VIDEO: कांग्रेस ने अपनाया अब "ट्रेनिंग का नया मॉडल', संगठन में अब ट्रेनिंग के सिस्टम को किया अनिवार्य, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: कमजोर दौर से गुजर रही कांग्रेस को फिर से खड़ा करने के लिए थिंक टैंक ने अब ट्रेनिंग का सहारा लिया है. हाईकमान के निर्देश पर अब कांग्रेस में ट्रेनिंग प्रोग्राम की नई परिपाटी शुरु हो गई है. पीसीसी से लेकर बूथ लेवल तक अब संगठन में प्रशिक्षण शिविर अनिवार्य रुप से आय़ोजित होंगे. राजस्थान कांग्रेस ने भी आलाकमान की गाइडलाइन के तहत ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरु कर दिए हैं. 

लोकसभा चुनाव में हार की हैट्रिक लगने औऱ कई राज्यों में सत्ता गंवाने के बाद कांग्रेस आलाकमान का अब पूरा फोकस संगठन की मजबूती पर है. इसके लिए पहले संगठन सृजन अभियान शुरु किया गया औऱ अब ट्रेनिंग के जरिए नेताओं और कार्यकर्ताओं को ट्रेंड करने का फैसला किया गया है. ट्रेनिंग का मैन मकसद है वैचारिक रूप से नेताओं और वर्कर्स की फौज तैयार करना. लिहाजा हर राज्य की पीसीसी को ट्रेनिंग प्रोग्राम अनिवार्य रूप से आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं. मतलब नई कांग्रेस में अब ट्रेनिंग कैंप ज्वाइन करने का नया पार्ट जुड़ गया है.

कांग्रेस में अब ट्रेनिंग का नया कल्चर हुआ शुरु
-कांग्रेस थिंक टैंक ने संगठन मजबूती के लिए अपनाया ट्रेनिंग मॉडल
-कांग्रेस हाईकमान ने सभी राज्यों में ट्रेनिंग कैंप लगाने किए अनिवार्य
-जिला अध्यक्ष,ब्लॉक अध्यक्ष और बूथ लेवल तक होंगे ट्रेनिंग प्रोग्राम
-अग्रिम संगठन,विभाग और प्रकोष्ठों में होंगे प्रशिक्षण शिविर
-हर जिले में ट्रेनिंग के लिए दो ट्रेनर होंगे नियुक्त
-जिला कार्यकारिणी में एक पदाधिकारी सिर्फ ट्रेनिंग का देखेगा काम
-ट्रेनिंग के जरिए नेताओं और कार्यकर्ताओं को वैचारिक रूप से किया जाएगा मजबूत
-सेवादल से ट्रेनिंग की कमान अब राजीव गांधी पंचायती राज संगठन को दी

हाईकमान के निर्देश पर राजस्थान कांग्रेस ने भी ट्रेनिंग प्रोग्राम लगाने शुरु कर दिए हैं. कल जिला अध्यक्षों की दिल्ली में ट्रेनिंग होगी फिर अलग से दस दिन का ट्रेनिंग कैंप लगेगा. वहां से ट्रेनिंग लेने के बाद जिला अध्यक्ष निचले स्तर पर फिर कैंप लगाएंगे. वहीं राजस्थान कांग्रेस के अग्रिम संगठनों,प्रकोष्ठों और विभागों ने भी ट्रेनिंग सेशन शुरु कर दिए हैं. आने वाले दिनों में हर विंग में ऐसे ही कैंप आयोजित होंगे.

दरअसल ट्रेनिंग कैंप का मकसद है कांग्रेस नेताओं औऱ कार्यकर्ताओं को हर तरीके से पारगंत बनाना. मसलन कैसे उन्हें संगठन संचालन करना है. कैसे लोगों के मुद्दे उठाना है और कैसे फैसले करने है. कांग्रेस थिंक टैंक को पता है कि लगातार हार के बाद पार्टी में काफी हताशा है. लिहाजा उन्हें चार्ज रखने औऱ पार्टी के साथ डटे रहने के लिए उनमें वैचारिक प्रतिबद्धता बेहद जरुरी है. अब देखना है कि ट्रेनिंग मॉडल से संगठन औऱ पार्टी को कितनी मजबूती मिलती है.