सोशल मीडिया चैट से टूटा वैवाहिक बंधन, पारिवारिक न्यायालय ने पति को दी तलाक की डिक्री

सोशल मीडिया चैट से टूटा वैवाहिक बंधन, पारिवारिक न्यायालय ने पति को दी तलाक की डिक्री

जयपुर (कमलकांत व्यास) : जयपुर में फैमिली कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर किया गया व्यवहार भी वैवाहिक संबंधों को प्रभावित कर सकता है. पारिवारिक न्यायालय क्रम एक में न्यायाधीश आरती भारद्वाज ने आदेश में बताया कि यदि कोई विवाहित महिला किसी अन्य पुरुष के साथ आपत्तिजनक फोटो खिंचवाकर उन्हें सोशल मीडिया पर साझा करती है, तो यह पति के प्रति मानसिक क्रूरता माना जाएगा.

इसी आधार पर कोर्ट ने पति को तलाक की डिक्री प्रदान की. मामले में पति की ओर से न्यायमित्र अधिवक्ता डी एस शेखावत ने बताया कि यह मामला एक दंपति के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद से जुड़ा था. पति ने याचिका दायर कर पत्नी के व्यवहार को मानसिक उत्पीड़न बताते हुए तलाक की मांग की थी पति का आरोप था कि पत्नी ने वैवाहिक जिम्मेदारियों की अनदेखी की और उसके आत्मसम्मान व सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई. अदालत ने साक्ष्यों और दस्तावेजों का अध्ययन कर पाया कि आरोप निराधार नहीं हैं.

सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई तस्वीरों को को कोर्ट ने गंभीर माना:
फैसले में कोर्ट ने विशेष रूप से सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई तस्वीरों को गंभीर माना और कहा कि इस तरह का सार्वजनिक व्यवहार जीवनसाथी के लिए मानसिक पीड़ा का कारण बन सकता है. अदालत ने यह भी पाया कि पत्नी पति पर उसके माता-पिता से अलग रहने का दबाव बना रही थी, जिसे बिना उचित कारण मानसिक क्रूरता माना गया. इसके अलावा, पत्नी द्वारा गाली-गलौज और अपमानजनक भाषा के उपयोग को भी अदालत ने गंभीरता से लिया. 

अन्य पुरुष के साथ फोटो खिंचवाना उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट करना पति के लिए मानसिक पीड़ा का कारण: कोर्ट
एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि पहले दोनों ने आपसी सहमति से याचिका दायर की थी, लेकिन बाद में पत्नी ने बिना ठोस कारण सहमति वापस ले ली, जिसे भी अदालत ने अनुचित माना. सभी तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने पति के पक्ष में फैसला सुनाते हुए तलाक मंजूर कर लिया और कहा कि विवाह में विश्वास, सम्मान और जिम्मेदारी सर्वोपरि हैं. पारिवारिक न्यायालय ने अपने फैसले में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि पत्नी द्वारा अन्य पुरुष के साथ फोटो खिंचवाना और उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट करना पति के लिए मानसिक पीड़ा का कारण बना.

विवाह ऐसा संबंध जिसमें विश्वास और निष्ठा सर्वोपरि: कोर्ट
अदालत ने कहा कि विवाह एक ऐसा संबंध है जिसमें विश्वास और निष्ठा सर्वोपरि होते हैं. यदि कोई पक्ष ऐसा व्यवहार करता है जिससे दूसरे पक्ष की भावनाएं आहत होती हैं और समाज में उसकी प्रतिष्ठा प्रभावित होती है, तो उसे हल्के में नहीं लिया जा सकता. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर साझा की गई सामग्री का प्रभाव केवल निजी नहीं, बल्कि सार्वजनिक होता है, इसलिए ऐसे मामलों में जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है.