जयपुर : ख्वाहिशों की उड़ान...विशिंग लैंप से 'पिंकसिटी' (जयपुर) रोशन हो गई है. दिनभर पतंगबाजी के बाद अब आतिशबाजी की जगमगाहट हो रही है. उमंग की डोर के साथ चहुंओर रहा पतंगबाजी का जोर रहा. हवा और मौसम ने भी पतंगबाजों को आज निराश नहीं किया. डीजे की धुन पर छतों पर जयपुराइट्स झूमते नजर आए. गर्म व्यंजनों के साथ फीणी, तिल के पकवानों का स्वाद चखा. अलसुबह से श्रद्धालु मंदिरों, गौशालाओं में दान पुण्य किया.
गौरतलब है कि 150 साल पहले जयपुर में पतंगबाजी शुरू हुई थी. जयपुर के पूर्व महाराजा रामसिंह द्वितीय को पतंगबाजी का शौक था. पूर्व महाराजा रामसिंह द्वितीय लखनऊ से पहली पतंग लाए थे. गुलाबी नगरी में महाराजा की पतंग कटने पर घुड़सवार दौड़ते थे. मकर संक्रांति पर यहां आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है. जयपुर में जल महल की पाल पर अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव हुआ.
मकर संक्रांति पर 100 से अधिक घरों में खलल !
वहीं मकर संक्रांति पर 100 से अधिक घरों में खलल पड़ी. त्योहारी उत्साह के बीच हादसों में घायल हुए लोग अस्पताल पहुंचे. अकेले SMS ट्रोमा सेंटर में 32 मरीज पहुंचे. सिर में चोट समेत अन्य दिक्कतों के चलते 12 मरीज एडमिट किए गए. जबकि 20 मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दी गई. हालांकि इन मरीजों में कोई भी गंभीर मामला सामने नहीं आया. उधर कांवटिया अस्पताल, गणगौरी, जयपुरिया समेत अन्य अस्पतालों में भी घायल पहुंचे. इनमें से अधिकांश मरीज पतंग के मांझा से कटने के चिन्हित किए गए.