VIDEO: कप्तान तैयार, टीम का इंतजार! कछुआ चाल से जिला कांग्रेस कमेटियों का हो रहा गठन, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: संगठन सृजन अभियान के जरिए राजस्थान कांग्रेस जिला अध्यक्ष बने हुए करीब 8 माह पूरे हो चुके है. लेकिन 8 माह बीत जाने के बाद भी अभी तक 20 जिलों में नई टीम का गठन नहीं हुआ है. दरअसल जिला अध्यक्षों और विधायकों सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं के बीच तालमेल और अनबन होने जैसे कईं कारणों के चलते किश्तों में कमेटियां बन रही है. अभी 50 में से 30 जिलों की कार्यकारिणी का गठन कछुआ चाल से हो पाया है.

राजस्थान कांग्रेस ने संगठन निर्माण की दिशा में नो डाउट अब तक बेहतरीन काम किया है. लेकिन जैसे ही निचले स्तर पर यह काम निपटाने के बाद जिलों की तरफ बढ़े तो संगठन निर्माण काम थोड़ा स्लो हो गया. संगठन सृजन अभियान के तहत कप्तानों की नियुक्ति तो करीब 8 माह पहले ही हो गई थी. लेकिन अपनी नई टीम के लिए फिर उन्हें करीब 5 माह का  लंबा इंतजार उन्हें करना पड़ा. 20 कप्तान तो अभी भी अपने नई टीम बनने की बाट जोह रहे हैं. आपको बता दे कि राजस्थान कांग्रेस के संगठन के हिसाब से टोटल 50 जिले है. लेकिन अभी तक केवल 30 जिलों में ही कार्यकारिणी बन पाई है.

किस्तों में हो रहा है जिला कांग्रेस कमेटियों का गठन
-अभी तक 50 जिलों में से 30 जिलों की कमेटी का हुआ गठन
-20 जिलों में अभी तक जिला कांग्रेस कमेटी का नहीं हुआ गठन
-संगठन सृजन के जरिए करीब 8 माह पहले बन गए थे जिला अध्यक्ष
-लेकिन नई टीम के गठन के लिए करना पड़ा लंबा इंतजार
-कप्तानों की नियुक्ति के करीब 5 माह बाद शुरु हुआ गठन
-पहले विधानसभा सीटों के हिसाब से 31 और 51 पदाधिकारी रखने के राइडर से हुई देरी
-फिर जिला अध्यक्षों और वरिष्ठ नेताओं में तालमेल नहीं होने से हो गई देरी
-कईं अध्यक्षों ने विधायकों को ओवरटेक करते हुए भेज दी लिस्ट
-फिर प्रदेश नेतृत्व ने अपने स्तर पर विधायकों से अलग से मंगवाई सूची
-हर विधायक से 7-7 नामों की मांगी गई सूची
-फिर नामों की स्क्रूटनी और क्रॉस चेकिंग करने के चलते हो गई देरी

जिला कांग्रेस कमेटियों का गठन जल्द नहीं होने के चलते फिर कप्तानों को पुरानी टीम से ही काम चलाना पड़ा. लेकिन पुराने पदाधिकारियों ने हटाने की आहट के चलते संगठन कामकाज में बिल्कुल रुचि नहीं दिखाई. जिसके चलते जिलों में संगठन की गतिविधियां बहुत प्रभावित होने लगी. इसी बीच.फिर दिल्ली से छोटी कार्यकारिणी रखने की अचानक नई गाइडलाइन आ गई. तीन विधानसभा सीट वाले जिले में 31 और तीन से ज्यादा विधानसभा सीट वाले जिलों में 51 पदाधिकारी बनाने के नए नियम के चलते जिला अध्यक्षों को सूची बनाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी. क्योंकि छोटी कार्यकारिणी के चलते जातिगत औऱ सियासी समीकरण साधना टेढ़ा हो गया था. नई गाइडलाइन के बाद जब सूचियां बनाने का काम शुरु हुआ था तो विधायकों सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं से तालमेल बिगड़ गया.

जिला अध्यक्षों औऱ सीनियर लीडर्स के विवाद को देखते हुए फिर पीसीसी चीफ ने दखल दिया. रास्ता निकाला गया विधायक सीधे पीसीसी को अपने नामों की सूची भेजें. ऐसे में डबल मेहनत होने के चलते कार्यकारिणी गठन का काम फिर कछुआ चाल हो गया. अब कभी दो तो कभी चार ऐसे किश्तों में सूचियां निकाली जा रही है. अब देखना है शेष 20 जिलों की नई टीम के गठन में कितना वक्त और लगता है.