VIDEO: कांग्रेस का मनरेगा बचाओ संग्राम, 45 दिन तक देश में बड़ा आंदोलन करेगी कांग्रेस, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: कांग्रेस पार्टी ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को बचाने के लिए बड़े आंदोलन की घोषणा की है. कांग्रेस 10 जनवरी से 25 फरवरी 2026 तक 45 दिन तक “मनरेगा बचाओ संग्राम”  चलाएगी, जिसके तहत देशभर में चरणबद्ध तरीके से जनआंदोलन किया जाएगा. पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार मनरेगा को लगातार कमजोर कर रही है, जिससे ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और किसानों की आजीविका पर गहरा संकट पैदा हो गया है. कांग्रेस कार्यकर्ता गांव-ढाणी से लेकर विधानसभा तक इस अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे. 

केंद्र सरकार ने ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी-जी राम जी विधेयक, 2025’ को लागू कर दिया है. यह कानून दो दशक पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लेगा. नया अधिनियम केंद्र सरकार के ‘विकसित भारत-2047’ के विजन से जुड़ा हुआ है . लेकिन इसके साथ ही प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इसका विरोध शुरू कर दिया है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मनरेगा में बजट कटौती होगी, मजदूरी भुगतान में देरी होगी, काम के दिनों में कमी होगी और तकनीकी अड़चनों के कारण करोड़ों परिवारों को रोजगार नहीं मिल पाएगा. इसी के विरोध में कांग्रेस ने यह संग्राम शुरू करने का फैसला लिया है. आंदोलन के दौरान गांव, ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर धरना-प्रदर्शन, पदयात्रा, जनसभाएं और ज्ञापन सौंपने जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. कांग्रेस का दावा है कि मनरेगा ग्रामीण भारत की आर्थिक रीढ़ है और यह योजना केवल रोजगार नहीं, बल्कि गरीबों के आत्मसम्मान और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी हुई है. पार्टी ने कहा है कि 10 जनवरी से 25 फरवरी तक चलने वाले इस संग्राम के माध्यम से सरकार पर दबाव बनाया जाएगा ताकि मनरेगा को मजबूत किया जाए, लंबित भुगतान तुरंत जारी हों और योजना के लिए पर्याप्त बजट सुनिश्चित किया जा सके.

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान छेड़ने का फैसला किया है, जिसका विस्तृत कार्यक्रम संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने जारी कर दिया है. आइये देखते हैं इस पूरे काऱयक्रम की रूपरेखा कया है.

मनरेगा बचाओ संग्राम
-10 जनवरी 2026 से 25 फरवरी 2026 तक चलेगा अभियान
-8 जनवरी 2026 को पीसीसी स्तर की तैयारी बैठकें होगी
-पीसीसी मुख्यालयों में तैयारी बैठकें आयोजित की जाएंगी
-VB-GRAM-G विधेयक के प्रभावों पर नेतृत्व को जानकारी दी जाएगी
-जिला-वार जिम्मेदारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा
-सभी राज्यों में समन्वित मोबिलाइज़ेशन और एकरूप संदेश सुनिश्चित किया जाएगा
-10 जनवरी 2026 को जिला स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस होंगी
-11 जनवरी 2026 को एक दिवसीय उपवास एवं प्रतीकात्मक विरोध होगा
-जिला मुख्यालयों या प्रमुख सार्वजनिक स्थलों,
-महात्मा गांधी या डॉ. बी. आर. आंबेडकर की प्रतिमाओं के पास
-पार्टी नेताओं, निर्वाचित प्रतिनिधियों और मनरेगा श्रमिकों की भागीदारी के साथ एक दिवसीय उपवास किया जाएगा.
-12 जनवरी से 29 जनवरी 2026 पंचायत स्तर पर जनसंपर्क अभियान चलेगा
-सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत स्तर की चौपालें और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे
-मल्लिकार्जुन खड़गे व राहुल गांधी के पत्र ग्राम प्रधानों, पूर्व ग्राम प्रधानों
-रोजगार सेवकों और मनरेगा श्रमिकों तक पहुंचाए जाएंगे
-विधानसभा स्तर पर नुक्कड़ सभाएं और पर्चा वितरण भी किया जाएगा.
-30 जनवरी 2026 को वार्ड स्तर पर शांतिपूर्ण धरना दिया जाएगा
-वार्ड और ब्लॉक स्तर पर शांतिपूर्ण धरने आयोजित किए जाएंगे
-अहिंसा, संवैधानिक मूल्यों और काम के अधिकार पर जोर दिया जाएगा.

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह संग्राम केवल एक आंदोलन नहीं,बल्कि भूखे हाथों की पुकार और सूखे खेतों की आवाज़ है. मनरेगा मजदूर की हथेली में मेहनत का भरोसा और सम्मान की रेखा है. जब काम रुके, मजदूरी थमे,तो लोकतंत्र की जड़ें भी कांपती हैं. कांग्रेस का दावा है कि 10 जनवरी से 25 फरवरी तक यह संघर्ष गांव–गांव पहुंचेगा, हर चौपाल पर सवाल बनेगा और हर दरवाज़े पर हक़ की दस्तक देगा. पार्टी ने संकल्प दोहराया कि जब तक गरीब के हाथ में काम और समय पर मेहनताना नहीं मिलेगा, तब तक यह आवाज़ शांत नहीं होगी- मनरेगा बचेगा, तो ही ग्रामीण भारत सांस ले पाएगा.