आखिर कांग्रेस के लिए क्या मायने है 5 राज्यों के चुनावी नतीजे, क्षेत्रीय पार्टियों के कमजोर होने से जगी अब कईं उम्मीदें, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः पांच राज्यों के चुनाव परिणाम कांग्रेस के लिए मिले जुले रहे हैं. केरलम में 10 साल बाद कांग्रेस की वापसी हुई है. केरलम के नतीजों ने साबित कर दिया कि कांग्रेस अभी भी साउथ में काफी मजबूत है. हालांकि असम में हार की हैट्रिक से पार्टी हाशिए पर चली गई है. वहीं बंगाल में इस बार कांग्रेस खाता खोलने में कामयाब रही. वहीं ममता बनर्जी के हारने पर इंडिया गठबंधन में कांग्रेस अब पहले से मजबूत होगी.

पांच राज्यों के नतीजे कल आ चुके है. परिणामों के बाद अब तमाम सियासी दल औऱ एक्सपर्ट कईं हर एंगल से समीकरणों का विश्लेषण कर रहे हैं. बात कांग्रेस की करें तो नतीजे पार्टी के लिए खट्टे-मिट्टे रहे. लेकिन केरलम में किंग बनने के बाद कह सकते है कांग्रेस का थोड़ा सा कमबैक हुआ है. क्योंकि इससे पहले दिल्ली,राजस्थान,हरियाणा,मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सहित कईं राज्यों में लगातार हार का सामना कांग्रेस को करना पड़ रहा था. तेलंगाना के बाद अब जाकर कांग्रेस ने किसी राज्य में जीत का स्वाद चखा है.

5 राज्यों के नतीजे कांग्रेस के लिए क्या मायने है
10 साल बाद केरलम में कांग्रेस की हुई वापसी
केरलम जीत से कांग्रेस का साउथ में मजबूत पार्टी होने का गया संदेश
केरमल जीत से कांग्रेस को मिली संजीवनी
नेताओं और कार्यकर्ताओं का जीत से बढेगा मनोबल
अब साउथ के कर्नाटक,तेलंगाना और केरलम 3 राज्यों में कांग्रेस सरकार
बंगाल में कांग्रेस ने इस बार खोला जीत का खाता
ममता बनर्जी के हारने से कांग्रेस को अब बंगाल में मिल सकता है स्पेस
टीएमसी के हारने से इंडिया गठबंधन में भी कांग्रेस होगी अब और मजबूत
असम में कांग्रेस हार की हैट्रिक से पहुंची हाशिए पर 
असम में राहुल गांधी के खास पीसीसी चीफ गोगोई के हारने से गया गलत मैसेज
असम में पार्टी को फिर से खड़ा करना होगा एक मजबूत चैलेंज
तमिलनाडु में डीमके गठबंधन में 5 सीटों पर सिमट गई कांग्रेस
तमिलनाडु की द्रविड़ राजनीति में पैठ बनाने के लिए कांग्रेस को बदलनी होगी रणनीति

भले ही कांग्रेस की अब चार राज्यों में सरकार हो गई हो. लेकिन असम,बंगाल औऱ तमिलनाडु की खराब परफॉर्मेंस बताती है कि पार्टी को अब भी बहुत मेहनत औऱ बदलाव करने की जरूरत है. खासतौर से बंगाल में जिस तरह बीजेपी ने चुनाव जीता है, वह बताता है कि हिंदुत्व का सियासी काउंटर करने का कोई तोड़ अब भी कांग्रेस के पास नहीं है. उत्तर भारत औऱ हिन्दी बेल्ट जहां कांग्रेस बेहद कमजोर है और कईं राज्यों में हार की हैट्रिक भी लगा चुकी है. वहीं लगातार कमजोर हो रही रीजनल पार्टियों के बीच कांग्रेस अगर मेहनत करें तो एक उम्मीद की किरण जग सकती है. केजरीवाल,तेजस्वी यादव औऱ ममता बनर्जी की हार के बाद अब कांग्रेस यहां विपक्ष का विकल्प बनकर उभर सकती है.

अब अगले साल 7 राज्यों में विधानसभा चुनाव है. अब देखना है कि पांच राज्यों के नतीजों से सबक लेकर कांग्रेस इन राज्यों में किस रणनीति के साथ चुनावी जंग में उतरती है. कुल मिलाकर अभी आए पांच राज्यों के नतीजे साउथ में तो कांग्रेस के लिए ऑक्सीजन मिलने जैसे है. पर उत्तर और पूर्वोत्तर के रिजल्ट अस्तित्व बचाने जैसी लड़ाई वाले है.    

आखिर कांग्रेस के लिए क्या मायने है 5 राज्यों के चुनावी नतीजे
केरलम जीत से कांग्रेस को मिली संजीवनी
साउथ में कांग्रेस अभी भी है एक मजबूत पार्टी
असम में हार की हैट्रिक से कांग्रेस पहुंची हाशिए पर
बंगाल में जीत का खाता खोलते हुए बने दो विधायक
ममता के कमजोर होने से इंडिया गठबंधन में कांग्रेस होगी अब मजबूत
टीएमसी के हारने से बंगाल में मिला कांग्रेस को अब स्पेस
क्षेत्रीय पार्टियों के कमजोर होने से कांग्रेस को जगी अब कईं उम्मीदें