जयपुर: नए सरकारी जिलों के गठन से ये साफ हो गया था कि बीजेपी में भी संगठन का ढांचा परिवर्तित होगा.विचार परिवार के अनुसार भी बीजेपी संगठन में कई बदलाव हो चुके है.4 नए जिले जुड़ेंगे, तीन जिलों का नामकरण होगा. राजस्थान की बदलती प्रशासनिक संरचना के साथ अब बीजेपी भी अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव करने जा रही है, हाल ही में हुई प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में पार्टी ने चार नए संगठनात्मक जिले बनाने और तीन जिलों के नाम बदलने का प्रस्ताव पारित किया था.
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और प्रदेश प्रभारी राधामोहन दास अग्रवाल ने इस सम्बन्ध में पदाधिकारियों से बातचीत भी की प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी आगामी कार्यसमिति बैठक में मिलने की संभावना है. जब तक कार्यसमिति की बैठक इन जिलों का अनुमोदन नहीं हो जाता तब तक इन जिलों में कार्यवाहक जिला अध्यक्ष नियुक्त किये जायेंगे. राजनीतिक दृष्टि से यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. भाजपा का यह संगठन विस्तार केवल प्रशासनिक बदलाव का अनुसरण नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी चुनावी रणनीति भी छिपी है. नए जिलों के गठन से पार्टी स्थानीय स्तर पर नए नेतृत्व को अवसर दे सकेगी, जिससे कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ेगा और लंबे समय से चली आ रही क्षेत्रीय असंतुष्टि को भी कम किया जा सकेगा.
संगठनात्मक 4 नए जिले बढ़ेंगे. वर्तमान में भाजपा के राजस्थान में 44 संगठनात्मक जिले हैं.
प्रस्ताव के अनुसार कोटपूतली-बहरोड़, सलूंबर, डीग-कुम्हेर और ब्यावर को नए संगठनात्मक जिलों के रूप में शामिल किया जाएगा. वहीं नागौर देहात का नाम बदलकर कुचामन-डीडवाना, जोधपुर देहात का नाम फलोदी , अलवर उत्तर का नाम खैरथल-तिजारा किया जाएगा.
ये नए जिले बनेंगे:
- कोटपूतली - बहरोड़ , जिसमे 4 विधानसभा शामिल
- सलूंबर , जिसमे 2 विधानसभा शामिल
- डीग - कुम्हेर , जिसमे 3 विधानसभा शामिल
- ब्यावर , जिसमे 3 विधानसभा शामिल
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने साफ किया है कि संगठनात्मक विस्तार की जरूरत मुख्य रूप से प्रशासनिक ढांचे के अनुरूप पार्टी को ढालने के लिए महसूस हुई है. उन्होंने कहा कि जिला परिषद और जिला प्रमुख के चुनाव अब नए प्रशासनिक जिलों के आधार पर होंगे, ऐसे में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को भी उसी अनुरूप तैयार करना जरूरी है. राठौड़ ने कहा कि बड़े जिलों में संगठन को और प्रभावी बनाने के लिए अतिरिक्त संगठनात्मक इकाइयां भी बनाई जा रही हैं. उन्होंने बताया कि पंचायत समिति और जिला परिषद चुनावों की संरचना को ध्यान में रखते हुए वार्ड स्तर तक संगठन को मजबूत किया जाएगा. जरूरत पड़ने पर भविष्य में और विस्तार भी संभव है, क्योंकि पार्टी अपने कार्यक्षेत्र को बढ़ाने के हिसाब से संगठन का निर्माण करती है.