भीलवाड़ा के युवा जगदीश बेमाली बने संगीत के उभरते सितारे

भीलवाड़ा के युवा जगदीश बेमाली बने संगीत के उभरते सितारे

भीलवाड़ा: राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के छोटे से गांव बेमाली में जन्मे और पले-बढ़े जगदीश बेमाली ने अपनी मेहनत और लगन से संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है. उनके माता-पिता, श्रवण गाडरी और रुकमण देवी ने हमेशा उनके सपनों को प्रोत्साहन दिया. बचपन से ही जगदीश को गाने का शौक था, और महज 14 साल की उम्र में उन्होंने संगीत के क्षेत्र में कदम रखा. उनके संघर्ष ने उन्हें 2017 में म्यूजिक करियर की शुरुआत करने का मौका दिया.

उनके गानों में पाई जाने वाली गहराई और भावनाएं श्रोताओं के दिल को छू जाती हैं. उनका गाना ‘घर आजा परदेसी पिया’ उनकी सफलता का मील का पत्थर साबित हुआ. इस गाने ने उन्हें लाखों दिलों में जगह दी और उनकी लोकप्रियता में चार चांद लगा दिए. उनकी मेहनत और उनकी प्रतिभा के चलते उन्हें राज्य स्तर पर पहचान मिली.

सबसे बड़ा सम्मान उन्हें तब मिला जब बॉलीवुड की मशहूर गायिका अलका याज्ञनिक ने उन्हें पुरस्कार दिया. यह उनके करियर के लिए एक ऐतिहासिक पल साबित हुआ. इस उपलब्धि ने उनके आत्मविश्वास को और भी बढ़ा दिया. भविष्य को लेकर जगदीश बेमाली बड़े सपने देख रहे हैं. उनका कहना है कि संगीत केवल उनका करियर नहीं बल्कि उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. वे हर दिन अपनी प्रतिभा को और निखारने की कोशिश में लगे रहते हैं. उनका मानना है कि संगीत के माध्यम से वे अपने गांव और राज्य का नाम पूरे देश में ऊंचा कर सकते हैं.

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