जयपुरः राजस्थान में खिलाड़ियों के सपनों को सबसे बड़ी चुनौती अब मैदान में प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि कोचों की कमी बनती जा रही है. राज्य खेल परिषद में वर्षों से भर्ती नहीं हुई है. हालात ये हैं कि 41 जिलों और 50 से अधिक खेल संघों वाले प्रदेश में खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने के लिए महज 56 कोच हैं. ऐसे में खिलाड़ियों की तैयारी और प्रदेश के खेल भविष्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
ये तस्वीरें सिर्फ सूने खेल मैदानों की नहीं. बल्कि उन अधूरे सपनों की भी हैं, जो बेहतर कोचिंग के इंतजार में ठहर गए हैं. राजस्थान में 2012 के बाद से राज्य खेल परिषद में एक भी नियमित कोच की भर्ती नहीं हुई. नतीजा ये है कि पूरे प्रदेश में खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने के लिए सिर्फ 56 कोच हैं, जबकि जिले 41 और खेल संघ 50 से ज्यादा हैं. कोचों की कमी का सबसे ज्यादा असर खिलाड़ियों की तैयारी पर पड़ रहा है. कई जगह खिलाड़ी बिना विशेषज्ञ मार्गदर्शन के अभ्यास करने को मजबूर हैं. तकनीकी खेलों में छोटी-सी गलती भी प्रदर्शन और करियर दोनों पर भारी पड़ सकती है.
पूरे राजस्थान में खेल परिषद के पास है महज 56 कोच
प्रथम ग्रेड के सिर्फ पांच कोच है खेल परिषद के पास
पांच में से तीरंदाजी के दो तथा कुश्ती, क्रिकेट व एथलेटिक्स का एक-एक कोच
द्वितीय ग्रेड के 13 कोच से काम चला रहा है खेल परिषद
ज्यादा कोच वॉलीबॉल, फुटबॉल, हॉकी व तैराकी के है इनमें
तृतीय ग्रेड के 38 कोच तैनात है पूरे प्रदेश में विभिन्न खेलों के
शिवचरण माली जब खेल परिषद के अध्यक्ष थे तब 2012 में आखिरी बार भर्ती हुई थी
तब से लेकर अब खेल परिषद में एक भी स्थाई कोच की भर्ती नहीं हुई
मौजूदा सरकार के समय 140 कोच की स्थाई भर्ती की बात चली थी
कर्मचारी चयन बोर्ड को पूरा मसौदा भी भेजा गया था, लेकिन अभी भर्ती नहीं हुई
पहले हर जिले के लिए एक खेल अधिकारी होता था
लेकिन अब पूरे प्रदेश में महज दो ही खेल अधिकारी बचे हैं
राजस्थान में 50 से अधिक खेल सक्रिय रूप से खेले जाते हैं
लेकिन कई खेल के तो खेल परिषद के पास एक भी कोच नहीं है
सिर्फ कोच ही नहीं. खेल प्रशासन भी स्टाफ की कमी से जूझ रहा है. पूरे प्रदेश में खेल अधिकारियों के सिर्फ दो पद भरे हैं और उनमें से भी एक अधिकारी लिंबाराम लंबे समय से बीमार हैं. हालात सुधारने के लिए 500 अनुबंधित कोच रखने की योजना बनाई गई थी, लेकिन अप्रैल से ये पद भी खाली पड़े हैं. सबसे बड़ी बात ये कि अब तक इन पदों के लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो सकी है. सरकार ने घोषणा की थी कि इस बार 500 नहीं बल्कि 700 कोच अनुबंध पर रखे जाएंगे, लेकिन फाइल पता नहीं कहां उलटफेर का शिकार होती जा रही है. पिछले साल कोच अनुबंध पर रखे थे, लेकिन 31 मार्च को अनुबंध खत्म हो गए. अब नए सिरे से कोच की नियुक्ति हुई ही नहीं. जब देश और दुनिया में खेलों में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है, तब राजस्थान के खिलाड़ी बुनियादी कोचिंग के लिए संघर्ष कर रहे हैं. सवाल सिर्फ खाली पदों का नहीं, बल्कि उन खिलाड़ियों के भविष्य का है जो अपने दम पर प्रदेश और देश का नाम रोशन करना चाहते हैं. एक तरफ सरकार खेलों में बेहतर प्रदर्शन और पदकों की बात करती है, लेकिन दूसरी तरफ मैदानों में कोचों की भारी कमी खिलाड़ियों की राह मुश्किल बना रही है. अब नजर इस बात पर है कि वर्षों से खाली पड़े पद कब भरते हैं और 500 अनुबंधित कोचों की भर्ती आखिर कब शुरू होती है.