आपदा प्रबंधन के लिए तैयार हो रही युवा शक्ति, 13 जिलों में 12,650 युवाओं को SDRF का प्रशिक्षण, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः आपदा के समय राहत और बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राजस्थान में युवा शक्ति को संगठित और प्रशिक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है.SDRF ने प्रदेश के 13 जिलों में एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र संगठन तथा भारत स्काउट एवं गाइड से जुड़े 12,650 स्वयंसेवकों को सात दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण प्रदान कर एक सशक्त सामुदायिक आपदा प्रबंधन नेटवर्क तैयार करने की पहल की है

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत आपदा की स्थिति में स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराया जा सके. योजना के अंतर्गत जयपुर, अजमेर, अलवर, जोधपुर, बाड़मेर, भरतपुर, जालौर, झालावाड़, कोटा, बीकानेर, नागौर, सिरोही और पाली जिलों में युवाओं को व्यवस्थित एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ऐसे प्रशिक्षित स्वयंसेवकों का मजबूत नेटवर्क तैयार करना है, जो किसी भी प्राकृतिक अथवा मानवजनित आपदा की स्थिति में प्रशासन, SDRF और अन्य राहत एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए सबसे पहले प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच सकें. ये स्वयंसेवक आपदा के शुरुआती और सबसे महत्वपूर्ण घंटों में राहत एवं बचाव कार्यों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि विभिन्न आपदा परिस्थितियों से निपटने का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया. स्वयंसेवकों को खोज एवं बचाव (सर्च एंड रेस्क्यू), प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड), आपदा जोखिम न्यूनीकरण, सामुदायिक समन्वय, रोप रेस्क्यू, आपातकालीन प्रतिक्रिया, घायल व्यक्तियों को सुरक्षित निकालने की तकनीक तथा राहत कार्यों के संचालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं.      

विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को यह भी बताया कि बाढ़, भूकंप, आगजनी, सड़क दुर्घटना और अन्य आपात स्थितियों के दौरान किस प्रकार त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई कर जनहानि और नुकसान को कम किया जा सकता है. प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न मॉक ड्रिल और अभ्यास सत्रों के माध्यम से स्वयंसेवकों की क्षमता को भी परखा गया.SDRF के कमांडेंट राजेंद्र सिंह सिसोदिया के निर्देशन और निगरानी में यह व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है. प्रशिक्षित युवा स्वयंसेवक आपदा के समय प्रशासन और आमजन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी का काम करेंगे. विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं के दौर में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य की चुनौतियों से निपटने में अत्यंत उपयोगी साबित होंगे. बड़ी संख्या में प्रशिक्षित युवाओं की उपलब्धता से न केवल राहत और बचाव कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि आपदा के प्रति जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता भी मजबूत होगी.