जयपुरः राजस्थान के पहले राज्यपाल महाराजा सवाई राजा मानसिंह से लेकर हरिभाऊ बागडे तक,राजस्थान के पहले विधानसभा अध्यक्ष नरोत्तम लाल जोशी से लेकर वासुदेव देवनानी, राजस्थान के पहले मुख्यमंत्री हीरालाल शास्त्री से लेकर भजन लाल शर्मा तक ,राजस्थान विधानसभा के पहले नेता प्रतिपक्ष जसवंत सिंह से लेकर टीकाराम जूली तक. 75वर्षों का सफर मरुभूमि की विधानसभा को ऐतिहासिक बनाता हैं. जिसने सुखाड़िया और शेखावत का लंबा युग देखा.
राजस्थान विधानसभा का स्वर्णिम इतिहास रहा है. इसी विधानसभा के दो सदस्य भैरों सिंह शेखावत और जगदीप धनखड़ देश के उप राष्ट्रपति पद तक पहुंचे , इसी विधानसभा के सदस्य ओम बिरला आज लोकसभा अध्यक्ष के गरिमामय पद पर है. राज्य की सबसे बड़ी पंचायत ने राजस्व सुधार, कृषि कानूनों और सामाजिक क्रान्ति की दिशा में अहम योगदान दिया. राजस्थान में विधानसभा का गठन भले ही मार्च 1952 में हुआ, लेकिन यहां के लोग राजशाही शासनकाल में भी संसदीय लोकतंत्र से परिचित थे.राजस्थान विधानसभा का पहली बार उद्घाटन 31 मार्च 1952 को हुआ था. उस दौर में विधानसभा सदस्यों की संख्या 160 थी.
--विधानसभा का गठन और ऐतिहासिक तथ्य ---
अजमेर का विलय
1956 में तत्कालीन अजमेर रियासत के राजस्थान में विलय के बाद 1957 में सदस्यों की संख्या बढ़ाई गई दूसरी विधानसभा (1957-62) और तीसरी विधानसभा (1962-67) विधानसभाओं में सदस्य संख्या 176 थी
चौथी विधानसभा (1967-72) और पांचवीं विधानसभा (1972-77) विधानसभा में 184 सदस्य थे.l
छठी विधानसभा 1977-80 से सदस्य संख्या 200 हो गई जो अब तक जारी है
राजस्थान विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव अंतिम बार 1985 में तत्कालीन हरिदेव जोशी सरकार के खिलाफ लाया गया था
गहलोत लेकर आए थे अपनी सरकार के पक्ष मे आखिरी बार विश्वास प्रस्ताव
प्रदेश में अब तक 13 बार अविश्वास प्रस्ताव लाया जा चुका है
और करीब 5 बार विश्वास प्रस्ताव
राजस्थान विधानसभा ने सती प्रथा को रोकने के लिए सती (निवारण) अधिनियम, 1987 पारित किया
यह ऐतिहासिक बिल था
अधिनियम 4 सितंबर, 1987 को रूप कंवर सती कांड के बाद लागू किया गया था
सबसे पहले राजस्थान विधानसभा का पुराना भवन जयपुर के चारदीवारी क्षेत्र में स्थापित हुआ था.. जिसे अब सवाई मान सिंह टाउन हॉल कहा जाता है, 1952 से 1990 के दशक तक यही राज्य का विधानसभा भवन रहा ..आगे चलकर विधानसभा को सचिवालय के पास लाया गया ..नया विधानसभा भवन देश की सबसे बड़ी
आधुनिक विधानसभा है.राजस्थान विधानसभा का वर्तमान नया भवन बिना किसी औपचारिक उद्घाटन समारोह के ही शुरू हो गया था.. 25 फरवरी 2001 को तत्कालीन राष्ट्रपति के.आर. नारायणन द्वारा किया जाना था, लेकिन वे बीमारी के कारण नहीं आ सके, और तब से यह भवन बिना किसी औपचारिक उद्घाटन के ही कार्य कर रहा है..जब यह नया भवन शुरू हुआ..राजस्थान विधानसभा के नए भवन की आधारशिला 12 नवंबर 1994 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव द्वारा रखी गई थी..इस नए भवन के निर्माण की पहल में उस समय के राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष हरिशंकर भाभड़ा का महत्वपूर्ण योगदान रहा..वे 1993 से 1998 तक राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष रहे थे..उनके कार्यकाल में ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाया गया.10अगस्त 1994 का स्वर्णिम दिन था जब विधानसभा के मौजूदा भवन का शिलान्यास किया तात्कालीन सीएम भैरों सिंह शेखावत और तत्कालीन स्पीकर हरिशंकर भाभडा ने..कहा जाता है कि हरिशंकर भाभडा की नए भवन के पीछे महत्वपूर्ण पहल रही...जब नया भवन बना तो परसराम मदेरणा ने नए भवन के अध्यक्ष की बागडोर संभाली.11वीं विधानसभा का पाँचवाँ सत्र, 6 नवंबर 2000 को सवाई मान सिंह टाउन हॉल में आयोजित अंतिम सत्र था..इस परियोजना पर काम नवंबर 1994 में शुरू हुआ और मार्च 2001 में पूरा हुआ वर्तमान में, राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी हैं.
-- राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष --
नरोत्तम लाल जोशी
राजस्थान विधानसभा के प्रथम अध्यक्ष
राम निवास मिर्धा
मिर्धा ने दो बार अध्यक्ष का पद संभाला
मिर्धा दस वर्षों की अवधि तक सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रहे हैं
निरंजन नाथ आचार्य
राम किशोर व्यास
लक्ष्मण सिंह गोपाल सिंह
पूनम चन्द विश्नोई
हीरा लाल देवपुरा
गिरिराज प्रसाद तिवाड़ी
हरिशंकर भाभड़ा
शांति लाल चपलोत
समरथ लाल मीणा
परसराम मदेरणा
सुमित्रा सिंह
सुमित्रा सिंह राजस्थान विधानसभा की पहली महिला अध्यक्ष रही
दीपेन्द्र सिंह शेखावत
कैलाश चन्द्र मेघवाल
डॉ सीपी जोशी
वासुदेव देवनानी
वर्तमान अध्यक्ष है वासुदेव देवनानी
मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी नवाचारों के लिए चर्चित है. चाहे कारगिल शौर्य वाटिका हो या फिर पेपर लेस विधानसभा. हर्बल वाटिका, डिजिटल म्यूजियम का अपग्रेडेशन हो या फिर ज्योतिष आधार पर तैयार की वाटिका.राजस्थान की संस्कृति और इतिहास के आधार पर सदन के द्वारों का नामकरण बड़ी पहल रही. डिजिटल और हर विधायक की सीट पर आई पैड लगाना बड़ी पहल रही देवनानी की. नव संवत्सर से विधानसभा की डायरी की शुरुआत. देवनानी के काल खंड में ही सदन के कारपेट का रंग ग्रीन से पिंक हो गया.75 सालों के सफर में कई अविस्मर्णीय पल है जिन्हें जानने की जरूरत है. ये तथ्य कम ही लोगों को पता होगा कि साल 1961 के 23 फरवरी के दिन राजस्थान के राज्यपाल एक परम्परा नहीं निभा पाए. तत्कालीन राज्यपाल गुरुमुख निहाल सिंह ने अपना अभिभाषण विधानसभा के सदन में पढ़ने के बजाए राजभवन में पढ़ा. इसके पीछे कारण था सरदार गुरुमुख निहाल सिंह का स्वास्थ्य. इतना ही नहीं 1956 का वो चित्रभीअंकित जब सरदार गुरुमुख निहाल सिंह ने विधानसभा में अभिभाषण भी पढ़ा था.
राजस्थान विधानसभा उस गौरव की साक्षी भी बनी जब प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 1952 में पुरानी विधानसभा में यहां के विधायकों को संबोधित किया था.
