जैसममेर: सरहदी जिले जैसलमेर में इस बार बारिश के आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है. जनवरी से जून तक जिले में पिछले 10 वर्षों की सबसे कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि जून का महीना भी पिछले 5 सालों का सबसे सूखा जून साबित हुआ है. ऐसे में किसानों की उम्मीदें अब सिर्फ मानसून पर टिकी हैं.
जैसलमेर में इस बार प्री-मानसून पूरी तरह बेअसर साबित हुआ है. जहां हर साल जून में होने वाली बारिश गर्मी से राहत देने के साथ खरीफ फसलों की तैयारी का रास्ता खोलती थी, वहीं इस बार पूरे जून महीने में केवल 19.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. यह पिछले पांच वर्षों का सबसे सूखा जून है. स्थिति तब और गंभीर नजर आती है जब जनवरी से जून तक के आंकड़ों पर नजर डालते हैं. पूरे छह महीनों में जिले में केवल 35.8 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो पिछले दस वर्षों में इस अवधि की सबसे कम बारिश है.
बारिश नहीं होने से खेत सूने पड़े हैं और किसान आसमान की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं. कृषि मौसम के अनुसार इस बार शुष्क हवाओं का दबाव अधिक रहने और मानसूनी हवाओं को अनुकूल परिस्थितियां नहीं मिलने के कारण प्री-मानसून कमजोर पड़ गया.
वहीं सुपर अल नीनो के प्रभाव से आंधियां तो चलीं, लेकिन बारिश नहीं हो सकी. अब जिले के किसानों, पशुपालकों और आम लोगों की उम्मीदें मुख्य मानसून पर टिकी हैं. यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों की बुवाई, पशुओं के लिए चारे और पेयजल की उपलब्धता पर संकट और गहरा सकता है. ऐसे में पूरे जैसलमेर की निगाहें अब मानसून की अगली दस्तक पर टिकी हुई हैं.