जयपुरः यदि आपके बच्चे बाहर के खाने के शौकिन है, तो ये खबर ऐसे परिवारों के लिए एक बड़ा अलर्ट है. फिर चाहे केक, पेस्ट्री और कुकीज जैसे ब्रेकरी उत्पाद हो या शीतल पेय. कमोबेश सभी खाद्य पदार्थों में से दस फीसदी से अधिक ऐसे है, जो तय मापदण्ड पूरे नहीं कर रहे है. चौकिंए मत ये कोई हमारा आंकलन नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा आयुक्तालय की तरफ से दिसम्बर में चलाए गए 'ईट राइट ड्राइव' कैम्पेन में विशेषतौर पर बच्चों द्वारा खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों के सैम्पलों की जांच रिपोर्ट की सच्चाई है. आखिर क्या है रिपोर्ट और बच्चों के खाद्य पदार्थों की सच्चाई,
केन्द्र सरकार के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा आयुक्तालय अलग-अलग चीजों की गुणवत्ता जांचने के लिए विशेष सर्विलांस अभियान चलाता है. इसी क्रम में दिसम्बर माह में चलाए गए 'ईट राइट ड्राइव' कैम्पेन में विशेषतौर पर बच्चों पर फोकस किया गया. एक महीने के अभियान के दौरान पूरे राजस्थान से कुल 670 नमूने एकत्र किए गए, जिनकी अलग-अलग लैब में करवाई गई जांच में कई तरह के खुलासे सामने आए है. खाद्य सुरक्षा आयुक्त टी शुभमंगला की माने तो जांच के परिणामों के अनुसार 88.81 फीसदी नमूने की मापदण्डों पर खरे उतरे. जो 12 फीसदी खाद्य पदार्थ मापदण्ड पूरे नहीं कर पाए, उनमें 4.03 फीसदी सब स्टैंडर्ड, 2.68 फीसदी मिसब्रांडेड, जबकि 2.54 फीसदी अनसेफ केडेगिरी में देखे गए.
मासूमों को बीमार कर रहे "स्ट्रीट फूड" !
बात खाद्य सुरक्षा आयुक्तालय के दिसम्बर माह के विशेष जांच अभियान से जुड़ी
बच्चों के खाद्य पदार्थों में शामिल केक, पेस्ट्री और कुकीज जैसे ब्रेकरी आइटम,
शीतल पेय पदार्थ के अलावा स्ट्रीट फूड के उठाए गए 670 सर्विलांस सैम्पल
इस दौरान सर्वाधिक गुणवत्ता से समझौता रेडी-टू-ईट और स्ट्रीट फूड में मिला
जांच के दौरान कुल फेल हुए नमूनों में से अकेले 41.3% सैम्पल इसी श्रेणी के थे.
इसके अलावा पेय पदार्थ के 30.7% नमूनों में खामियां देखने को मिली
जबकि केक, पेस्ट्री और कुकीज जैसे उत्पादों की श्रेणी 24% चिन्हित की गई
विशेष रूप से उदयपुर में 'असुरक्षित' भोजन मिलने की दर सबसे अधिक रही
जबकि कोटा शहर में लिए गए खाद्य नमूने मानकों पर पूरी तरह खरे उतरे
हालांकि,इस बारे में खाद्य आयुक्त टी शुभमंगला ने स्पष्ट किया है ये सैम्पल सर्वे है
चमक से तय नहीं करें खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता
खाद्य सुरक्षा आयुक्तालय के सर्वे रिपोर्ट को लेकर बोलीं आयुक्त टी शुभमंगला
उन्होंने कहा कि बच्चों के खानपान को लेकर परिजनों को गंभीरता बरतनी चाहिए
सबसे पहले तो कोशिश ये रहे कि बच्चों को घर पर बना भोजन/खाद्य पदार्थ ही दें
बाजार से खाद्य पदार्थ खरीदे वक्त भी सावधानी बरतें कि FSSAI का लोगो लगा हो
इसके अलावा खाद्य पदार्थ में डाले गए "इंग्रेडिएंट्स" और एक्सपायरी डेट को भी जांच लें
ये भी जांच लें कि कहीं पूर्व की एक्पायरी डेट को छिपाकर ऊपर दूसरी तो नहीं चिपकाई गई है
उन्होंने ये भी साफ किया कि अत्याधिक चमक या असामान्य दिखने वाले खाद्य पदार्थों से बचे