जयपुर : आज सड़कें सूनी पड़ी हैं और छतें आबाद हो रही हैं. आसमां सतरंगी हो रहा है. दुनियाभर में प्रसिद्ध गुलाबी नगरी की पतंगबाजी परवान पर है. पतंगबाजों का सुबह से छतों पर 'वो काटा, वो मारा' का शोर मच रहा है.
डीजे की धुन पर छतों पर जयपुराइट्स झूम रहे हैं. वहीं हवा और खुला मौसम भी पतंगबाजों का साथ आज दे रहा है. गर्म व्यंजनों के साथ फीणी, तिल के पकवानों का स्वाद चख रहे हैं. अलसुबह से श्रद्धालु मंदिरों, गौशालाओं में दान पुण्य कर रहे हैं.
गौरतलब है कि 150 साल पहले जयपुर में पतंगबाजी शुरू हुई थी. जयपुर के पूर्व महाराजा रामसिंह द्वितीय को पतंगबाजी का शौक था. पूर्व महाराजा रामसिंह द्वितीय लखनऊ से पहली पतंग लाए थे. गुलाबी नगरी में महाराजा की पतंग कटने पर घुड़सवार दौड़ते थे. मकर संक्रांति पर यहां आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है. जयपुर में जल महल की पाल पर अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव हुआ.