जयपुरः दिल्ली के होटल और लखनऊ के कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. इन दर्दनाक हादसों में करीब तीन दर्जन छात्रों और अन्य लोगों की जान चली गई, जिसने सिस्टम की लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी. इसी मुद्दे को लेकर फर्स्ट इंडिया की टीम जब ग्राउंड पर उतरी और रियलिटी चेक किया तो सामने आई तस्वीर ने एक बार फिर प्रशासन की नींद उड़ा दी. जयपुर जैसे बड़े कोचिंग हब में सुरक्षा इंतजामों की हालत बेहद चिंताजनक पाई गई. लेकिन इस खुलासे के बाद आखिरकार लंबे समय से सोया हुआ नगर निगम का सिस्टम जागा और राजधानी में बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू हुई.
कोचिंग संस्थानों पर निगम का बडा शिकंजा
फायर शाखा ने एक दर्जन से अधिक कोचिंग संस्थानों को किया सीज
क्लास-24,करियर विल,अरावली क्लासेज,मेड गुरू,वीजीपी क्लासेज
एएसपी क्लासेज को नगर निगम की फायर शाखा ने किया सीज
देश की राजधानी दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तक हालिया आग की घटनाओं ने यह साफ कर दिया कि शिक्षा संस्थानों और व्यावसायिक भवनों में सुरक्षा मानकों का पालन गंभीरता से नहीं किया जा रहा है.लखनऊ के अलीगंज इलाके में कोचिंग सेंटर में लगी आग में कम से कम 15 छात्रों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई छात्र अपनी जान बचाने के लिए बिल्डिंग से कूदने को मजबूर हो गए. इन घटनाओं ने देशभर के प्रशासन को सतर्क कर दिया, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह जागरूकता स्थायी होगी या कुछ दिनों बाद फिर वही लापरवाही लौट आएगी,फर्स्ट इंडिया की टीम ने जब जयपुर के कोचिंग हॉटस्पॉट इलाकों गोपालपुरा बाईपास, त्रिवेणी, रिद्धि सिद्धि, गुर्जर की थड़ी, सोडाला, महेश नगर, मानसरोवर और सिविल लाइंस में रियलिटी चेक किया तो कई कोचिंग संस्थान बिना फायर NOC और जरूरी सुरक्षा उपकरणों के संचालित होते पाए गए.यह स्थिति तब सामने आई जब इन संस्थानों में रोजाना सैकड़ों छात्र पढ़ने आते हैं.रियलिटी चेक के बाद हरकत में आए नगर निगम की फायर शाखा ने शहरभर में अभियान चलाया और कई कोचिंग संस्थानों व लाइब्रेरी को सीज कर दिया.जिन संस्थानों के पास फायर NOC नहीं था या सुरक्षा उपकरण मौजूद नहीं थे, उन्हें तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया.पहले भी जांच में यह सामने आया था कि फायर सेफ्टी के नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों को सीज किया गया था, क्योंकि यह छात्रों की जान के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं.
निगम की कार्रवाई के दौरान दो ऐसे कोचिंग संस्थान भी सामने आए, जहां छात्र क्लास में पढ़ाई कर रहे थे. निगम की टीम ने तुरंत क्लास रुकवाकर छात्रों को बाहर निकाला और वहीं सीलिंग की कार्रवाई कर दी.इस कार्रवाई ने यह दिखा दिया कि खतरा कितना बड़ा था और प्रशासन कितनी देर से जागा.निगम की इस अचानक कार्रवाई का कुछ कोचिंग संचालकों ने विरोध भी किया. उनका कहना था कि उन्हें पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया और सीधा कार्रवाई कर दी गई.कुछ संचालकों ने यह भी कहा कि उन्होंने पहले ही फायर NOC के लिए आवेदन कर रखा है, इसके बावजूद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई.हालांकि प्रशासन का तर्क साफ है जब तक सुरक्षा मानकों का पालन नहीं होगा, तब तक संचालन की अनुमति नहीं दी जा सकती.कार्रवाई की खबर मिलते ही कई कोचिंग संचालक अपने संस्थान पर ताला लगाकर मौके से रवाना हो गए. लेकिन नगर निगम की टीम ने ऐसे संस्थानों को भी नहीं छोड़ा और उन्हें भी सीज किया गया, जिससे यह साफ हो गया कि इस बार प्रशासन सख्ती के मूड में है.अचानक हुई कार्रवाई के चलते कई इलाकों में सड़कों पर छात्रों की भीड़ उमड़ पड़ी.कई छात्र असमंजस की स्थिति में दिखे कि उनकी पढ़ाई अब कैसे होगी, लेकिन साथ ही यह भी सवाल उठता रहा कि क्या यह असुविधा उनकी सुरक्षा से ज्यादा बड़ी हैजयपुर देश के बड़े कोचिंग हब में शामिल है, जहां हर साल हजारों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं.ऐसे में यहां सुरक्षा व्यवस्था का मजबूत होना बेहद जरूरी है.जांच में यह भी सामने आया कि कई संस्थानों में आपातकालीन निकास द्वार तक नहीं हैं और अग्निशमन उपकरण या तो नहीं हैं या काम नहीं कर रहे. यह कहना गलत नहीं होगा कि नगर निगम की यह कार्रवाई “देर आए दुरुस्त आए” वाली है. अगर यह सख्ती पहले दिखाई जाती, तो शायद देश के अन्य शहरों में हुए हादसों से पहले ही सबक लिया जा सकता था.
दिल्ली और लखनऊ की आग ने जो दर्दनाक सबक दिया है, उसे नजरअंदाज करना अब संभव नहीं है. जयपुर में निगम की कार्रवाई ने यह जरूर दिखा दिया कि अगर प्रशासन चाहे तो हालात बदले जा सकते हैं.लेकिन असली चुनौती यह है कि क्या यह अभियान लगातार जारी रहेगा या फिर कुछ दिनों बाद सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा. क्योंकि सवाल केवल कार्रवाई का नहीं है, बल्कि हजारों छात्रों की जिंदगी का है, उनके सपनों का है. और उन परिवारों का है जो अपने बच्चों को सुरक्षित भविष्य की उम्मीद में इन कोचिंग संस्थानों तक भेजते हैं.