जयपुर का परकोटा साक्षी रहा है पुरानी विधानसभा का. 1952 से लेकर 2000 तक विधानसभा की कार्यवाहीं गुलाबी शहर के टाउन हॉल में चलती. पुरानी विधानसभा साक्षी रही है सुखाड़िया और शेखावत युग की. आज देश नारी शक्ति वंदन अधिनियम की चर्चा. राजस्थान की विधानसभा तो नारी सशक्तिकरण की साक्षी रही है. एक दौर रहा जब राज्यपाल थी प्रतिमा देवी सिंह पाटिल ,विधानसभा अध्यक्ष थी सुमित्रा सिंह और राज्य की मुख्यमंत्री थी वसुंधरा राजे. कम लोग जानते है कि राजस्थान विधानसभा देश दुनिया के सबसे चर्चित वक्ता अटल बिहारी वाजपेयी के भाषणों से सराबोर हो चुकी.साल 1991 के अगस्त में विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों के प्रबोधन कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अटल बिहारी वाजपेयी थे. स्वर्णिम इतिहास का गौरवपूर्ण क्षण वो भी है जब राजस्थान विधानसभा के रजत जयंती वर्ष पर राज्यसभा के तत्कालीन उपसभापति रामनिवास मिर्धा ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया था.आज राजस्थान की विधानसभा अपने अमृत काल में है स्वागत और सम्मान किया जा रहा उन विभूतियों का जिन्होंने विधानसभा के अतीत और वर्तमान को करीब से देखा
-- अमृत काल में सम्मान --
छह या इससे अधिक बार के पूर्व विधायकगणों में
9बार की विधायक 96वर्षीय सुमित्रा सिंह
8बार के विधायक 82 वर्षीय गुलाब चन्द कटारिया
89 वर्षीय 8बार के विधायक प्रद्युम्न सिंह
92 वर्षीय 7 बार के विधायक नारायण सिंह
80 साल के 7 बार के विधायक देवी सिंह भाटी
71 वर्षीय 7 बार के विधायक राजेन्द्र राठौड़
92 वर्षीय 6 बार के विधायक कैलाश चन्द मेघवाल
87 वर्षीय 6 बार के विधायक फतेह सिंह
78 साल के 6बार घनश्याम तिवाड़ी
78 साल के 6 बार के विधायक हेमाराम चौधरी
76 वर्षीय 6 बार के विधायक डॉ. बी.डी. कल्ला
76 वर्षीय 6बार के विधायक महादेव सिंह खंडेला
75 साल के 6 बार के विधायक परसराम मोरदिया
75 वर्षीय 6बार विधायक परसादीलाल मीणा 75 वर्ष को सम्मानित किया जायेगा
--सात पूर्व विधानसभा अध्यक्षों का भी सम्मान होगा--
पूर्व विधान सभा अध्यक्षों में शांतिलाल चपलोत
सुमित्रा सिंह, दीपेन्द्र सिंह शेखावत, कैलाश चन्द मेघवाल डॉ. सी.पी. जोशी,
पूर्व उपाध्यक्षों में तारा भण्डारी, रामनारायण मीणा और राव राजेन्द्र सिंह को सम्मानित किया जायेगा
--वर्तमान विधायक भी होंगे सम्मानित --
8 बार के विद्यार्थ कालीचरण सराफ
7 बार के विधायक डॉ. दयाराम परमार
7 बार के विधायक प्रताप सिंह सिंघवी
6 बार के राजेन्द्र पारीक
6 बार के विधायक अशोक गहलोत
6बार के विधायक डॉ. किरोड़ी लाल मीणा
6बार की विधायक वसुन्धरा राजे
6 बार के विधायक श्रवण कुमार
6 बार के विधायक मदन दिलावर
6 बार के विधायक पुष्पेन्द्र सिंह बाली
ये दुर्लभ बात है कि विधानसभा के सदस्य रह चुके 100साल के पंडित रामकिशन आज भी हमारे बीच हैं. विधानसभा के इतिहास में ये भी उदाहरण कम ही हैं जब पहली बार बने विधायक भजनलाल शर्मा मुख्यमंत्री बनकर सदन के नेता बन गए. ये वो विधानसभा भी है जब सदन के सत्र के दौरान सर्वेश्रेष्ठ बोलने वाले विधायक को लड्डू खिलाने की परंपरा रही हैं चाहे वो विपक्ष का हो या सत्तापक्ष का. अमृत महोत्सव के उद्घाटन सत्र में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे, जबकि समापन समारोह में राज्यसभा के सभापति और भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि होंगे.