नई दिल्ली: तमिलनाडु में 'ब्लॉकबस्टर' विजय थलापति का दबदबा है. 2 साल पहले पार्टी बनाकर 64 साल पुरानी 'द्रविड़ राजनीति' की जड़ें हिला दीं. तमिलनाडु के नतीजों ने द्रविड़ राजनीति के दशकों पुराने किले को ढहा दिया. साल 1967 से 2021 के चुनाव तक यहां द्रमुक और अन्नाद्रमुक का दबदबा रहा है.
अभिनेता विजय की नई टीवीके पार्टी ने 107 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया. द्रमुक 60 का आंकड़ा छू पाई और अन्नाद्रमुक तो 47 पर ही सिमट गई. मुख्यमंत्री स्टालिन को टीवीके के वीएस बसु ने 8,795 वोट से हरा दिया.
विजय थलापति ने ड्राइवर के बेटे को उतारा और वो जीत गया. इस चुनाव में तमिलनाडु में पहली बार 'स्पष्ट बहुमत' किसी को नहीं मिला. बहुमत के लिए 118 सीटें चाहिए,TVK 107 सीटों के साथ बहुमत के करीब है, लेकिन सरकार बनाने के लिए गठबंधन चाहिए.
तमिलनाडु में अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) ने 107 सीटों पर जीत हासिल की है. एमके स्टालिन की डीएमके पिछड़ गई है. मुख्यमंत्री स्टालिन ने अपने गढ़ कोलाथुर में टीवीके से हार का सामना किया है.
पार्टी ने 60 सीटें जीती हैं. ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम (एआईएडीएमके) ने 47 सीटें जीतीं. कांग्रेस को 5 सीटें मिलीं. पीएमके ने 4 सीटों पर जीत हासिल की है. जबकि बाकी सीटें अन्य पार्टी के खाते में गई. तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा क्षेत्रों में 23 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान हुआ था.