VIDEO: कांग्रेस का बूथ मैनेजमेंट का नया मॉडल, विधायकों को बना दिया बूथ लेवल एजेंट, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: पार्टी की मजबूती और सत्ता में वापसी के लिए राजस्थान कांग्रेस ने एक नवाचार किया है. प्रदेश कांग्रेस ने सभी विधायकों और विधानसभा चुनाव प्रत्याशियों को बूथ लेवल एजेंट बना दिया है. राजस्थान कांग्रेस के इतिहास में पहली बार ऐसा एक्सपेरिमेंट किया है. इसके पीछे मकसद एसआईआर के बाद बूथ मैनेजमेंट और अन्य चुनावी प्रक्रिया पर पैनी नजर रखना है.

आगामी निकाय-पंचायत चुनाव और फिर विधानसभा चुनाव की जंग जीतने के लिए कांग्रेस ने अभी से कमर कसना शुरु कर दिया है. इसके लिए कांग्रेस का अब सबसे ज्यादा फोकस अपनी सबसे कमजोर कड़ी बूथ मैनेजमेंट पर है. कमजोर बूथ मैनेजमेंट के चलते कांग्रेस राजस्थान में 1998 के चुनाव के बाद जब भी सत्ता में आई है तो 101 सीटों का बहुमत औऱ जादुई आंकड़े को नहीं छू पाई है. लिहाजा राजस्थान कांग्रेस ने अब बूथ मैनेजमेंट के लिए मिशन मोड़ पर वर्किंग शुरु कर दी  है. बूथ मैनेजमेंट के लिए पार्टी ने अपने दिग्गज नेताओं को ही कमान सौंप दी है.

-कांग्रेस जुटी आगामी निकाय,पंचायत और विधानसभा चुनाव की जंग में 
-थिंक टैंक का फोकस अब अपनी सबसे कमजोर कड़ी बूथ मैनेजमेंट पर 
-बूथ मैनेजमेंट के लिए विधायकों को बना दिया बूथ लेवल एजेंट
-शेष जगह विधानसभा चुनाव प्रत्याशियों को दी बीएलए की जिम्मेदारी
-विधायक औऱ प्रत्याशी BLA 1 के रोल में चुनावी प्रक्रिया पर रखेंगे पैनी नजर
-SIR प्रक्रिया के बाद राजस्थान कांग्रेस ने उठाया यह अहम कदम
-वोटर लिस्ट और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी हर गतिविधि को अब खुद देंगे अंजाम

दरअसल पार्टी का मानना है कि विधायक और प्रत्याशी अपने विधानसभा क्षेत्र में लगातार एक्टिव रहते है. ऐसे में हर घर औऱ मतदाताओं के बारे में उन्हें सीधे पूरी जानकारी रहती है. साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों के भी वो ही ज्यादा संपर्क में रहते है. इसलिए चुनावी प्रक्रिया पर पैनी नजर रखने के लिए विधायकों को ही बीएलए बनाने का फार्मूला लागू किया गया. जल्द अब बीएलए वन की जयपुर में एक अहम बैठक होगी. जिसमें पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा उन्हें आगे के टास्क के बारे में बताएंगे.

आपको बता दे कि राजस्थान में करीब 52 हजार से ज्यादा बूथ है. कांग्रेस ने सभी 52 हजार बूथों पर बूथ लेवल एजेंट्स की नियुक्ति कर दी है. कांग्रेस हाईकमान भी राजस्थान कांग्रेस के बूथ एजेंट नियुक्ति मॉडल की कई बार तारीफ कर चुका है. अब देखते है कि आगामी तमाम चुनावों में कांग्रेस को बूथ मैनेजमेंट के नए मॉडल का कितना फायदा मिलता है.