जयपुरः राजस्थान में थार गाड़ी अगर आपके घर के बाहर खड़ी है, तो अब पुलिस के रिकॉर्ड में भी उसकी जानकारी पहुंच सकती है. वजह है अपराध की वारदातों में इस गाड़ी के लगातार सामने आने की चिंता. पुलिस मुख्यालय ने अब थार गाड़ियों के मालिकों का रिकॉर्ड जुटाने का फैसला किया है. इसके तहत प्रदेश के सभी जिलों में यह जानकारी जुटाई जाएगी कि किस जिले में कितनी थार गाड़ियां हैं और उनके मालिक कौन हैं. इसके लिए क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) से वाहन मालिकों की सूची ली जाएगी. इसके बाद पुलिस वाहन मालिकों की तस्दीक करेगी.
पुलिस मुख्यालय के इस कदम को अपराधों में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की पहचान और उनकी निगरानी मजबूत करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है. सभी जिला पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं. अब जिलों की पुलिस परिवहन विभाग के रिकॉर्ड के आधार पर थार गाड़ियों और उनके मालिकों की जानकारी जुटाएगी. इसके बाद वाहन मालिकों का सत्यापन किया जाएगा, ताकि पुलिस के पास इन वाहनों से जुड़ा एक व्यवस्थित रिकॉर्ड उपलब्ध हो सके.थार गाड़ी का नाम अब केवल शौक, रुतबे और दमदार वाहन की पहचान तक सीमित नहीं रह गया है. पुलिस की चिंता इसकी उन वारदातों में मौजूदगी को लेकर है, जिनमें अपराधियों ने इस गाड़ी का इस्तेमाल किया. बीते दिनों कई अपराधों में थार के इस्तेमाल की बात सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय ने यह कदम उठाया है. पुलिस अब केवल वारदात होने के बाद वाहन की तलाश तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि पहले से यह जानकारी जुटाना चाहती है कि जिले में ऐसी गाड़ियां किन लोगों के नाम पर पंजीकृत हैं.इस कवायद के जरिए पुलिस को वाहन की पहचान करने, उसके पंजीकृत मालिक तक पहुंचने और जरूरत पड़ने पर जांच के दौरान संबंधित जानकारी हासिल करने में मदद मिल सकती है. खास बात यह है कि यह जानकारी एक जिले तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सभी जिलों में जुटाई जाएगी.
पुलिस की पूरी कवायद का पहला कदम आरटीओ से थार गाड़ियों के मालिकों की सूची हासिल करना होगा. इसके बाद जिला पुलिस अपने स्तर पर सूची में दर्ज वाहन मालिकों की तस्दीक करेगी. यानी केवल गाड़ी का पंजीकरण रिकॉर्ड जुटाकर प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाएगी, बल्कि मालिकों की जानकारी का सत्यापन भी किया जाएगा.इससे पुलिस के पास जिले में पंजीकृत थार गाड़ियों का एक आधारभूत रिकॉर्ड तैयार हो सकेगा. किसी आपराधिक वारदात में ऐसी गाड़ी का इस्तेमाल होने पर जांच के दौरान यह जानकारी उपयोगी साबित हो सकती है. हालांकि, किसी वाहन का मालिक होना अपने आप में किसी व्यक्ति के अपराध में शामिल होने का संकेत नहीं है. पुलिस की इस कार्रवाई का महत्व रिकॉर्ड जुटाने और सत्यापन की प्रक्रिया में है.पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के बाद अब सभी एसपी के स्तर पर यह जानकारी जुटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. किस जिले में कितनी थार गाड़ियां पंजीकृत हैं, उनके मालिक कौन हैं और उपलब्ध रिकॉर्ड की तस्दीक कैसे की जाए—यह इस कवायद के अहम हिस्से होंगे.अपराधों में वाहनों के इस्तेमाल को लेकर पुलिस की यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वारदात के बाद संदिग्ध वाहन की पहचान और उसके मालिक तक पहुंचना जांच का अहम हिस्सा होता है. पहले से उपलब्ध रिकॉर्ड इस प्रक्रिया को आसान बना सकता है.