जयपुर : नई भर्तियों से पहले भर्ती पैटर्न पर बड़ा "बवाल" शुरू हो गया है. बात चिकित्सा विभाग की आगामी जंबो भर्तियों को लेकर छिड़े विवाद से जुड़ी है. दरअसल, अभी नॉन गजेटेड पदों पर भर्ती के लिए चिकित्सा भर्ती नियम बने हुए हैं. चिकित्सा भर्ती नियम 1965 के तहत मेरिट+बोनस अंकों के आधार पर भर्ती होती है.
लेकिन बोनस अंकों के लिए ठेके पर लगाने के नाम पर करप्शन का "खेल" हो रहा है. जबकि दूसरी तरफ फ्रेशर अभ्यर्थी लगातार परीक्षा से सीधी भर्ती की मांग उठा रहे हैं. ऐसे में अब चिकित्सा विभाग ने भर्ती के पैटर्न में बदलाव को लेकर कवायद शुरू की है. तो संविदा-ठेके पर अस्पतालों में कार्यरत कार्मिक और फ्रेशर स्टूडेंट "आमने-सामने हो गए हैं.
सोशल मीडिया और शक्ति प्रदर्शन के जरिए अभ्यर्थी अपनी-अपनी मांग को उठा रहे हैं. हालांकि, दोनों ही पक्षों का तर्क वाजिब हैं. जिसके चलते अब "बीच के रास्ते" की दरकार है. इसके लिए विभाग एक निर्धारित तिथि तय करें, जिसके बाद बोनस की व्यवस्था बंद हो. लेकिन तय तिथि से पहले तक सेवाएं दे रहे अभ्यर्थियों को बोनस का फायदा दिया जाए.