जयपुर: निजी रंजिश निकालने या निर्दोष लोगों को झूठे मामलों में फंसाने के लिए बलात्कार, लूट अथवा अन्य गंभीर अपराधों की मनगढ़ंत एफआईआर दर्ज कराने वालों के खिलाफ राजस्थान पुलिस ने बड़ा अभियान छेड़ दिया है. पुलिस को गुमराह करने और न्याय व्यवस्था का दुरुपयोग करने वाले ऐसे लोगों पर अब कानून का शिकंजा लगातार कस रहा है. DGP राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष विधिक अभियान के तहत राजस्थान पुलिस की प्रभावी पैरवी का परिणाम यह रहा कि 1 जून से 28 जून 2026 के बीच प्रदेशभर में 75 मामलों में न्यायालयों ने झूठी शिकायत करने वालों को दोषी ठहराते हुए सजा और आर्थिक जुर्माना लगाया. वहीं 1,870 मामलों में अदालतों ने संज्ञान लेकर झूठी शिकायतकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा चलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (अपराध) बिपिन कुमार पांडे ने बताया कि जब पुलिस जांच में किसी प्रकरण को झूठा पाती है तो संबंधित न्यायालय में रिपोर्ट प्रस्तुत करती है. इसके बाद न्यायालय ऐसे मामलों में विधिक कार्रवाई शुरू करता है.
इस अभियान का उद्देश्य न केवल झूठे मुकदमों पर रोक लगाना है, बल्कि निर्दोष लोगों को अनावश्यक कानूनी परेशानियों से बचाना और पुलिस संसाधनों का दुरुपयोग रोकना भी है. झूठे मुकदमे दर्ज कराने वालों के खिलाफ न्यायालय में सबसे अधिक कार्रवाई कराने में नागौर जिला पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर रहा, जहां 292 नए मामलों में अदालत ने संज्ञान लिया. इसके बाद जयपुर ग्रामीण में 247, अलवर में 212, जयपुर दक्षिण में 139, कोटपुतली-बहरोड़ में 120, हनुमानगढ़ में 110, जयपुर पश्चिम में 71 तथा जयपुर उत्तर में 59 मामलों में कानूनी कार्रवाई शुरू हुई.
कोर्ट से दोषियों को सजा दिलाने में हनुमानगढ़ पुलिस सबसे आगे रही, जहां 18 मामलों में अदालत ने दोषियों को सजा और जुर्माना सुनाया. प्रतापगढ़ में 9, जयपुर ग्रामीण में 6, कोटा शहर में 5, अलवर, बांसवाड़ा और ब्यावर में 4-4, सवाई माधोपुर में 3, जबकि जयपुर दक्षिण, धौलपुर, झुंझुनूं, डूंगरपुर, सिरोही, झालावाड़ और भीलवाड़ा में 2-2 मामलों में अदालत ने दोषियों के खिलाफ सख्त फैसला सुनाया. वहीं बीकानेर, चूरू और जीआरपी अजमेर में भी एक-एक मामले में दोषियों को सजा मिली. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जमीन विवाद, पैसों के लेन-देन या आपसी रंजिश के चलते कई लोग झूठे मुकदमे दर्ज कराकर पुलिस और न्याय व्यवस्था का दुरुपयोग करते हैं.
इससे पुलिस का बहुमूल्य समय और संसाधन व्यर्थ होते हैं, जबकि वास्तविक पीड़ितों को समय पर न्याय मिलने में देरी होती है. पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी जो कोई झूठे साक्ष्य गढ़ेगा या झूठी एफआईआर दर्ज कराएगा, उसके खिलाफ न्यायालय के माध्यम से त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी. राजस्थान पुलिस का यह अभियान झूठे मुकदमों पर अंकुश लगाने और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.