवन एंड सिक्योर डिजिटल गवर्नेंस” रखी गई है.
जयपुर में पहली बार हो रही ई गवर्नेंस कॉन्फ्रेंस के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. प्रशासनिक सुधार,लोक शिकायत विभाग इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) और राजस्थान सरकार के सहयोग से आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में देशभर से डिजिटल गवर्नेंस से जुड़े विशेषज्ञ, अधिकारी और प्रतिनिधि शामिल होंगे. सम्मेलन का उद्घाटन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा करेंगे. उद्घाटन सत्र को सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ संबोधित करेंगे. वहीं सम्मेलन के दूसरे दिन 2 जुलाई को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस अवॉर्ड 2026 का वितरण होगा, जिसमें केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह विजेताओं को सम्मानित करेंगे. AI और डेटा आधारित डिजिटल शासन से किस तरह नागरिक केंद्रित सेवाएं करके आम लोगों के जीवन में बदलाव लाएं इसे लेकर सम्मेलन में विचार विमर्श होगा. सम्मेलन में AI, डीप टेक, क्वांटम कंप्यूटिंग, वॉइस फर्स्ट सॉल्यूशंस और सुरक्षित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए नागरिकों तक आसान और पारदर्शी सेवाएं पहुंचाने पर मंथन होगा.
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वे कई वर्षों से इस सम्मेलन से जुड़े हैं और उनकी इच्छा थी कि इसका आयोजन राजस्थान में हो. उन्होंने कहा कि सम्मेलन में भारत सरकार का बड़ा प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा. नैसकॉम नॉलेज पार्टनर के रूप में और एमएनआईटी जयपुर को भी जोड़ा गया है. मुख्य सचिव ने बताया कि सम्मेलन में 27 राज्य और 9 केंद्र शासित प्रदेश भाग ले रहे हैं. देशभर से ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले प्रतिनिधि शामिल होंगे. अतिरिक्त सचिव सरिता ने बताया कि 17 अवॉर्ड विजेता और नामित प्रतिनिधि भी सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. श्रीनिवास ने कहा कि सरकार अलग-अलग पोर्टल को एक जगह लाने की दिशा में काम कर रही है. भारत सरकार में स्पैरो और अन्य पोर्टल को केंद्रीकृत किया जा रहा है, इसी तरह राज्य सरकार में भी व्यवस्था विकसित की जाएगी. सरकारी कर्मचारियों को ई-सर्विस बुक उपलब्ध कराई जा रही है.उन्होंने बताया कि राजस्थान में सिंगल विंडो और सिंगल एक्सेस पोर्टल की दिशा में काम किया जा रहा है, जिससे लोगों को अलग-अलग सेवाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा. मुख्य सचिव ने बताया कि मुख्यमंत्री जल्द ही व्हाट्सएप सर्विस शुरू करेंगे, जिसमें 27 सरकारी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध होंगी. डिजिटल लिट्रेसी बढ़ाने के प्रयास जारी हैं. भविष्य में लोग स्थानीय भाषा में बोलकर भी अपनी समस्या या सेवा से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे. शिकायत निवारण व्यवस्था को लेकर मुख्य सचिव ने कहा कि सीपीग्रांस में अब 7 दिन में शिकायतों का निस्तारण हो रहा है. अधिकारियों की मैपिंग 450 से बढ़ाकर 1 लाख तक कर दी गई है. उन्होंने कहा कि राजस्थान संपर्क अब राष्ट्रीय बेस्ट प्रैक्टिस बन चुका है. राजस्थान संपर्क पर अब तक करीब 42 लाख शिकायतें दर्ज हुई हैं और वर्तमान में प्रतिदिन करीब 30 हजार शिकायतें प्राप्त हो रही हैं.
70 लाख से ज्यादा फाइलें डिजिटाइज
मुख्य सचिव ने बताया कि देश में अब तक 70 लाख से ज्यादा फाइलों का डिजिटाइजेशन किया जा चुका है. उन्होंने कहा कि एनआईसी बेहतर सर्विस प्रोवाइडर के रूप में काम कर रहा है. महाराष्ट्र सरकार का सचिवालय 100 फीसदी डिजिटल हो चुका है. उन्होंने बताया कि देशभर में 26,500 डिजिटल सेवाएं उपलब्ध हैं और लक्ष्य डिजिटल सेवाओं में 100 फीसदी संतृप्ति हासिल करना है.
सम्मेलन में डिजिटल शासन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा के लिए 6 प्लेनरी और 6 ब्रेकआउट सेशन आयोजित किए जाएंगे. इनमें AI आधारित गवर्नेंस, डिजिटल डिवाइड खत्म करने, स्मार्ट पुलिसिंग, नागरिक केंद्रित शासन, शिक्षा में डिजिटल हस्तक्षेप और सुरक्षित डिजिटल सेवाओं जैसे विषयों पर मंथन होगा. सम्मेलन के दौरान जयपुर डिक्लेरेशन जारी किया जाएगा, जिसका उद्देश्य डिजिटल माध्यमों से आमजन तक सरकारी सेवाओं की पहुंच को और आसान बनाना होगा.