VIDEO: राजस्थान यूथ कांग्रेस की पूरी प्रदेश कार्यकारिणी भंग, गुटबाजी औऱ निष्क्रियता के चलते कार्यकारिणी को किया भंग, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: आखिरकार गुटबाजी की शिकार राजस्थान यूथ कांग्रेस की पूरी प्रदेश कार्यकारिणी को ही भंग कर दिया गया है. एक आदेश के साथ ही तुरंत प्रभाव से सभी 332 पदाधिकारियों को एक साथ हटा दिया गया है. दरअसल लंबे समय से अधिकतर पदाधिकारी संगठन के दिशा निर्देशों को बिल्कुल फोलो नहीं कर रहे थे. लिहाजा राष्ट्रीय प्रभारी के पास जैसे ही यह शिकायत पहुंची तो उन्होंने तुरंत कार्यकारिणी को भंग करने के आदेश दे डाले. 

राजस्थान कांग्रेस का अग्रिम संगठन यूथ कांग्रेस पिछले कईं दिनों से जबरदस्त गुटबाजी का शिकार है. यूथ कांग्रेस के तीन धड़ों में बंटने के चलते संगठन का कामकाज बेहद प्रभावित हो रहा था. प्रदेश अध्यक्ष और दोनों कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष में खींचतान के चलते फिर प्रदेश कार्यकारिणी भी गुटबाजी का शिकार हो गई थी. यही स्थिति जिलों में जिला अध्यक्षों की बताई जा रही है. लिहाजा संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व ने गुटबाजी की बीमारी का जड़ से समाधान करने के लिए पूरी कार्यकारिणी को ही भंग कर डाला.

-राजस्थान यूथ कांग्रेस गुटबाजी का शिकार
-गुटबाजी के चलते पूरी प्रदेश कार्यकारिणी को किया तुरंत भंग
-एक आदेश के साथ करीब 332 पदाधिकारियों को हटा डाला
-225 मनोनीत और करीब 100 निर्वाचित पदाधिकारियों की कार्यकारिणी  भंग
-6 माह पहले ही किए गए थे 225 प्रदेश पदाधिकारी मनोनीत
-दरअसल यूथ कांग्रेस बंटी हुई है तीन गुटों में
-गुटबाजी के चलते संगठन की गतिविधियां हो रही थी प्रभावित
-राष्ट्रीय प्रभारी मनीष शर्मा ने कार्यकारिणी को भंग करने का लिया तुरंत फैसला
-प्रदेश पदाधिकारियों के बाद नंबर आएगा जिला अध्यक्षों का

गुटबाजी के शिकार के चलते अधिकतर प्रदेश पदाधिकारी ने संगठन गतिविधियों से ही गायब रहने लगे थे. कईं बार इन पदाधिकारियों को नोटिस भी जारी किए गए लेकिन उसके बावजूद पदाधिकारियों के काम करने के ढरे में कोई बदलाव नहीं हुआ. दरअसल मनोनित पदाधिकारियों की नियुक्ति में सिफारिश तंत्र पूरा हावी रहा था. नियुक्ति मिलने के बाद पदाधिकारियों ने अपने काम को बिल्कुल भी गंभीर नहीं लिया. राष्ट्रीय प्रभारी मनीष शर्मा और प्रदेश प्रभारी विकास चिकारा को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थी. ऐसे में आखिर में पूरी कार्यकारिणी को भंग करते हुए नए सिरे से गठन करने का फैसला लेना ही पड़ा.

अब जल्द ही संभवत इसी माह नई कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा. इस बार कार्यकारिणी बहुत छोटी रखी जाएगी. सामने आ रहा है कि नई कार्यकारिणी में करीब 100 के आसपास प्रदेश पदाधिकारी बनाए जाएंगे. बिना सिफारिश के सिर्फ मेहनती और मेरिट के आधार पर नियुक्तियां की जाएंगी. प्रदेश कार्यकारिणी के गठन के बाद निष्क्रिय जिला अध्यक्षों को हटाने की कवायद शुरु होगी.