जयपुरः BJP प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि VB-G-Ram-G या कहे G-RAM-G से इन्हें क्या एतराज हो सकता है, फिर भी विपक्षी दल इस पर आपत्ति उठा रहे हैं. केवल नाम जोड़कर G-RAM-G बन गया तो कांग्रेस व विपक्ष दलों को आपत्ति हो रही है. मदन राठौड़ ने कहा कि वीबी—जी रामजी के माध्यम से 125 दिन की रोजगार गारंटी मिलेगी, वहीं पहले 100 दिन की मिलती थी. पहले कार्य या तो कागजों में होते थे, या बिना जरूरत के किए जाते थे, अब ग्राम सभा गांव के विकास के लिए काम को तय करेगी.
मदन राठौड़ ने कहा कि कई सवाल आएंगे कि महात्मा गांधी के नाम को सरकार ने क्यों चेंज किया लेकिन कांग्रेस के समय भी इस योजना का नाम बदलकर जवाहर रोजगार योजना किया गया और बाद में इसका नाम 'नरेगा' किया गया और 2005 में इसे 'मनरेगा' कर दिया. मतलब कांग्रेस ने क्या पहले जवाहर लाल जी का अपमान किया नाम बदलकर. आखिर कांग्रेस नाम बदलने पर क्यों बवाल कर रही है.
VB-G-Ram-G पर सियासत
___भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के तर्क____
कांग्रेस जिस मनरेगा को अपनी बड़ी उपलब्धि बता रही है
उस मनरेगा में अब तक 11.74 लाख करोड़ रुपए खर्च हुए है
जिसमें सर्वाधिक मोदी सरकार ने 11 साल में 8.53 लाख करोड़ रुपए खर्च किए
नए कानून से ग्राम पंचायत की ग्राम सभा में तय किए गए काम के आधार पर 125 दिन रोजगार की गारंटी मिलेगी काम नहीं मिलने पर बेरोजगारी भत्ता मिलेगा
सामाजिक ऑडिट अनिवार्य होगी, इसके साथ ही फर्जीवाड़ा रोकने के लिए बायोमैट्रिक उपस्थिति, जीयो टैगिंग और एआई तकनीक के उपयोग सहित अनेक कदम उठाए गए
बुवाई और कटाई के समय में किसानों को पर्याप्त मजदूरी मिले
इसके लिए 60 दिन तक राज्य सरकारें काम को रोक सकेगी
श्रमिकों का भूगतान 15 दिनों में अनिवार्य रूप से करने और भूगतान नहीं करने की दिशा में मुआवजा करने देने का प्रावधान किया गया है
इस नए कानून से ना केवल जरूरत मंद को रोजगार मिलेगा, बल्कि विकसित भारत के लिए विकसित ग्राम पंचायत बनाने के अभियान को गति भी मिलेगी
राजस्थान भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने कहा कि Ashok Gahlot सरकार के कार्यकाल में कैबिनेट मंत्री रहे रमेश मीणा ने भी मनरेगा के कामों में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे जब खुद कांग्रेस के नेताओं ने उसे समय भ्रष्टाचार के आरोप लगे तो हमने तो भ्रष्टाचार दूर करने के लिए कानून में संशोधन किया और इस कानून को और पारदर्शी बनाया , इस कानून के माध्यम से ना केवल साल में 125 दिन अधिक काम मिलेगा, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, पैसा सीधा लाभार्थी के खाते में जाएगा. राजीव गांधी ने स्वयं स्वीकार किया था कि एक रूपए केंद्र से चलता है, 15 पैसा लोगों तक पहुंचता है, ऐसे में इस कानून का विरोध वो लोग कर रहे है जो जनता के हक का 85 पैसा खा जाते थे, ऐसे लोगों के पेट में दर्द हो रहा है