VIDEO: JDA की 150 करोड़ की जमीन पर कब्जा, जिम्मेदार अधिकारियों पर उठे सवाल, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: जब बाड़ ही खेत को खाने लग जाए तो क्या कीजिए. जी हां जेडीए के जिम्मेदार अधिकारी ही जेडीए स्वामित्व की भूमि पर करा रहे हैं अवैध कब्जा. जिस डेढ़ सौ करोड़ रुपए बाजार भाव की जमीन से जेडीए को आय होनी चाहिए थी,वह जमीन दे दी गई रेवड़ी की तरह मुफ्त में. 

मामला है सांगानेर तहसील के ग्राम सांगानेर की करीब 7 बीघा भूमि का. यह भूमि सांगानेर फ्लाई ओवर से सांगानेर कस्बे की तरफ जाते हुए सांगा सेतु पुलिया पार करते ही दायीं तरफ स्थित है. मुख्य सड़क से महज 200 मीटर की दूरी पर स्थित है यह मौके की भूमि. द्रव्यवती नदी के सहारे स्थित यह बेशकीमती भूमि है अतिक्रमण का शिकार. इसी भूमि के बड़े हिस्से को खुद जेडीए के ही जिम्मेदार अधिकारियों ने अवैध कब्जे के हवाले कर दिया. एक तरफ तो जेडीए आयुक्त सिद्धार्थ महाजन जेडीए की आमदनी बढ़ाने के लिए नित नए प्रयास कर रहे हैं दूसरी तरफ जेडीए के ही अधिकारी जेडीए स्वामित्व की जमीनों पर कब्जे करा रहे हैं.

-जेडीए आयुक्त ने सभी अभियंताओं को दे रखे हैं निर्देश
-द्रव्यवती नदी के सहारे व अन्य स्थानों पर स्पोर्ट्स कॉम्पलैक्स निर्मित करने के लिए भूमि तलाशने के निर्देश
-ताकि स्पोर्ट्स कॉम्पलैक्स के संचालन से जेडीए की हो सके नियमित आमदनी
-यहीं नहीं जेडीए की ओर से अपनी स्वामित्व की भूमि को किराए पर देने का काम भी शुरू किया जा चुका है
-जेडीए की ओर से किराए की दरें भी निर्धारित की जा चुकी हैं
-जेडीए आयुक्त सिद्धार्थ महाजन की इन सारी कवायद को जेडीए अधिकारियों पर असर नजर नही आ रहा है
-यही कारण है कि मौके की भूमि पर अवैध कब्जा करा दिया गया है
जेडीए की ओर से सांगानेर एलिवेटेड रोड का प्रोजेक्ट हाथ में लिया गया है. प्रोजेक्ट का काम मौके पर शुरू किया जा चुका है. अलग-अलग स्थानों पर पाइलिंग का काम किया जा रहा है. जेडीए की इसी प्रोजेक्ट से जुड़ा है जेडीए स्वामित्व की भूमि के अवैध कब्जे का मामला.
-जिस 7 बीघा बेशकीमती भूमि की हम बात कर रहे हैं उसमें से करीब 4 बीघा भूमि पर अतिक्रमण हैं
-करीब चार बीघा भूमि पर भूखंड काटकर उस पर चारदिवारियां बनाकर कब्जा किया गया है
-इसके अलावा शेष तीन बीघा भूमि पर स्टील यार्ड का निर्माण किया हुआ है
-यह स्टील यार्ड किसी और ने नहीं बल्कि सांगानेर एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट का काम कर रही फर्म का है
-फर्म की ओर से पिछले करीब छह महीने से जेडीए स्वामित्व की भूमि पर अवैध कब्जा कर यार्ड का संचालन किया जा रहा है
-स्टील यार्ड में प्रोजेक्ट की पाइलिंग,पियर व गर्डर आदि के निर्माण के लिए लोहे के सरियों का जाल बनाया जाता है
-इसके अलावा बड़ी मात्रा में  सरियों का स्टॉक किया जाता है
-जेडीए और फर्म के अनुबंध की शर्त के मुताबिक स्टील यार्ड के लिए भूमि की व्यवस्था फर्म को अपने स्तर पर करनी होती है
-अक्सर ऐसी फर्में यार्ड के लिए भूमि किराए पर लेती हैं
-लेकिन सांगानेर एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट के मामले में तो जेडीए की जमीन फर्म को मुफ्त में उपलब्ध का दी गई
-जेडीए के जिम्मेदार अभियंता इस मामले में यह सफाई नहीं दे सकते कि उनको फर्म के कब्जे का पता नहीं हैं
-फर्म ने कहां यार्ड स्थापित किया है, उस यार्ड में कैसा सरिया काम में लिया जा रहा है और क्या काम चल रहा है
-इसकी नियमित मॉनिटरिंग करना प्रोजेक्ट से जुड़े जिम्मेदार अभियंताओं की ड्यूटी में शामिल हैं
-यहीं नहीं प्रोजेक्ट के मौके पर चल रहे काम का नियमित निरीक्षण भी अभियंताओं के काम में शामिल है
-तो फिर ऐसा कैसे संभव है कि प्रोजेक्ट से संबंधित अभियंताओं को फर्म के इस अवैध कब्जे की जानकारी नहीं हैं
-प्रोजेक्ट से जुड़े जानकारों का आरोप हैं इन अभियंताओं ने अपने स्तर पर ही फर्म को प्रोजेक्ट साइट के नजदीक यह भूमि उपलब्ध कराई है
-स्थानीय जानकारों के मुताबिक यह भूमि अगर किराए पर दी जाती तो जेडीए को हर महीने दो से तीन लाख रुपए की आय होती
-लेकिन मुफ्त में देने से जेडीए को इतनी ही राशि की नियमित हानि हो रही है

इस कुल 7 बीघा सरकारी भूमि पर किए गए अन्य अतिक्रमणों को लेकर जेडीए की प्रवर्तन शाखा की ओर से नोटिस दिए गए थे. लेकिन मामले में कार्रवाई अंजाम तक नहीं पहुंच पाई.