अजमेर में देश की पहली गैस्ट्रिक ट्रांसेक्शन सर्जरी, 2 हिस्सों में बंटा पेट, सफल सर्जरी कर डॉक्टरों ने बचाई युवक की जान 

अजमेर में देश की पहली गैस्ट्रिक ट्रांसेक्शन सर्जरी, 2 हिस्सों में बंटा पेट, सफल सर्जरी कर डॉक्टरों ने बचाई युवक की जान 

अजमेर: चिकित्सा विज्ञान में कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं जो न केवल चिकित्सकों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाते हैं, बल्कि विश्व स्तर पर मेडिकल लिटरेचर (चिकित्सा साहित्य) में एक नया अध्याय भी जोड़ देते हैं. ऐसा ही एक मामला सामने आया है राजस्थान के अजमेर जिले में. जहां पर शल्य चिकित्सक डॉ. अनिल शर्मा की टीम ने ऐसा ही एक दुर्लभ और ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया है.

जी हां आपको बता दें कि चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में अजमेर स्थित जवाहर लाल नेहरू अस्पताल के चिकित्सकों ने एक अत्यंत जटिल और दुर्लभ सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए गंभीर रूप से घायल युवक की जान बचाई है. डॉक्टरों ने इसे देश का पहला और दुनिया का छठा सफल ‘गैस्ट्रिक ट्रांसेक्शन’ ऑपरेशन होने का दावा किया है. कॉलेज से संबद्ध जवाहर लाल नेहरू अस्पताल में शल्य चिकित्सक डॉ. अनिल शर्मा और उनकी टीम ने यह सर्जरी की.

हादसे में पेट दो हिस्सों में बंटा, कई गंभीर चोटें: 
शल्य चिकित्सक डॉ. अनिल शर्मा ने बताया कि 6 जून को किशनगढ़ की एक मार्बल फैक्ट्री में भारी ट्रॉली से कुचलने पर 29 वर्षीय युवक नुरसेद गंभीर रूप से घायल हो गया. हादसे में उसका पेट (आमाशय) 2 हिस्सों में विभाजित हो गया था. इसके साथ ही तिल्ली और किडनी में गंभीर चोट, 8 पसलियां चकनाचूर होना तथा कूल्हे की हड्डी में दो फ्रैक्चर जैसी कई जानलेवा चोटें आईं. मरीज की अत्यंत नाजुक स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने तत्काल इमरजेंसी एक्सप्लोरेटरी लैप्रोटॉमी (पेट की जटिल सर्जरी) करने का निर्णय लिया.

विशेषज्ञ टीम ने निभाई अहम भूमिका: 
शल्य चिकित्सक डॉ. अनिल शर्मा के नेतृत्व में सर्जिकल टीम ने ‘गैस्ट्रिक ट्रांसेक्शन’ का जटिल ऑपरेशन कर पेट के दोनों हिस्सों को सफलतापूर्वक जोड़ते हुए मरीज की जान बचाई. ऑपरेशन में डॉ. पूर्णिमा सागर, डॉ. मेहुल, डॉ. नमन सोमानी और डॉ. विपिन दीप सिंह शामिल रहे. एनेस्थीसिया टीम में डॉ. कुलदीप, डॉ. ज्योति और डॉ. एकता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, वहीं नर्सिंग स्टाफ का सहयोग भी सराहनीय रहा. अस्पताल अधीक्षक डॉ. अरविन्द खरे के मुताबिक, यह ऑपरेशन देश का पहला और दुनिया का छठा मामला है. मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. अनिल सामरिया ने बताया कि ये केस भविष्य में मेडिकल छात्रों के लिए एक ऐतिहासिक केस स्टडी के रूप में महत्वपूर्ण साबित होगा.