विधानसभा में नक्षत्र वाटिका, 199 का फेर खत्म करने का उपाय ! देखिए खास रिपोर्ट

जयपुरः भारतीय ज्योतिष शास्त्र में नक्षत्रों का महत्व विशेष है.27 नक्षत्रों को ना केवल खगोलीय बल्कि भौतिक और रासायनिक प्रभावों के साथ जोड़ा गया है. इन नक्षत्रों से जुड़े वृक्षों का ना केवल खगोलीय बल्कि भौतिक और रासायनिक प्रभावों के साथ जोड़ा गया है. नक्षत्र से जुड़े पौधे लगाकर भवन के वास्तु दोषों को दूर करना एक प्राचीन और प्रभावशाली ज्योतिषीय उपाय है. राजस्थान की विधानसभा में आज नक्षत्र वाटिका का शुभारंभ हुआ. राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी,मध्य प्रदेश, उत्तरप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम विधान सभा के अध्यक्ष शुभारम्भ अवसर पर रहे मौजूद.

राजस्थान की नई विधानसभा में कभी 200 विधायक एक साथ नहीं बैठे. होनी - अनहोनी की अफवाह हमेशा सुनी. मौजूदा विधानसभा अध्य्क्ष वासुदेव देवनानी ने वास्तु दोष को सुधारने के लिए नक्षत्र वाटिका का निर्माण करवाया है. नक्षत्र वाटिका की अवधारणा भारतीय ज्योतिष के 27 नक्षत्रों पर आधारित है उसी अनुरूप पौधे लगाए गए है. विधान सभा के दक्षिण भाग में नक्षत्र वाटिका को स्थापित किया गया है दोनों पार्किंग के मध्य पांच हजार वर्ग मीटर अर्ध चन्द्राकार उद्यान के रूप में विकसित किया गया. राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष डॉ. वासुदेव देवनानी, उत्तर प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष  सतीश महाना, हिमाचल प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष  कुलदीप सिंह पठानिया, ओडिशा विधान सभा अध्यक्ष  सूरमा पाढी और सिक्किम विधान सभा अध्यक्ष मिंगमा नोर्बू शेरपा ने नक्षत्र वाटिका का आगाज किया. भारतीय ज्योतिष और आयुर्वेद के अनुसार आकाश मंडल में 27 नक्षत्र माने गए हैं, जिनका संबंध विशिष्ट वृक्षों से है. राजस्थान विधान सभा के दक्षिणी क्षेत्र में स्थित यह 'नक्षत्र वाटिका' प्रकृति और खगोल विज्ञान के इसी अद्भुत संगम को समर्पित है.

-- नक्षत्र और उनके प्रतिनिधि वृक्ष --
अश्विनी - कुचला
भरणी - आंवला
कृतिका - गूलर
रोहिणी - जामुन
मृगसिर - खैर 
आर्द्रा - शीशम
पुनर्वसु - बांस
पुष्य - पीपल
अश्वेषा - नागकेसर
मघा - बरगद या वट
पूर्वा फाल्गुनी - पलाश 
उत्तरा फाल्गुनी - पाकड़
रीठा - चमेली
चित्रा - बेल
स्वाती- अर्जुन
विशाखा - कंटारी/ संभल
अनुराधा - मौलश्री
ज्येष्ठा - चीड़/ सेमल
मूल - साल
पूर्वाषाढ़ा- जलवेतर/ अशोक
उत्तराषाढ़ा- कटहल
श्रवण - शमी/ आक
धनिष्ठा - मदार 
शतभिषा - कदंब
पूर्व भाद्रपद - आम
उत्तर भाद्रपद - नीम
रेवती - महुवा
ग्रह एवं उनसे संबंधित पौधे
सूर्य - लाल गुलाब, मदार या कनेर
गुरु – केला, पंज बेल या गैंदी
शुक्र – गूलर, कनैर या तुलसी
शनि – शमी या शमा बैजंती
चंद्र – पलाश, कनेर या चमेली
बुद्ध – अपामार्ग, पान या बेला
मंगल – गुडहल, खैर या लाल चंदन
राहु – दूर्वा, नीम या सदा सुहाग
केतु – कुशा, पंज बेल या गैंदी

वास्तु सुधारने की दिशा में स्पीकर वासुदेव देवनानी ने वैदिक मंत्रोच्चार की परंपरा स्वस्ति वाचन को अपनाया और अपने कक्ष में इसे आहूत भी किया था. कुछ ने इसे शुद्धिकरण से भी जोड़ा फिर 199 का फेर विधानसभा पर मंडरा गया. कंवल लाल मीणा की विधायकी छिन जाने के बाद अंता सीट खाली हो गई. यहां उपचुनाव हुए उल्लेखनीय है कि राज्य की नई विधानसभा में कभी 200 विधायक एक साथ नहीं बैठे! कुछ पूर्व विधायकों ने इस कारण विशेष पूजा अर्चना की मांग की थी. पूर्व मुख्य सचेतक कालू लाल गुर्जर और पूर्व विधायक हबीबुर्रहमान ने सवाल खड़े किए थे. नई विधानसभा बनने से पहले श्मशान और कब्रिस्तान भूमि होने का दावा किया था बुरी आत्माओं के साए में विधानसभा इमारत होने की बात उठी थी. इन्हीं सब बातों के मद्देनजर स्पीकर देवनानी ने करवाया वैदिक मंत्रोच्चार - मंगल चारण करवाया था. 

