First India न्यूज का 'सामाजिक सरोकारों को समर्पित विशेष' कार्यक्रम, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत बोले- आज गाय हमारी जिम्मेदारी हो गई

जोधपुर: फर्स्ट इंडिया का सामाजिक सरोकारों को समर्पित विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने संबोधित करते हुए कहा कि गाय को विश्व में माता के समान माना जाता. गाय की महत्ता को धर्म के साथ जोड़कर रखा. लेकिन पाश्चात्य संस्कृति के कारण यह ढीली हुई. पूर्व में गाय, हाथी, घोड़ा को धन माना गया. आज गाय हमारी जिम्मेदारी हो गई. लगातार शहरीकरण बढ़ रहा और खेत से लोग दूर हो रहे. यह एक बड़ी चुनौती है. इसलिए गाय को इकोनॉमिकल मजबूत करना पड़ेगा. राज्य सरकार गौ नस्ल सुधारने के लिए ब्राजील से गिर नस्ल का सीरम लाई. हमें यह सोचने की बात है कि यह हमारे लिए गर्व का विषय है या दुर्भाग्य की बात. गिर नस्ल हमारे यहां से ब्राजील गई और आज हम वहां से सीरम मंगवा रहे. अगर गाय को सही रूप में बचाना है तो हमे तकनीक का इस्तमाल करना पड़ेगा. जोराराम कुमावत को सलाह दी. हमें उन्नत नस्ल की गिर गाय के एंब्रियो को ट्रांसफर करने के लिए एक लेब बनानी पड़ेगी. पहले बैलों की उपयोगिता थी लेकिन आज धीरे धीरे उसकी उपयोगिता खत्म हो गई. हमें नंदी को पैदा होने से रोकने के लिए तकनीकी का उपयोग करना पड़ेगा. हमें कुछ नए तरीके से सोचने की आवश्यकता है. 

कार्यक्रम में पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री ओटाराम देवासी ने संबोधित करते हुए कहा कि गाय का घर गौशाला नहीं बल्कि किसान का घर है. यदि किसान मन में यह धारणा बना लेगा कि उसे गाय रखनी है. तो स्वत ही गाय का संरक्षण हो जाएगा. चिकित्सक भी मानते हैं कि गाय के पंचगव्य से कैंसर जैसा असाध्य रोग भी ठीक हो सकता है. पहली बार भाजपा सरकार में 2014 में गौ पालन विभाग बना. हमने सेस लगाकर गौ पालन विभाग के लिए बजट का प्रावधान किया. फर्स्ट इंडिया न्यूज़ की यह पहल सराहनीय है. गाय बचेगी तो हम बचेंगे यही सोच के साथ काम करना होगा. 

उद्योग राज्य मंत्री केके विश्नोई ने संबोधित करते हुए कहा कि आजकल कैंसर, हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियां हो रही है. पीएम ने अपने आवास पर गाय रखकर गौ पालन का संदेश दिया. गाय को गांव और किसान से जोड़ना ही पर्याप्त नहीं है. यदि दिल में भाव हो तो शहरी क्षेत्र में भी गौ पालन हो सकता है. इलाज में पैसा खर्च करने की बजाय गौ पालन और ऑर्गेनिक खेती पर खर्च करेंगे. तो हम बीमारियों से भी बचेंगे और गौ माता का आशीर्वाद मिलेगा. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे. सीएम आवास पर भी प्रतिदिन गौ पूजन होता है. सरकार ने इस बार मानसून सीजन में 10 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है. 

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने संबोधित करते हुए कहा कि अगर धरती पर कोई सबसे ज्यादा पूजनीय है तो वह गौ माता है. उस गौ माता का पालन पोषण एवं संवर्धन की जिम्मेदारी हम सभी की है. जिस तरह से वृक्षों का दोहन हो रहा है, वह चिंताजनक है. आज जयपुर में 11 ऐसे मोक्षधाम तैयार कर रहे हैं. जहां लकड़ियों की जगह गौ कास्ट से अंतिम संस्कार होगा. इससे पेड़ों का संरक्षण होगा. आने वाले समय में प्रदेश के सभी जिलों में इस तरह की मशीन लगाने का प्रयास होगा. पिछले 2 सालों में 20 करोड़ पौधे लगाए गए. इस वर्ष भी हमने 10 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य लिया है. एक पौधे की 3 साल सेवा की जाए तो उसके बाद वह पेड़ कई वर्षों तक हमारी सेवा करेगा. जीवन में एक पेड़ लगाने का संकल्प लेने की आवश्यकता है. प्रकृति का संतुलन बनाने के लिए पेड़ों को उगाने की आवश्यकता है. वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान के तहत सरकार प्राकृतिक जल स्रोतों की सफाई की जा रही है. यह अभियान प्रत्येक व्यक्ति के लिए बहुत उपयोगी है. 

पशुपालन एवं देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने संबोधित करते हुए कहा कि गाय के दूध में 50 से अधिक उत्पाद बनते हैं. जो आम लोगों के दैनिक दिनचर्या में उपयोगी होते हैं. गौ के गोबर से 100 से भी ज्यादा उत्पाद बन रहे है. गौ मूत्र कई बीमारियों में उपयोगी होता है. इसलिए गाय को गौ माता माना गया है. हम सभी को मिलकर गौ संरक्षण करना चाहिए. राज्य सरकार भी इसके लिए लगातार प्रयास कर रही है. हम 1280 करोड़ रुपए का गौ शालाओं को सालाना अनुदान दे रहे है. आज 4500 गौ शालाएं पूरे राजस्थान में चल रही है. नई गौ शालाओं एवं नदी शाला ने निर्माण के लिए अनुदान एवं सहयोग दिया जा रहा है. गौ शालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गौ कास्ट मशीन दी जा रही है. गौ उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए वृहद स्तर पर एक मेला आयोजित करने की योजना है. प्रदेश भर से गौ उत्पाद बनाने वालों को आमंत्रित किया जाएगा. नदियों की संख्या कम करने के लिए विशेष योजना शुरू की गई है. 70 रुपए में सीरम डोज उपलब्ध कराई जा रही है. जिससे 90 प्रतिशत गाय और 10 प्रतिशत नंदी होंगे.     

फर्स्ट इंडिया के सीईओ एवं मैनेजिंग एडिटर पवन अरोड़ा ने संबोधित करते हुए कहा कि यह कोई सामान्य कार्यक्रम नहीं बल्कि वैदिक संस्कृति एवं सनातन चेतना का उत्सव है. हमारे देश में गाय को पशु नहीं बल्कि गाय को मां के समान माना जाता है. पहले हमारी अर्थव्यवस्था कृषि एवं पशुपालन आधारित थी. आज गौ आधारित अर्थव्यवस्था का दौर आया है. राज्य सरकार भी गौ संरक्षण की दिशा में बेहतर काम कर रही है. मुख्यमंत्री स्वयं गौ सेवक एवं गौ पालक हैं. जिनकी दिनचर्या गौ पूजन से शुरू होती है. फर्स्ट इंडिया न्यूज़ ने एक मुहिम शुरू की है हम चाहते हैं कि राजस्थान में हरित क्रांति के साथ फल क्रांति आनी चाहिए. आगामी मानसून सीजन में आधे पौधे फलों के लगाए जाएं. खास तौर पर पिछड़ी बस्तियों में,आंगनबाड़ी केंद्रों में यह पेड़ लगें. ताकि जब फल आए तो उन लोगों को भी इसका लाभ मिल सके.