प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में गड़बड़झाला, कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने की SOG से जांच कराने की घोषणा, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः राजस्थान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कथित गड़बड़ियों को लेकर सियासत गरमा गई है. विधानसभा में कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने योजना में “संगठित अपराध” होने की बात मानते हुए SOG से जांच करवाने की घोषणा की. मंत्री ने दावा किया कि कई जिलों में बीमा कंपनियों, सर्वेयर और स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों की मिलीभगत से किसानों को करोड़ों रुपये के क्लेम से वंचित किया गया. 

राजस्थान विधानसभा में आज प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में गड़बड़ी का मामला गूंजा. भाजपा विधायक बाबूसिंह राठौड़ ने यह मामला उठाया, तो कृषि मंत्री किरोड़ी मीणा ने सदन में साहस दिखाते हुए पूरे परते ही खोल दी. कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने योजना में व्यापक गड़बड़ियों और संगठित अपराध का आरोप लगाते हुए स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) से जांच करवाने की घोषणा की है. मंत्री ने कहा कि कई जिलों में बीमा कंपनियों, सर्वेयरों और स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों की मिलीभगत से किसानों को करोड़ों रुपये के क्लेम से वंचित किया गया.

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में गड़बड़ी
श्रीगंगानगर के श्रीकरणपुर क्षेत्र में घोटाला 
50 से 70 प्रतिशत तक फसल खराब हुई
वहां सर्वे रिपोर्ट में नुकसान शून्य दर्शा दिया गया
किसानों को करीब 128 करोड़ रुपये का बीमा भुगतान नहीं मिल सका
मंत्री का आरोप— कंपनी ने यह रकम रोककर ब्याज कमाया
संबंधित बीमा कंपनी को “डिफॉल्टर” करार दिया गया
केंद्र सरकार को पत्र लिखकर कंपनी को भविष्य के टेंडर न देने की सिफारिश.
मंत्री ने स्पष्ट कहा— ऐसी कंपनी को दोबारा काम नहीं दिया जाएगा

विधायक बाबूसिंह राठौड़ ने सालासर के एक बैंक से हुई गड़बड़ी का मामला भी उठाया और जांच की माँग की तो मंत्री ने इसका भी खुलासा करते हुए सभी मामलों की SOG से जांच की घोषणा कर दी . 
मंत्री के अनुसार, बीमा माफिया नागौर, बीकानेर, चूरू का कुछ हिस्सा, सांचौर–जालौर क्षेत्र में सक्रिय है. 
 
सालासर एसबीआई में फर्जीवाड़ा
सालासर स्थित एसबीआई शाखा में 71 फर्जी फॉर्म पकड़े गए
कई फॉर्म में पिता और पुत्र का नाम एक ही पाया गया
दस्तावेज गजनेर के किसानों के नाम से, जबकि न किसान मौजूद, न जमीन.
किसान क्रेडिट कार्ड नहीं होने के बावजूद बीमा प्रीमियम काटा गया
अगर गड़बड़ी नहीं पकड़ी जाती तो 9 करोड़ रुपये का भुगतान हो सकता था 

राजस्थान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लेकर उठे सवालों ने कृषि और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं. एसओजी जांच से यह साफ होगा कि गड़बड़ियां केवल लापरवाही थीं या सच में कोई संगठित गिरोह सक्रिय था. फिलहाल किसानों की निगाहें जांच और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं.