VIDEO: राजस्थान विधानसभा का नया स्वरूप, नए भवन के लिए मार्च में बजट हो जाएगा पास, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: राजस्थान में 2026 के बाद होने वाले परिसीमन के बाद विधानसभा सीटों की संख्या में वृद्धि होना लगभग तय है. वर्तमान में विधानसभा में 200 सीटें हैं, लेकिन जनसंख्या वृद्धि के आधार पर भविष्य में यह संख्या बढ़ सकती. तकरीबन 266 सीट हो सकती है राजस्थान विधानसभा में. विधानसभा सचिवालय उसी अनुसार नया भवन बना रहा..इस साल मार्च में बजट पास होने के बाद अगले साल से कार्य शुरू हो जाएगा. मौजूदा भवन में 260 सीटो की व्यवस्था है.एक तिहाई सीटों पर महिला आरक्षण की व्यवस्था भी लागू हो सकता है.

राजस्थान विधानसभा की इमारत देश की विशालतम विधान भवनों में शुमार है. विधानसभा हॉल की बैठक क्षमता 260 सदस्यों की है और ठीक इसी क्षमता का एक और हॉल इसके ऊपर पांचवीं मंजिल पर भविष्य की विधान परिषद के लिए बनाया गया है. इसे विकसित किया जा रहा है. भविष्य के संभावित परिसीमन, विधानपरिषद गठन और कार्यक्रमों के मद्देनजर. करीब 17एकड़ में फैला विधानसभा परिसर मार्च 2001में पूरी तरह बनकर तैयार हुआ था. विधानसभा के पांचवें तल पर संसद की तर्ज पर एक नया सेंट्रल हॉल, ऑडिटोरियम और 3D पेंटिंग्स विकसित की जा रही हैं. इसका उपयोग युवा संसद, राष्ट्रमंडल संसदीय संघ द्वारा होने वाली कार्यशाला, सेमिनार बैठक और संगोष्ठियों के साथ पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के लिए भी उपयोग किया जाएगा. 

भविष्य में प्रदेश में विधान परिषद का निर्माण होता है, तो उसके लिए भी यह केंद्र हॉल कारगर साबित होगा  विधान परिषद को लेकर भी मांग उठती रहती है. उसके पीछे कारण भी है केंद्र और राज्य दोनों जगह एक ही दल की सरकार है. पिछली गहलोत सरकार के समय विधान सभा ने विधान परिषद के गठन की प्रतिबद्धता दिखाई गई थी लेकिन गठन नहीं हो पाया था, जबकि राज्य की विधानसभा की इमारत में विधान परिषद भवन बनकर तैयार है. तकरीबन 14 सालों से केंद्र के पास प्रस्ताव अटका पड़ा है. राज्य की विधानसभा ने विधान परिषद को लेकर सर्व सम्मत प्रस्ताव पारित किया था. विधानपरिषद बनता है तो बीजेपी और कांग्रेस के कई दिग्गज नेता MLC बन सकते है. खास बात है भवन बनकर तैयार है.

--- राजस्थान में आखिर क्यों जरूरी है विधान परिषद ---
-क्षेत्र फल के आधार पर राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य
- राजस्थान के कुछ जिले तो देश के कुछ छोटे राज्यों के बराबर है
-जाति और क्षेत्रीय अनुपात को बैलेंस करने सियासी कारणों के मद्देनजर विधान परिषद की आवश्यकता
- विधान परिषद बनने से राज्य के प्रतिभा संपन्न और गुणी लोग कानून बनाने में अपनी प्रत्यक्ष भूमिका निभा सकेंगे जो चुनाव लड़कर आने की स्थिति में नहीं है

--- बीजेपी के वो चेहरे जो विधानपरिषद के संभावित दावेदार ---
राजेंद्र राठौड़ 
ओंकार सिंह लखावत 
सतीश पूनिया 
कैलाश चौधरी
नारायण पंचारिया 
कनक मल कटारा
लाल चंद कटारिया
निहाल चंद मेघवाल
ज्योति मिर्धा
गौरव वल्लभ
प्रभुलाल सैनी 
जसवंत सिंह विश्नोई 
रामलाल शर्मा 
अलका सिंह गुर्जर
रिछपाल मिर्धा
रामहेत यादव
चंद्र कांता मेघवाल
रंजीता कोली
मनोज राजोरिया

--- कांग्रेस के वो चेहरे जो विधानसभा परिषद के सम्भावित दावेदार ---
डॉ सीपी जोशी
भंवर जितेंद्र सिंह 
रघुवीर सिंह मीणा
महेंद्रजीत मालवीय
डॉ चंद्रभान
डॉ रघु शर्मा 
ममता भूपेश
प्रताप सिंह खाचरियावास
डॉ राजकुमार शर्मा 
रामलाल जाट
धीरज गुर्जर
साफिया जुबेर

चुनाव में पराजित नेताओं के अलावा कई दियाग ऐसे है जो संगठन में सक्रिय है और बड़े नाम है. विधान परिषद बनने पर इन्हें भी अवसर मिलेगा. बीजेपी में विचार परिवार को तवज्जो मिलेगी तो कांग्रेस में कुशल संगठन कर्ताओं को. बहरहाल राजस्थान की विधानसभा नए सेंट्रल हाल के लिए तैयार है. रेप्लिका का अर्थ है स्पीकर वासुदेव देवनानी का नया विजन जो भविष्य का संकेत भी है.