11 अक्टूबर से आरंभ होगी शारदीय नवरात्रि, जानिए कलश स्थापना की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

11 अक्टूबर से आरंभ होगी शारदीय नवरात्रि, जानिए कलश स्थापना की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

 जयपुर: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है. मां दुर्गा की उपासना का पर्व साल में चार बार आता है. जिसमें दो गुप्त नवरात्रि और दो चैत्र व शारदीय नवरात्रि होती है. शारदीय नवरात्रि अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होती है. रविवार 11 अक्टूबर से देवी दुर्गा का नौ दिवसीय पर्व नवरात्रि शुरू हो रहा है. पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर - जोधपुर  के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ अनीष व्यास ने बताया कि इस वर्ष शारदीय नवरात्रि पूरे 9 दिनों का होगा.  इस वर्ष शारदीय नवरात्रि का आरंभ रविवार 11 अक्टूबर 2026 से हो रहा है.

देवी भागवत पुराण में बताया गया है कि महालया के दिन जब पितृगण धरती से लौटते हैं तब मां दुर्गा अपने परिवार और गणों के साथ पृथ्वी पर आती हैं. अश्विन माह में पड़ने वाली शारदीय नवरात्रि का पर्व काफी धूमधाम से मनाया जाता है. इसमें मां दुर्गा की प्रतिमाएं विराजित की जाती है. साथ ही कई स्थानों पर गरबा और रामलीलाओं का आयोजन किया जाता है. इस 9 दिन के महापर्व के पहले दिन घटस्थापना की जाती है और मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा भी की जाती है. नवरात्रि के नौ दिनों में व्रत भी रखा जाता है. पूरे नियमों के साथ मां दुर्गा की आराधना की जाती है.
 
ज्योतिषाचार्य डॉ अनीष व्यास ने बताया कि हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है. मां दुर्गा की उपासना का पर्व साल में चार बार आता है. जिसमें दो गुप्त नवरात्रि और दो चैत्र व शारदीय नवरात्रि होती है. शारदीय नवरात्रि अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होती है. नवरात्रि की शुरुआत रविवार 11 अक्टूबर 2026 से होगी. 20 अक्टूबर 2026 को नवरात्रि समाप्त होगी. वहीं 20 अक्टूबर विजयादशमी या दशहरा का पर्व मनाया जाएगा. वैदिक पंचांग के अनुसार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का आरंभ 10 अक्तूबर को रात 9:19 मिनट से होगा. प्रतिपदा तिथि का समापन 11 अक्तूबर को रात 9:30 मिनट पर होगा. उदयातिथि के अनुसार शारदीय नवरात्रि का आरंभ 11 अक्तूबर 2026 से होगा. 

नवरात्रि तिथि
ज्योतिषाचार्य डॉ अनीष व्यास ने बताया कि पंचांग की गणना के अनुसार आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि 10 अक्तूबर की रात लगभग 9:19 मिनट पर शुरू होगी और 11 अक्तूबर की रात 9:30 मिनट तक रहेगी. हिंदू परंपरा में उदया तिथि को मान्यता दी जाती है, यानी जिस तिथि में सूर्योदय होता है वही पूरे दिन मान्य मानी जाती है. इसी कारण नवरात्रि का पहला दिन 11 अक्तूबर को होगा. इसके बाद अगले नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की क्रमवार पूजा की जाएगी.

कलश स्थापना शुभ मुहूर्त
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ अनीष व्यास ने बताया कि आश्विनशुक्ल प्रतिपदा 11 अक्टूबर (रविवार) को शारदीय नवरात्र का आरम्भ हो रहा है. देवीपुराण में द्विस्वभाव लग्न युक्त प्रातः काल में देवी का आह्वान एवं घटस्थापना पूजन कर विधान है. इस दिन चित्रा नक्षत्र रात्रि 10:32 तक एवं वैधृति योग रात्रि 09:05 तक है. प्रतिपदा के दिन चित्रा नक्षत्र व वैधति योग या दोनों में से कोई एक भी सम्पूर्ण दिन व्याप्त रहे तो अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना करनी चाहिए. 

सम्पूर्णा प्रतिपदेव चित्रायुक्ता यदा भवेत्. वैभूत्या युक्ता स्यात्तदा मध्यदिने रखौ. अभिजित्नु मुहूर्त यत्तत्र स्थापनमिष्यते.. - निणर्यसिन्पु
चित्रा नक्षत्र व वैधृति योग को घटस्थापना में त्याज्य बताया गया है, किन्तु इन दोनों के दो चरणों को त्याग कर घटस्थापना की अनुमति प्रदान की जाती है. 
तदुक्तं त कात्यायनेन प्रतिपाद्याश्विने मासि भयो वैधृति चित्रयोः. आद्यः पादौ पहि प्रारभेन्नवरात्रक्रमिति .. 
चित्रा नक्षत्र के दो चरण प्रातः 10:03 पर समाप्त होंगे एवं वैधृति के दो चरण प्रातः 09:33 पर समाप्त होंगे. अतः अति आवश्यकता में घटस्थापना हेतु लाभ अमृत का चौघड़िया प्रातः 10:04 से दोपहर 12:15 तक रहेगा, 
अभिजीत मुहूर्त प्रातः 11:49 से दोपह 12:37 तक रहेगा. 
द्विस्वभाव (धनु) लग्न प्रातः 11:32 से दोपहर 01:36 तक रहेगा.
 
शारदीय नवरात्रि की तिथियां
11 अक्टूबर 2026- पहला दिन - मां शैलपुत्री पूजा, घटस्थापना

12 अक्टूबर 2026 - दूसरा दिन - मां ब्रह्मचारिणी पूजा

13 अक्टूबर 2026 - तीसरा दिन - मां चंद्रघंटा पूजा

14 अक्टूबर 2026- चौथा दिन - मां कूष्मांडा पूजा

15 अक्टूबर 2026 - पांचवां दिन - मां स्कंदमाता पूजा

16 अक्टूबर 2026 - छठा दिन - मां कात्यायनी पूजा

17 अक्टूबर 2026- सातवां दिन - मां कालरात्रि पूजा

18 अक्टूबर 2026 - आठवां दिन - मां महागौरी की पूजा

19 अक्टूबर 2026 - नौवां दिन - मां सिद्धिदात्री की पूजा

20 अक्टूबर 2026- दुर्गा विसर्जन, विजयादशमी

कलश स्थापना
कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ अनीष व्यास ने बताया कि नवरात्रि में कलश स्थापना का विशेष महत्व है. कलश स्थापना को घट स्थापना भी कहा जाता है. नवरात्रि की शुरुआत घट स्थापना के साथ ही होती है. घट स्थापना शक्ति की देवी का आह्वान है. मान्यता है कि गलत समय में घट स्थापना करने से देवी मां क्रोधित हो सकती हैं. रात के समय और अमावस्या के दिन घट स्थापित करने की मनाही है. घट स्थापना का सबसे शुभ समय प्रतिपदा का एक तिहाई भाग बीत जाने के बाद होता है. अगर किसी कारण वश आप उस समय कलश स्थापित न कर पाएं तो अभिजीत मुहूर्त में भी स्थापित कर सकते हैं.  प्रत्येक दिन का आठवां मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त कहलाता है. सामान्यत: यह 40 मिनट का होता है.