जयपुर (पंकज आर पांचाल) : शिव क्या कोई पहेली है या विज्ञान जिसे अभी तक समझा नहीं गया? पहेली इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि रहन-सहन के तरीके से वे एक वैरागी लगते हैं, और ध्यान मुद्रा से वे बहुत बड़े तपस्वी योगी लगते हैं. कथा उन्हें भगवान बताती है, और लीलाओं में उन्हें एक साधारण इंसान की तरह देखा जा सकता है. या कभी भूतों के साथ रहने वाला अधनंगा फक्कड़, अथवा कोई चेतना का सबसे ऊँचा कंपन्न या ध्वनि.
शिव परिवार का विरोधाभास
जब हम सिर्फ परिवार की प्रकृति और व्यवहार को समझते हैं, तो विरोधाभास दिखाई देता है. भगवान शिव के कंधे पर नाग बैठा है, जिसका भोजन गणपति जी का चूहा है. कार्तिकेय जी के मोर का भोजन नाग है जो शिव का है. मां पार्वती की सवारी सिंह है, उसका भोजन शिव की सवारी नंदी है. सब एक दूसरे के विपरीत होते हुए भी परिवार में समन्वय से रहते हैं. खुद शिव का तीसरा नेत्र जो प्रलय ज्वाला का प्रतिक, वही गंगा जैसी शीतल और जीवनदायनी नदी जटाओ से बहती है और वे एक योगी होकर एक हाथ में शंख और दूसरे में त्रिशूल जैसा शास्त्र साथ रखते है.
भारत की भौगोलिकता में शिव परिवार
शिव परिवार की भारत की भौगोलिकता में प्रासंगिकता देखें तो दक्षिण भारत में कार्तिकेय (मुरुगन) पूजे जाते हैं. मध्य पश्चिमी भारत में गणपति जी. पूर्वी उत्तरी भारत में पार्वती जी. उत्तरी पश्चिमी भारत में शिव. यह भौगोलिक परिपेक्ष्य बहुत महत्वपूर्ण है.
ज्योतिर्लिंग और गोल्डन रेशियो
भारत में 12 ज्योतिर्लिंग जिस क्रम है स्थापित है वो गोल्डन रेशियो (1.618) में जमे हुए हैं, जो यूनिवर्सल ब्यूटी और परफेक्शन का रेशियो है. सोमनाथ से रामेश्वरम तक इनकी स्थिति एक ज्यामितीय चक्र बनाती है, जैसे फूलों की पंखुड़ियाँ या गैलेक्सी का स्वरूप. यह प्राचीन विज्ञान की गहरी प्रक्रिया दर्शाता है, जो ऊर्जा केंद्रों को जोड़ती है. और वही रेशियो उनके शंख में पाया जाता है.
कैलाश पर्वत का रहस्य
परिवार का निवास कैलाश पर्वत है, जिसे इंसान अभी तक जान नहीं पाया. चाँद पर पहुँचे लेकिन कैलाश चोटी पर नहीं पहुंचा . इसका आकार परफेक्ट पिरामिड जैसा है, चारों दिशाओं में सटीक, ग्रेनाइट से बना. NASA रिपोर्ट्स में शक्तिशाली मैग्नेटिक फील्ड है, जो चढ़ाई असंभव बनाता है—बाल-नाखून तेजी से बढ़ते हैं. रडार में खोखली संरचना और सुरंगें दिखती हैं. वैज्ञानिकों के साथ हुए ये रहस्यमयी अनुभव शिव शक्ति के प्रमाण है.
शिव मंदिरों का निर्माण विज्ञान
शिव मंदिरों का निर्माण केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि गहन वास्तुशास्त्र, ज्यामिति, खगोलशास्त्र, ध्वनि-विज्ञान और ऊर्जा-संतुलन पर आधारित होता है. भारत के प्राचीन मंदिर स्थापत्य में वैज्ञानिक सोच स्पष्ट रूप से दिखाई देती है. भारतीय वास्तुशास्त्र के ग्रंथ जैसे मयमतम् और समरांगण सूत्रधार मंदिर निर्माण के नियम बताते हैं. शिव मंदिरों का स्ट्रक्चराइजेशन ऊर्जा और शक्ति का चमत्कार है. दूसरा आयाम ये है की भगवान शिव को मंदिर जरूरत नहीं कोई भव्य मूर्ति या अनुष्ठान नहीं—केवल साधारण पत्थर पर जल-दूध चढ़ाओ वहीं शिव का मंदिर बन जाता है . पीपल के पेड़ नीचे विराजे पिपलेशवर महादेव, या स्टेडियम में खेलेशवर महादेव बन जाता है. वास्तु में ये वीमेन (प्राण ऊर्जा) केंद्र हैं, जो भू-चुंबकीय लाइनों पर बने. ज्योतिर्लिंगों जैसी ही शक्ति, ध्यान से कंपन पैदा करते हैं.
शिव का अध्यात्म और फिलॉसफी
इतना बड़ा योगी वैरागी पर पार्वती के साथ गृहस्ती जीवन जीते है, शिव सत्यम (सच), शिवम (शुभ), सुंदरम (सुंदरता), शून्य (खालीपन) और अनंत (असीम) का संदर्भ हैं. वे संहार से सृष्टि का चक्र चलाते हैं-शून्य से अनंत उभरता है. वैराग्य में सुंदरता, विरोधाभास में शुभता. यह ब्रह्म का प्रतीक है, जहाँ भोला भंडारी भक्तों के लिए सरल, विज्ञान के लिए अनसुलझी पहेली.
मेरी शिव पर कविता एक जो एक छोटा सा प्रयास है उनके चित्रण का
"शून्य है साधा हुआ नक्षत्र सारे मौन है
भस्म है रमी हुई सर पर सज्जित सोम है
विषधर धरा कंठ जिसके सर पर सज्जित सोम है
साधना में आदि योगी जप रहा ॐ ॐ है"