- पिछली गहलोत सरकार में भी उप चुनावो का इतिहास रहा था पंडित भंवर लाल शर्मा,किरण माहेश्वरी, मास्टर भंवरलाल मेघवाल,कैलाश त्रिवेदी का निधन हो गया था
-- इतिहास को जाने तो फरवरी 2001 के दौरान जब 11वीं विधानसभा का सत्र था विधानसभा की इमारत पुराने भवन से नए भवन में शिफ्ट हुई थी ..
-25 फरवरी को तत्कालीन राष्ट्रपति के आर नारायणन इसका उद्घाटन करने आने वाले थे जो बीमार होने की वजह से नहीं आ सके
- आखिरकार बिना उद्घाटन के ही विधानसभा शुरु हो गई 
-इसके बाद नवंबर 2001 में इसका उद्घाटन हुआ तब से अब तक किसी ना किसी विधायक का निधन होता रहा है
शुरुआती दौर में विधायक किशन मोटवानी ,जगत सिंह दायमा, भीखा भाई ,भीमसेन चौधरी, रामसिंह विश्नोई, अरुण सिंह ,नाथूराम अहारी चल बसे थे
-वसुंधरा राजे के शासन के दौरान कल्याण सिंह चौहान, कीर्ति कुमारी, धर्मपाल चौधरी का विधायक पद पर रहते हुये निधन हो गया था  
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-विधानसभा से अचानक विधायकों की गैर मौजूदगी की एक बड़ा कारण उपचुनाव रहे
-समय समय पर कई विधानसभा क्षेत्रों को उपचुनाव का सामना भी करना पड़ा
 - फरवरी 2002 में किशन मोटवानी के निधन के बाद अजमेर पश्चिम में उपचुनाव हुए 
-दिसंबर 2002 में बानसूर विधायक जगत सिंह दायमा के निधन के बाद चुनाव हुआ 
-सागवाड़ा विधायक भीखा भाई के निधन बाद उपचुनाव हुआ 
-2005 जनवरी में लूणी विधायक रामसिंह विश्नोई के निधन के बाद उपचुनाव हुआ 
-2006 मई में डीग विधायक अरुण सिंह के निधन के बाद उपचुनाव हुआ 
-2006 दिसंबर में डूंगरपुर विधायक नाथूराम अहारी के निधन के बाद उपचुनाव हुआ
- 2017 में धौलपुर विधायक बीएल कुशवाह के जेल जाने के बाद वहां भी उपचुनाव हुए
- 2017 में सितंबर के महीने में बीजेपी विधायक कीर्ति कुमारी के निधन के बाद मांडलगढ़ में उपचुनाव हुआ
- 21 फरवरी 2018 को बीजेपी विधायक कल्याण सिंह का भी निधन हो गया उसके बाद मुंडावर विधायक धर्मपाल चौधरी भी इस दुनिया में नहीं रहे
पिछली सरकार के समय रामगढ़ उपचुनाव का सामना करना पड़ा
-- सहाड़ा,सुजानगढ़ , वल्लभनगर और राजसमंद के विधानसभा उप चुनाव भी हुए थे गहलोत सरकार के समय
- मौजूदा भजनलाल सरकार के समय खींवसर,चौरासी, देवली उनियारा, दौसा, झुंझुनूं के विधायकों के सांसद बनने का कारण उप चुनाव हुए.. सलूंबर और रामगढ़ में स्थानीय विधायकों के निधन के कारण उप चुनाव हुआ था.     

राजस्थान की पुरानी विधानसभा जयपुर के चारदीवारी के मानसिंह टाउन हॉल में चला करती थी, नई विधानसभा आधुनिक परिवेश के साथ नए जयपुर में बनाई गई. लेकिन विधानसभा में विधायकों की उपस्थिति हमेशा शंकाओं से घिरी रही. खुलकर विधायक भले ही अंधविश्वासों के बारे में बात नहीं करें लेकिन अंदरूनी तौर पर कानाफूसी के जरिए यह कहते रहते हैं की विधानसभा के भवन को शुद्धिकरण की जरूरत है. विधानसभा के मौजूदा सचिवों ने भी अपनी कुर्सी टेबल का मुंह वास्तु अनुसार बदला. विधायकों के फोटो सेशन में शायद कभी ऐसा हुआ हो जब पूरे विधायक एक साथ नजर आय़े हो. साफ है सदन में कुर्सियां 200 है मगर कभी भी 200 नहीं बैठ पाते. जबकि सदन के कारपेट का रंग भी हरे से गुलाबी करने के पीछे समेत कई उपाय अब तक हो चुके है.