एक बार फिर कांग्रेस नेता विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा पत्र, कहा- राजस्थान कांग्रेस में नारी शक्ति को आगे बढ़ाने की कोई सोच नहीं

एक बार फिर कांग्रेस नेता विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा पत्र, कहा- राजस्थान कांग्रेस में नारी शक्ति को आगे बढ़ाने की कोई सोच नहीं

जयपुर : कांग्रेस नेता विश्वेन्द्र सिंह को नोटिस मामले में आज एक बार फिर विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर पत्र लिखा है. उन्होंने कहा कि बड़े खेद के साथ कहने/लिखने को मजबूर हूं कि जिस पार्टी ने 60 साल तक देश पर राज किया उसका आज की तारीख में राजस्थान में कोई धनी धोरी नहीं है, वह राम भरोसे हो गई है, इसके नेता जिस डाल पर बैठते हैं उसे ही काटते हैं. 

स्वाभिमानी व्यक्तियों का अब इसमें दम घुट रहा है, प्रदेश कांग्रेस के कर्ताधर्ताओं को अहम और वहम की राजनीति से बाहर निकलना होगा अन्यथा रहा सहा सब खत्म हो जाएगा, अब इस पार्टी में वरिष्ठता का कोई मान-सम्मान नहीं है, युवाओं के लिए कोई  मार्ग-दर्शन करने वाला नहीं है, नारी शक्ति को आगे बढ़ाने की कोई सोच नहीं है जिस पर आलाकमान को ध्यान देना चाहिए. 

मैंने पहले भी कई मंचों पर एक बात पुरज़ोर ढंग से कही है कि मैं मेरे इष्ट श्री गिरिराज धनी का सेवक हूं, हमेशा सही का साथ दिया, सही के साथ खड़ा रहा दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनता जनार्दन की आवाज़ को परम पिता परमेश्वर का आदेश मान कर सेवा की और अंतिम सांस तक करूंगा, विधायक, सांसद, मंत्री सहित सार्वजानिक जीवन में जो भी जिम्मेदारी मिली पूरी ईमानदारी, निष्ठा और कर्तव्य परायणता के साथ निभाई झूंठ, फरेब और बेईमानी से कोसों दूर रह कर धर्म की राह पर रहा और स्वच्छ राजनीति की.

जो बोला मुह पर बोला जो किया जनहित में किया अपने पुरखों की मान, मर्यादा को ध्यान में रख कर ही फैसले लिए, नेकी, सेवाभाव, सहजता और सरलता की जो विरासत मुझे मिली उसे आगे बढ़ाया, अपने स्वाभिमान के साथ कभी समझौता नहीं किया, जीवन में अंतरात्मा की आवाज़ सुन कर ही निर्णय लिए वफादारों के साथ रहा,वफादारी की मुझे कई बार कीमत भी चुकानी पडी लेकिन उसकी परवाह किए बिना अपने उसूल और आदर्शों पर कायम रहा.

कार्यकर्ताओं के बीच रहा और रहूंगा,चापलूसी न मेरे खून में है ना ही कभी करूंगा, जीवन भर एक अनुशासित सिपाही रहा और रहूंगा, पाक साफ़ राजनीति की, आगे भी वही करूंगा, बेदाग सार्वजानिक जीवन रहा और रहेगा, मेरे चाल, चरित्र और चेहरे में कोई फर्क़ नहीं रहा और ना ही रहेगा, जीवन खुली किताब था है और रहेगा, छल, कपट से हमेशा दूर रहा, मेरे दिल और घर के दरवाज़े मेरे कार्यकर्ताओं के लिए 24x7 खुले थे,हैं और रहेंगे. 

जीवन के इस आखिरी पड़ाव पर किसी से कोई अपेक्षा नहीं है, जीवन देव तुल्य जनता के काम करने में बिताया अंतिम सांस तक वही करूंगा उसकी ऐवज में केवल जनता का प्यार और मोहब्बत चाहिए बाकी गिरिराज महाराज ने जो भी दिया उसका उनका आशीर्वाद और प्रसाद मान कर ग्रहण किया जिसके लिए मैं दिल की गहराईयों से  कृतज्ञ हूं, आगे भी मेरे इष्ट से यही प्रार्थना है कि मुझे सत्य की राह पर रखना, अपनों के साथ ही रखना, अपने राजनीतिक भविष्य का फैसला भी देव तुल्य जनता जनार्दन पर ही छोड़ रहा हूं जैसा भी जो भी उनका आदेश होगा वह शिरोधार्य होगा.